नई दिल्ली | 11 जुलाई 2026 | ✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार
मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है। अमेरिका द्वारा इस सप्ताह ईरान पर तीसरे दौर की व्यापक सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने बहरीन, कुवैत, कतर, ओमान और जॉर्डन सहित कई खाड़ी देशों पर मिसाइल एवं ड्रोन हमले करने का दावा किया है। वहीं संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी अपने हवाई क्षेत्र में मिसाइलों और ड्रोन को इंटरसेप्ट करने की पुष्टि की है।
हालांकि ईरान के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है, लेकिन पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट, एयर डिफेंस सिस्टम की सक्रियता और लगातार बज रहे सायरन यह संकेत दे रहे हैं कि क्षेत्रीय तनाव अपने सबसे गंभीर स्तरों में से एक पर पहुंच चुका है।
संघर्ष की जड़: होरमुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की लड़ाई
इस नए संकट का केंद्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बन गया है।
यही वह मार्ग है जहां से दुनिया के समुद्री तेल निर्यात का लगभग एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है। यदि यहां लंबे समय तक सैन्य तनाव बना रहता है तो वैश्विक तेल कीमतों, गैस आपूर्ति, शिपिंग उद्योग और विश्व अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
अमेरिका का आरोप है कि ईरान समर्थित बलों ने साइप्रस के झंडे वाले एक कंटेनर जहाज M/V GFS Galaxy पर हमला किया, जिसके बाद अमेरिकी सेना ने व्यापक जवाबी कार्रवाई शुरू की।
अमेरिका का दावा: 140 से अधिक सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार,
- ईरान में लगभग 140 सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए।
- इनमें मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन बेस, नौसैनिक अड्डे, हथियार भंडार, संचार नेटवर्क और तटीय निगरानी केंद्र शामिल थे।
- अमेरिका का कहना है कि पिछले तीन दिनों में कुल 300 से अधिक सैन्य लक्ष्यों पर कार्रवाई की गई है।
- अमेरिकी सेना के अनुसार इन हमलों का उद्देश्य ईरान की समुद्री मार्गों पर हमला करने की क्षमता को कमजोर करना था।
अमेरिका ने यह भी दावा किया कि उसकी नौसेना ने मई से अब तक 800 से अधिक वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित रूप से होरमुज़ जलडमरूमध्य पार कराने में सहायता की है।
ईरान का दावा: अमेरिका समर्थित सैन्य ढांचों पर जवाबी कार्रवाई
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि उसने ओमान के दुक्म (Duqm) बंदरगाह स्थित उन लॉजिस्टिक और ईंधन आपूर्ति केंद्रों पर हमला किया जिनका उपयोग अमेरिकी विमानवाहक पोतों के समर्थन के लिए किया जाता है।
IRGC का दावा है कि
- कई सैन्य लॉजिस्टिक केंद्र नष्ट कर दिए गए।
- यह अमेरिकी बमबारी के जवाब में तीसरे चरण की कार्रवाई थी।
- यदि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने हमले जारी रखे तो इससे भी अधिक "विनाशकारी जवाब" दिया जाएगा।
इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बहरीन, कतर और कुवैत में लगातार बजते रहे सायरन
तनाव बढ़ने के साथ कई खाड़ी देशों ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह जारी की।
बहरीन
- गृह मंत्रालय ने दो बार राष्ट्रीय सुरक्षा सायरन बजाए।
- नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का निर्देश दिया गया।
कतर
- आंतरिक मंत्रालय ने सुरक्षा खतरे का स्तर बढ़ाकर "हाई" कर दिया।
- लोगों से घरों के अंदर रहने और खिड़कियों से दूर रहने की अपील की गई।
कुवैत
- सेना ने "शत्रुतापूर्ण हवाई लक्ष्यों" को इंटरसेप्ट करने की पुष्टि की।
- अधिकारियों ने कहा कि सुनाई दे रहे धमाकों की आवाजें एयर डिफेंस सिस्टम की कार्रवाई का परिणाम हैं।
संयुक्त अरब अमीरात
- अधिकारियों ने मिसाइल और ड्रोन खतरों को निष्क्रिय करने की जानकारी दी।
- हालांकि किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं की गई।
क्या खाड़ी देश युद्ध में शामिल हैं?
