नई दिल्ली | 2 अप्रैल 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | वरिष्ठ पत्रकार
महंगाई की चपेट में सांस ले रही भारतीय जनता के लिए अब बिजली भी एक नया संकट बन गई है। देश भर में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटरों की जबरन स्थापना और उसके बाद आने वाले “मनमाने” बिलों ने आम आदमी को त्रस्त कर दिया है। जहां सरकार RDSS योजना के तहत 25 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाकर AT&C लॉस कम करने और “सटीक बिलिंग” का दावा कर रही है, वहीं उपभोक्ता पुराने बकाये, अचानक दोगुने-तिगुने बिल, बिना सहमति स्थापना और नकारात्मक बैलेंस पर तुरंत कटौती की शिकायतें कर रहे हैं।
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यह रिपोर्ट MoP, CEA, राज्य विद्युत नियामक आयोगों, RDSS डैशबोर्ड, उपभोक्ता संगठनों, PIL दस्तावेजों और 2025-26 की ग्राउंड रिपोर्ट्स पर आधारित है। हम तथ्यों, आंकड़ों, उपभोक्ता अनुभवों और सरकारी दावों के साथ पूरी तस्वीर पेश कर रहे हैं – ताकि पाठक स्वयं फैसला कर सकें कि यह “सुधार” है या “एक और बोझ”।
1. स्मार्ट प्रीपेड मीटर क्या है और सरकार क्यों जोर दे रही है?
स्मार्ट मीटर रिमोट रीडिंग, रियल-टाइम डेटा और प्रीपेड फीचर वाला डिजिटल मीटर है। RDSS (Revamped Distribution Sector Scheme) के तहत केंद्र सरकार ने 25 करोड़ पारंपरिक मीटरों को 2025-26 तक स्मार्ट प्रीपेड मीटर से बदलने का लक्ष्य रखा था (अब कुछ राज्यों में 2027-28 तक बढ़ाया गया)।
सरकार के दावे (MoP और CEA 2026):
- AT&C लॉस (Aggregate Technical & Commercial) को सिंगल डिजिट में लाना।
- मैनुअल रीडिंग की गलतियां खत्म, चोरी रोकना।
- उपभोक्ता को रिचार्ज की सुविधा और खपत ट्रैकिंग।
- मार्च 2026 तक 4.8 करोड़ से ज्यादा स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके (NSGM डेटा)। CEA ने मार्च 2026 में ड्राफ्ट नियम जारी कर सभी AMI (Advanced Metering Infrastructure) में प्रीपेड फीचर अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया।
लेकिन हकीकत: कई डिस्कॉम (बिजली वितरण कंपनियां) ने घरेलू उपभोक्ताओं पर बिना सहमति प्रीपेड मोड थोप दिया, जबकि बिजली अधिनियम 2003 की धारा 47(5) उपभोक्ता को पोस्टपेड या प्रीपेड चुनने का अधिकार देती है।
2. देश भर में उपभोक्ताओं की चीख: “मनमाना बिलिंग” और “जबरन स्थापना”
2025-26 में सबसे ज्यादा शिकायतें इन राज्यों से आईं:
- उत्तर प्रदेश: UPPCL ने 74 लाख+ स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए। 69.6 लाख उपभोक्ताओं को बिना नोटिस पोस्टपेड से प्रीपेड में शिफ्ट कर दिया। UPERC ने मार्च 2026 में डिस्कॉम को नोटिस जारी किया – रिचार्ज के बाद भी घंटों बिजली न आने और पुराने बकाये अचानक दिखने की शिकायतों पर। उपभोक्ता परिषद ने CBI जांच की मांग की।
- महाराष्ट्र (मुंबई BEST): उपभोक्ता आंदोलन के बाद रोलआउट रोका गया। बिल 1200 रुपये से 3000 रुपये हो गए। एक्टिविस्ट कमलाकर शेनॉय ने MERC में याचिका दायर कर कहा – “मीटर की 12,000 रुपये की कीमत चुपके से टैरिफ में जोड़ दी गई।”
- झारखंड (रांची): स्मार्ट मीटर लगने के बाद 2022 के पुराने बकाये (2000-10,000 रुपये) ब्याज सहित मांगे जा रहे हैं।
- बिहार: 3 लाख+ मीटर लगे। उपभोक्ता दोगुने-तिगुने बिल और तुरंत कटौती की शिकायत कर रहे हैं। RJD ने इसे “लूट” बताया।
- नोएडा, गोवा, नागालैंड: जबरन स्थापना, सहमति न लेने और “फास्ट रनिंग” मीटर की शिकायतें। BPL उपभोक्ता को 64 लाख का बिल तक आया (भागलपुर)।
आम शिकायतें:
- पुराने मीटर के बकाये अचानक दिखना।
- बिल में 50-200% वृद्धि।
- नकारात्मक बैलेंस पर स्वतः कटौती + रिचार्ज के बाद देरी।
- मीटर की कीमत (2800-11,000 रुपये) अप्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ता पर डालना।
- डेटा एरर और सर्वर डाउन।
3. गहन विश्लेषण: सुधार या “स्मार्ट लूट”?
