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Sambhal: में योमे आशूरा का जुलूस बरामद, पूरे एहतराम और जोश के साथ अज़ादारों ने की शिरकत

 संभल 26 जून 2026 ।विस्तृत विश्लेषण |✍🏻 Z S Razzaqi |वरिष्ठ पत्रकार

कर्बला के शहीदों की याद में निकला जुलूस, इमाम हुसैन (रज़ि.) और उनके साथियों की अज़ीम कुर्बानी को किया गया याद

संभल, उत्तर प्रदेश — मोहर्रम की दसवीं तारीख यानी योमे आशूरा के मौके पर ऐतिहासिक शहर संभल में पूरे एहतराम, अकीदत और धार्मिक भावनाओं के साथ जुलूस बरामद किया गया।

अक़ीदत के साथ साथ मैदान में डटे हुए नौनिहाल अलमदार 

 इस अवसर पर बड़ी संख्या में अज़ादारों ने शिरकत की और कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन (रज़ि.) तथा उनके तमाम साथियों की अज़ीम शहादत और कुर्बानियों को याद करते हुए खिराज-ए-अकीदत पेश किया।

संभल के अलग-अलग इलाकों से निकले जुलूस, तस्वीरों में दिखा अकीदत का माहौल

योमे आशूरा के मौके पर संभल के विभिन्न इलाकों से जुलूस की तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्हें स्थानीय लोगों और हमारी न्यूज़ वेबसाइट के पाठकों द्वारा भेजा गया है। इन तस्वीरों में अज़ादारों की बड़ी मौजूदगी, धार्मिक परंपराओं का पालन और कर्बला की याद से जुड़े भावनात्मक दृश्य दिखाई दे रहे हैं।

जुलूस के दौरान लोगों ने पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ मोहर्रम की रस्मों को निभाया। माहौल में अकीदत, गम और कर्बला के शहीदों की याद से जुड़ी भावनाएं साफ नजर आईं।

योमे आशूरा और कर्बला का ऐतिहासिक वाकया

योमे आशूरा इस्लामी इतिहास के उस दर्दनाक और अहम वाकये से जुड़ा है, जब 10 मोहर्रम 61 हिजरी (680 ईस्वी) को कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन (रज़ि.) ने अपने परिवार और वफादार साथियों के साथ सच्चाई, इंसाफ और हक़ के लिए अज़ीम कुर्बानी पेश की।

कर्बला का वाकया सदियों से इंसानियत, सब्र, बहादुरी और अन्याय के सामने डटकर खड़े होने की मिसाल के रूप में याद किया जाता है। इमाम हुसैन (रज़ि.) और उनके साथियों ने कठिन हालात में भी अपने सिद्धांतों और इंसाफ के रास्ते को नहीं छोड़ा, जिसे दुनिया भर में सम्मान और अकीदत के साथ याद किया जाता है।

इमाम हुसैन की कुर्बानी पूरी इंसानियत के लिए पैगाम है : मीर शाह हुसैन

इस अवसर पर ऐतिहासिक शहर संभल के वरिष्ठ पत्रकार और शायर मीर शाह हुसैन ने इमाम हुसैन (रज़ि.) और कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों को याद करते हुए कहा कि कर्बला का पैगाम सिर्फ एक दौर या एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी इंसानियत के लिए एक महान संदेश है।

उन्होंने कहा,
"आज जरूरत है कि हम इमाम हुसैन की कुर्बानियों के संदेश को समझें। कर्बला हमें सिखाती है कि सच्चाई, इंसाफ और इंसानी मूल्यों के लिए मुश्किल हालात में भी हिम्मत के साथ खड़ा रहना चाहिए। इमाम हुसैन ने अपने किरदार और कुर्बानी से दुनिया को यह पैगाम दिया कि हक़ और इंसाफ की राह कभी नहीं छोड़ी जानी चाहिए।"

मीर शाह हुसैन ने आगे कहा कि मोहर्रम केवल इतिहास को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह अपने समाज में मोहब्बत, भाईचारे, इंसाफ और इंसानी मूल्यों को मजबूत करने की प्रेरणा भी देता है।

अज़ादारों ने पेश किया खिराज-ए-अकीदत

संभल में निकाले गए योमे आशूरा के जुलूस में अज़ादारों ने इमाम हुसैन (रज़ि.) और कर्बला के तमाम शहीदों को याद करते हुए अपनी श्रद्धा व्यक्त की। आयोजन के दौरान धार्मिक परंपराओं को सम्मान और अनुशासन के साथ निभाया गया।

मोहर्रम का यह अवसर लोगों को कर्बला के उस महान संदेश की याद दिलाता है, जिसमें सच्चाई, त्याग, सब्र और इंसानियत की अहमियत को सबसे ऊपर रखा गया है।


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