ईरान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों का उपयोग उसके खिलाफ किया जा रहा है।
दूसरी ओर,
- कतर,
- बहरीन,
- कुवैत,
- यूएई
का कहना है कि वे इस युद्ध का हिस्सा नहीं हैं और अमेरिकी सैन्य अड्डे केवल द्विपक्षीय रक्षा समझौतों के तहत संचालित होते हैं।
इन देशों ने बार-बार स्पष्ट किया है कि वे क्षेत्रीय युद्ध नहीं चाहते।
होरमुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान का सख्त रुख
ईरान ने संकेत दिया है कि वह होरमुज़ जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा।
तेहरान का कहना है कि
- बिना समन्वय के गुजरने वाले जहाज समझौते का उल्लंघन कर रहे हैं।
- ऐसे जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
- अमेरिका द्वारा इस समुद्री मार्ग में सैन्य हस्तक्षेप अस्वीकार्य है।
यदि यह स्थिति बनी रहती है तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।
ईरानी सेना की चेतावनी
ईरानी सेना के वरिष्ठ अधिकारी ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरामीनिया ने कहा कि
- अमेरिका को दोनों देशों के बीच हुए समझौते (MoU) का पालन करना चाहिए।
- ईरान की सेना होरमुज़ जलडमरूमध्य में अपने अधिकारों की रक्षा करेगी।
- सैन्य बल लगातार संभावित लक्ष्यों की सूची अपडेट कर रहे हैं।
यह बयान इस बात का संकेत है कि ईरान लंबी सैन्य तैयारी के साथ आगे बढ़ रहा है।
ईरान के शीर्ष वार्ताकार का संदेश
ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाकिर ग़ालिबाफ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि
"एकतरफा समझौतों का दौर समाप्त हो चुका है। हमने पहले ही कहा था—या तो अपने वादे निभाइए, या उसकी कीमत चुकाइए।"
इस बयान को अमेरिका के लिए प्रत्यक्ष राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
समुद्री व्यापार पर बढ़ता खतरा
यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार,
- हमले के बाद प्रभावित मालवाहक जहाज के चालक दल को जहाज छोड़ना पड़ा।
- उन्हें लाइफबोट के जरिए सुरक्षित निकाला गया।
- क्षेत्र में नौवहन कंपनियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
यदि होरमुज़ जलडमरूमध्य लंबे समय तक असुरक्षित रहता है तो विश्वभर में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और गहराता है तो इसके परिणाम दूरगामी हो सकते हैं—
- कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल।
- वैश्विक शिपिंग लागत में वृद्धि।
- एशिया और यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव।
- शेयर बाजारों में अस्थिरता।
- महंगाई पर नया दबाव।
भारत, चीन, जापान और यूरोप जैसे ऊर्जा आयातक देशों पर इसका प्रभाव विशेष रूप से दिखाई दे सकता है।
अभी क्या स्थिति है?
फिलहाल दोनों पक्ष लगातार आक्रामक बयान दे रहे हैं।
- अमेरिका सैन्य दबाव बढ़ाने के संकेत दे रहा है।
- ईरान जवाबी कार्रवाई जारी रखने की चेतावनी दे रहा है।
- खाड़ी देशों में सुरक्षा व्यवस्था उच्चतम स्तर पर है।
- अंतरराष्ट्रीय समुदाय युद्ध को व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में बदलने से रोकने के प्रयासों पर नजर बनाए हुए है।
निष्कर्ष
मध्य पूर्व का यह संकट केवल अमेरिका और ईरान के बीच सीमित सैन्य टकराव नहीं रह गया है। होरमुज़ जलडमरूमध्य, खाड़ी देशों की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार—सभी इस संघर्ष से सीधे प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि दोनों पक्षों के कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां यह संकेत दे रही हैं कि आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक संवेदनशील हो सकती है। ऐसे में दुनिया की निगाहें केवल युद्धक्षेत्र पर ही नहीं, बल्कि उन कूटनीतिक प्रयासों पर भी टिकी हैं जो इस संकट को व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदलने से रोक सकते हैं।
