Type Here to Get Search Results !

ADS5

ADS2

अमेरिकी न्याय विभाग का बड़ा दावा: भारत की जेलों से भी गैंग चला रहे हैं लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया, अमेरिका करेगा प्रत्यर्पण की मांग

 

नई दिल्ली | 8 जुलाई 2026 | ✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार  

भारत के कुख्यात गैंगस्टरों लॉरेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया और उनके कथित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क को लेकर अमेरिका ने बड़ा और अभूतपूर्व कदम उठाने की घोषणा की है। अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) ने स्पष्ट किया है कि वह इन आरोपित गैंगस्टरों के साथ-साथ उन सभी लोगों के प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग करेगा, जिन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित अपराध, जबरन वसूली (Extortion), हत्या की साजिश और सीमा पार अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं।

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण और विवादास्पद टिप्पणी अमेरिकी न्याय विभाग के फर्स्ट असिस्टेंट यूनाइटेड स्टेट्स अटॉर्नी बिल एसायली (Bill Essayli) की रही, जिन्होंने कहा कि भारतीय जेलें इन गैंग लीडरों की आपराधिक गतिविधियों को रोकने में पर्याप्त साबित नहीं हुई हैं।

उन्होंने कहा कि यदि इन आरोपितों को अमेरिका लाया जाता है और संघीय (Federal) जेलों में रखा जाता है, तो वे वहां से अपने गिरोहों का संचालन नहीं कर पाएंगे।


"भारतीय जेलों में बंद हैं, फिर भी अपराध जारी" — अमेरिकी अधिकारी

मीडिया से बातचीत के दौरान बिल एसायली ने कहा कि यह स्पष्ट है कि केवल जेल में बंद होना इन अपराधियों की गतिविधियों को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है।

उनके अनुसार,

"इनमें से कुछ लोग पहले से ही भारत की जेलों में हैं, लेकिन इसके बावजूद वे अपने आपराधिक नेटवर्क को चला रहे हैं। जब वे अमेरिका की संघीय जेल में होंगे, तब वे किसी भी पीड़ित से वसूली नहीं कर पाएंगे।"

यह बयान भारत की जेल सुरक्षा व्यवस्था पर अप्रत्यक्ष लेकिन तीखी टिप्पणी माना जा रहा है।


अमेरिका किन लोगों का प्रत्यर्पण चाहता है?

अमेरिकी अभियोजन पक्ष के अनुसार प्रत्यर्पण की प्रक्रिया जिन प्रमुख लोगों के लिए शुरू की जाएगी, उनमें शामिल हैं—

  • लॉरेंस बिश्नोई

  • जग्गू भगवानपुरिया

  • रविंदर सिंह ढांडा गिरोह से जुड़े आरोपी

  • पंजाब पुलिस के इंस्पेक्टर एवं पूर्व SHO गुरिंदरजीत सिंह नागरा

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन सभी के खिलाफ ट्रांसनेशनल ऑर्गेनाइज्ड क्राइम (Transnational Organized Crime) से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।


पंजाब पुलिस अधिकारी भी अमेरिकी जांच के दायरे में

इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू पंजाब पुलिस के अधिकारी गुरिंदरजीत सिंह नागरा का नाम सामने आना है।

अमेरिकी न्याय विभाग का आरोप है कि नागरा ने अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहने वाले भारतीय मूल के एक परिवार को भारत में गंभीर आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी देकर 4 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 3.4 करोड़ रुपये) की वसूली करने की कोशिश की।

अमेरिका का दावा है कि यह कथित साजिश जग्गू भगवानपुरिया गिरोह के सदस्यों के साथ मिलकर रची गई थी।


अमेरिका ने साफ कहा—नागरा का भी प्रत्यर्पण होगा

जब मीडिया ने पूछा कि क्या अमेरिका गुरिंदरजीत सिंह नागरा का भी प्रत्यर्पण चाहता है?

बिल एसायली ने बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब दिया—

"हाँ। हमने उनके खिलाफ आरोप तय किए हैं और हम उनका अमेरिका प्रत्यर्पण कराएंगे।"


कैसे चल रहा था कथित अंतरराष्ट्रीय उगाही का नेटवर्क?

अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार—

  • कैलिफोर्निया के स्टॉकटन में रहने वाले गुरलाल सिंह नामक व्यक्ति के माध्यम से अमेरिका में बसे भारतीय मूल के लोगों को निशाना बनाया गया।

  • पीड़ितों को धमकी दी गई कि यदि उन्होंने पैसे नहीं दिए तो भारत में हत्या के मामलों में उनका नाम जोड़ दिया जाएगा।

  • कथित रूप से इसी रणनीति के तहत 4 लाख डॉलर की मांग की गई।


AAP नेता की हत्या का इस्तेमाल करने का आरोप

अमेरिकी अभियोजन पक्ष का आरोप है कि जिन प्रवासी भारतीयों को धमकाया गया, उन्हें यह कहा गया कि यदि उन्होंने रकम नहीं दी तो उन्हें आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता बलविंदर सिंह सत्कर्तार की हत्या के मामले में आरोपी बना दिया जाएगा।

बलविंदर सिंह सत्कर्तार की जनवरी 2026 में हत्या हुई थी।

पंजाब पुलिस के अनुसार—

  • हत्या के तीन आरोपी पहले से हिरासत में हैं।

  • जांच में विदेश में रहने वाले कुछ भारतीयों के साथ संभावित संपर्कों की भी जांच की गई थी।

हालांकि इस मामले की भारतीय जांच अपनी स्वतंत्र प्रक्रिया के तहत जारी है।


पंजाब पुलिस ने क्या कार्रवाई की?

