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मेरठ में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की प्रदेश कार्यकारिणी बैठक सम्पन्न, आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति पर मंथन

मेरठ, 7 जून 2026।विस्तृत विश्लेषण |✍🏻 Z S Razzaqi |वरिष्ठ पत्रकार 

मेरठ। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की उत्तर प्रदेश प्रदेश कार्यकारिणी की एक महत्वपूर्ण बैठक मेरठ में आयोजित की गई, जिसमें पार्टी के संगठनात्मक विस्तार, सदस्यता अभियान तथा आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर व्यापक चर्चा की गई। बैठक में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के अनेक पदाधिकारियों सहित उत्तर प्रदेश के लगभग 20 जिलों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया।


बैठक का मुख्य उद्देश्य पार्टी को उत्तर प्रदेश और समूचे उत्तर भारत में अधिक संगठित एवं प्रभावी बनाना था। इसके साथ ही भविष्य की राजनीतिक रणनीति, संगठन के विस्तार तथा जनसंपर्क अभियानों को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया गया।

चुनावी तैयारियों और संभावित गठबंधनों पर चर्चा

बैठक के दौरान आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी की रणनीति पर गंभीर विचार-विमर्श किया गया। नेताओं ने इस बात पर चर्चा की कि यदि भविष्य में किसी प्रकार का राजनीतिक गठबंधन (Alliance) बनता है तो किन राजनीतिक दलों के साथ सहयोग की संभावनाएं हो सकती हैं। हालांकि इस संबंध में किसी विशेष दल का नाम सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं किया गया, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विकल्पों पर विचार किया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में किसी भी क्षेत्रीय या राष्ट्रीय दल के लिए संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ गठबंधन की रणनीति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी संदर्भ में मुस्लिम लीग की यह बैठक आगामी चुनावों की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सदस्यता अभियान को गति देने पर जोर

बैठक में पार्टी के सदस्यता अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों माध्यमों के उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई। पार्टी नेतृत्व ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं तक पहुंच बढ़ाने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के नेटवर्क को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक राजनीति में डिजिटल सदस्यता अभियान की भूमिका लगातार बढ़ रही है, इसलिए सोशल मीडिया, वेबसाइट और अन्य ऑनलाइन माध्यमों का बेहतर उपयोग किया जाएगा। साथ ही गांवों, कस्बों और शहरों में प्रत्यक्ष जनसंपर्क अभियान भी जारी रखा जाएगा।

उत्तर भारत में पार्टी के विस्तार पर विशेष फोकस

बैठक को संबोधित करते हुए पार्टी को उत्तर भारत में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं पूर्व कुलपति, प्रोफेसर डॉ. बशीर ने संगठन की वैचारिक दिशा और भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने तथा समाज के विभिन्न वर्गों तक पार्टी की पहुंच बढ़ाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों की सफलता केवल चुनावी प्रदर्शन से नहीं, बल्कि जनता के बीच उनकी निरंतर सक्रियता और सामाजिक सरोकारों से भी तय होती है।

कई वरिष्ठ नेताओं की रही उपस्थिति

बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय सचिव खुर्रम अनीस उमर, सह सचिव गनी साहब, उत्तर प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मतीन, प्रदेश महासचिव डॉ. ओवैस अधिवक्ता तथा प्रदेश सचिव डॉ. कलीम अशरफ सैफी सहित अनेक वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया।

मीटिंग में सभी गड़मानीय पदाहिकारियो की चर्चा करते हुए झलकियां 

इसके अतिरिक्त संभल जनपद से मौलाना मोहम्मद मियां कासमी, जिया अशरफ, मौलाना मुकीम, मोहम्मद कासिम, तारिक कमाल तथा वरिष्ठ पत्रकार एवं शायर मीर शाह हुसैन आरिफ सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

लगभग 20 जिलों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा

आयोजकों के अनुसार बैठक में उत्तर प्रदेश के लगभग 20 जिलों से आए प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की राजनीतिक परिस्थितियों, संगठनात्मक चुनौतियों और सदस्यता अभियान की प्रगति पर भी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

बैठक के अंत में संगठन को मजबूत बनाने, सदस्यता अभियान को तेज करने तथा आगामी चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का संकल्प लिया गया।


राजनीतिक महत्व

राजनीतिक दृष्टि से यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। ऐसे समय में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का संगठनात्मक विस्तार और संभावित चुनावी रणनीति पर चर्चा यह संकेत देती है कि पार्टी उत्तर भारत में अपनी राजनीतिक उपस्थिति को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास कर रही है।

हालांकि पार्टी का वर्तमान जनाधार सीमित माना जाता है, लेकिन सदस्यता अभियान, संगठनात्मक विस्तार और संभावित राजनीतिक साझेदारियों के माध्यम से वह आने वाले समय में अपनी भूमिका को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।



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