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मीर शाह हुसैन के आवास पर 8 मोहर्रम की मजलिस का आयोजन, इमाम हुसैन की शिक्षाओं पर अमल करने का दिया संदेश

संभल 24 जून 2026 ।विस्तृत विश्लेषण |✍🏻 Z S Razzaqi |वरिष्ठ पत्रकार

संभल, उत्तर प्रदेश: 8 मोहर्रम के मौके पर शहर के प्रतिष्ठित वरिष्ठ शायर एवं पत्रकार मीर शाह हुसैन के आवास पर एक गरिमापूर्ण मजलिस का आयोजन किया गया। इस धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम में शहर के बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। मजलिस के दौरान कर्बला के शहीदों की याद को ताजा करते हुए हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की जिंदगी, उनके आदर्शों, संघर्ष और इंसानियत के संदेश पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।


कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की पूरी जिंदगी इंसाफ, सच्चाई, मानवता और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने अपने सिद्धांतों और कुर्बानी के जरिए दुनिया को यह संदेश दिया कि इंसान को हर हाल में सत्य और नैतिक मूल्यों के साथ खड़ा रहना चाहिए।

इस अवसर पर अपने संबोधन में डॉ. राशिक अनवर ने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि हम केवल इमाम हुसैन के नाम को याद न करें, बल्कि उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारें। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की सबसे बड़ी सीख इंसानियत की सेवा, जरूरतमंदों की मदद और हर व्यक्ति के साथ मोहब्बत और सम्मान का व्यवहार करना है।

उन्होंने कहा, “अगर हम वास्तव में इमाम हुसैन की शिक्षाओं पर अमल करना चाहते हैं तो हमें समाज में भाईचारा, इंसाफ और मानव सेवा को बढ़ावा देना होगा। किसी भी समाज की असली पहचान उसकी इंसानियत और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी से होती है।”

मजलिस में शहर के कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। इनमें खुसरो जवाद, हाजी मोनिस, अजीम अब्बासी, जियाउल सहर रज्जाकी, रेहान अली खान, नजीर खान, उस्मान नौशाही, मास्टर फैजान रिजवी, सरफराज जहूरी, शारिक जीलानी, अनवर सैफी सहित कई गणमान्य नागरिक शामिल रहे।

कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ शायर और पत्रकार मीर शाह हुसैन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम से हमें यह सीखना चाहिए कि समाज और अवाम की खिदमत किस तरह की जाती है। उन्होंने कहा कि जो लोग संवैधानिक पदों पर बैठकर अपनी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाने में असफल रहते हैं, उन्हें अपनी नैतिक जिम्मेदारियों पर भी विचार करना चाहिए।

मीर शाह हुसैन ने कहा कि किसी भी शहर की तरक्की केवल दावों से नहीं होती, बल्कि ईमानदार नेतृत्व, बेहतर व्यवस्था और जनता के हितों के प्रति गंभीर सोच से होती है। उन्होंने संभल के मौजूदा हालात पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज जरूरत है कि लोग सही नेतृत्व का चयन करें ताकि शहर का भविष्य बेहतर दिशा में आगे बढ़ सके।

उन्होंने अपने अंदाज-ए-शायरी में शहर की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा—

“संभल में क्या हुआ है तरक्की के नाम पर,
हर चीज बिक रही है यहां महंगे दाम पर।”

मजलिस का समापन दुआ और इबादत के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के बताए रास्ते पर चलने, समाज में मोहब्बत और इंसानियत को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।

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