अमेरिकी आरोप सामने आने के बाद पंजाब पुलिस ने गुरिंदरजीत सिंह नागरा को उनके पद से हटाकर होशियारपुर पुलिस लाइंस भेज दिया है।

मामले की विभागीय जांच शुरू की गई है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस जांच का नेतृत्व जालंधर रूरल के DIG कर रहे हैं।


लॉरेंस बिश्नोई पर अमेरिका के गंभीर आरोप

अमेरिकी न्याय विभाग का कहना है कि—

  • लॉरेंस बिश्नोई 2015 से भारत में गिरफ्तार है।

  • इसके बावजूद उसने अपने भरोसेमंद सहयोगियों और क्षेत्रीय कमांडरों के जरिए अपने नेटवर्क का विस्तार किया।

  • 2023 में उसे गुजरात की जेल में स्थानांतरित किया गया था।

अमेरिकी एजेंसियों का आरोप है कि जेल में रहते हुए भी उसका नेटवर्क सक्रिय बना रहा।


अमेरिका की संघीय जेलें क्यों अलग मानी जाती हैं?

बिल एसायली ने दावा किया कि अमेरिकी संघीय जेल प्रणाली ऐसी गतिविधियों को रोकने में सक्षम है।

उन्होंने कहा—

  • कैदियों की सभी फोन कॉल रिकॉर्ड होती हैं।

  • संचार पर लगातार निगरानी रखी जाती है।

  • किसी भी अवैध संपर्क को रोकने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है।

  • अभियोजन पक्ष स्वयं भी ऐसे मामलों पर नजर रखता है।


Supermax जेल में रखा जा सकता है

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यदि आरोपितों का प्रत्यर्पण सफल होता है तो उन्हें Maximum Security अथवा Supermax जेलों में रखा जा सकता है।

Supermax जेलें अमेरिका की सबसे सुरक्षित जेलें मानी जाती हैं।

संघीय स्तर पर अमेरिका में ऐसी प्रमुख जेल ADX Florence है, जहां अत्यंत खतरनाक अपराधियों को रखा जाता है।

यहां कैदियों के बाहरी दुनिया से संपर्क पर बेहद कठोर प्रतिबंध रहते हैं।


निज्जर हत्या मामले का भी उल्लेख

अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी आरोपपत्रों में लॉरेंस बिश्नोई पर हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की साजिश से जुड़े आरोप भी शामिल किए गए हैं।

निज्जर की जून 2023 में कनाडा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

इस घटना के बाद तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारतीय सरकारी एजेंसियों पर संलिप्तता के आरोप लगाए थे, जिन्हें भारत सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया था।


RCMP ने भारतीय सरकार की भूमिका से किया इनकार

इसी घटनाक्रम के बीच कनाडा की Royal Canadian Mounted Police (RCMP) ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि उनकी जांच में भारतीय सरकारी अधिकारियों की भूमिका के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं।

यह बयान भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


तीन बड़े आरोपपत्र जारी

अमेरिकी न्याय विभाग ने एक साथ तीन अलग-अलग आरोपपत्र जारी किए हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क

  • जग्गू भगवानपुरिया गिरोह

  • रविंदर सिंह ढांडा संगठन

इन पर हत्या, अंतरराष्ट्रीय उगाही, संगठित अपराध, आपराधिक साजिश और सीमा पार गैंग संचालन जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।


भारत-अमेरिका कानूनी सहयोग पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका औपचारिक रूप से इन आरोपितों का प्रत्यर्पण मांगता है, तो यह मामला भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि, आपराधिक न्याय सहयोग और सीमा पार संगठित अपराध के खिलाफ साझा कार्रवाई की एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन सकता है।

प्रत्यर्पण की प्रक्रिया कई कानूनी चरणों से गुजरती है और अंतिम निर्णय भारतीय न्यायिक एवं सरकारी प्रक्रियाओं के अनुसार होगा।


निष्कर्ष:-

अमेरिकी न्याय विभाग की यह कार्रवाई केवल कुछ गैंगस्टरों के खिलाफ अभियोजन भर नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, जेलों से संचालित आपराधिक नेटवर्क और भारत-अमेरिका कानून प्रवर्तन सहयोग से जुड़े व्यापक मुद्दों को भी सामने लाती है। फिलहाल अमेरिकी एजेंसियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं और प्रत्यर्पण की इच्छा जताई है, जबकि इन मामलों में अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित न्यायालयों और सक्षम प्राधिकारियों की प्रक्रिया के बाद ही तय होंगे। इस कारण आरोपों और न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना आवश्यक है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

ADS3

ADS4