डिस्कॉम का फायदा: प्रीपेड से कैश फ्लो बेहतर, कमर्शियल लॉस घटा। लेकिन उपभोक्ता ट्रस्ट का नुकसान। CRISIL रिपोर्ट (2025) कहती है कि लक्ष्य से बहुत पीछे – केवल 21% इंस्टॉलेशन।
उपभोक्ता नुकसान: महंगाई (खाने-पीने, ईंधन) के बीच बिजली बिल 30-100% बढ़ना एक और झटका। ग्रामीण और निम्न-मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित।
तकनीकी-प्रशासनिक खामियां:
- सर्वर-मीटर सिंक न होना।
- पुराने बकाये का अचानक ट्रांसफर।
- थर्ड-पार्टी एजेंसी द्वारा गलत डेटा एंट्री।
- मीटर कीमत में अनियमितताएं (UPERC ने UP में अतिरिक्त चार्ज रिफंड का आदेश दिया)।
भ्रष्टाचार के आरोप: कर्नाटक में 7500 करोड़ का “स्मार्ट मीटर स्कैम” (टेंडर में अनियमितता), आंध्र प्रदेश मॉडल की पुनरावृत्ति। कुछ राज्यों में प्राइवेट कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप।
सरकारी बचाव: MoP कहता है – “गलत सूचना फैलाई जा रही है।” पुराने मीटर पर औसत बिलिंग थी, अब असल खपत पर बिल आ रहा है। ग्रिवांस रिड्रेसल: CGRF, Ombudsman। लेकिन उपभोक्ता कहते हैं – “शिकायत करने पर भी सुनवाई नहीं।”
4. कानूनी और नियामकीय स्थिति
- बॉम्बे हाई कोर्ट में PIL लंबित (2024 से) – जबरन प्रीपेड पर रोक की मांग।
- UPERC, MERC ने कई मामलों में डिस्कॉम को फटकार लगाई।
- बिजली (उपभोक्ता अधिकार) नियम 2020 के तहत मल्टी-टियर शिकायत तंत्र है, लेकिन जमीनी स्तर पर कमजोर।
- CEA 2026 ड्राफ्ट: सभी स्मार्ट मीटर में प्रीपेड अनिवार्य, लेकिन उपभोक्ता संगठन इसे “एकतरफा” बता रहे हैं।
5. निष्कर्ष और सुझाव: सुधार की जरूरत
स्मार्ट मीटर तकनीकी रूप से जरूरी हैं, लेकिन लागू करने का तरीका “मनमाना” और “उपभोक्ता-विरोधी” साबित हो रहा है। महंगाई, बेरोजगारी और अराजकता के माहौल में यह आम जनता पर “एक और भयानक बोझ” बन गया है।
तत्काल जरूरी कदम:
- सभी राज्यों में सहमति अनिवार्य + पोस्टपेड को डिफॉल्ट रखें।
- पुराने बकाये को आसान किस्तों में वसूलें।
- स्वतंत्र ऑडिट और चेक मीटर लगाएं।
- मीटर कीमत उपभोक्ता पर न डालें।
- रिचार्ज के बाद 30 मिनट में बिजली बहाल करने का नियम।
- उपभोक्ता शिक्षा अभियान + हेल्पलाइन को मजबूत करें।
बिजली कोई विलासिता नहीं, जरूरत है। जब तक डिस्कॉम और सरकार उपभोक्ता को पार्टनर नहीं मानेंगी, तब तक “स्मार्ट” मीटर “स्मार्ट लूट” ही लगेंगे। जनता, मीडिया और न्यायपालिका को सतर्क रहना होगा।
