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संभल में आठवें इमाम हज़रत इमाम अली रज़ा अलैहिस्सलाम की विलादत पर सजी महफ़िल-ए-जश्न

संभल |1 मई 2026  |✍🏻 Z S Razzaqi |  वरिष्ठ पत्रकार 

“आइम्मा की तालीम इंसानियत को बेहतर ज़िंदगी देने का पैग़ाम है” — मौलाना एहतेशाम नक़वी

उत्तर प्रदेश के संभल शहर में आठवें इमाम, हज़रत इमाम अली रज़ा अलैहिस्सलाम की विलादत के मुबारक मौके पर एक शानदार, रूहानी और इल्मी महफ़िल-ए-जश्न का आयोजन किया गया। बीते वर्षों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी “कंज़ा रौग़-ए-उर्दू सोसाइटी” के तत्वावधान में मोहल्ला हातीम सराय स्थित प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं लेखिका डॉ. किश्वर जहाँ ज़ैदी के आवास पर यह विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें शहर की अदबी, शैक्षिक और सामाजिक हस्तियों की बड़ी संख्या ने शिरकत की।

महफ़िल का माहौल पूरी तरह इश्क़-ए-अहलेबैत, अदब, इल्म और मोहब्बत से सराबोर दिखाई दिया। कार्यक्रम में ईरान से तशरीफ़ लाए प्रसिद्ध धर्मगुरु मौलाना एहतेशाम नक़वी ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त किए और समाज को अमन, भाईचारे तथा इंसानियत का संदेश दिया।

आइम्मा की तालीम इंसानी समाज के लिए रहनुमाई: मौलाना एहतेशाम नक़वी

अपने प्रभावशाली संबोधन में मौलाना एहतेशाम नक़वी ने कहा कि आज पूरी दुनिया अशांति, नफ़रत और संघर्ष के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में आइम्मा-ए-अहलेबैत की शिक्षाएं इंसानियत के लिए उम्मीद की सबसे बड़ी रोशनी हैं। उन्होंने कहा:

“आज अंगारों पर लोटती हुई दुनिया को ज़रूरत है कि हम उसे बेहतर ज़िंदगी फ़राहम करें। इस्लाम दुनिया का वहिद मज़हब है जो अमन, इंसानियत और मोहब्बत के साथ जीने का दर्स देता है।”

उन्होंने आगे कहा कि हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तालीमात को आम करना वक्त की सबसे बड़ी ज़रूरत है, ताकि दुनिया नफ़रत के बजाय मोहब्बत और इंसाफ़ से भर सके। मौलाना नक़वी ने युवाओं से अपनी तहज़ीब, विरासत और दीन की असली शिक्षाओं को अपनाने की अपील की।

शायरों और अदीबों ने पेश किए मनज़ूम अक़ीदतनामे

तक़रीब की शुरुआत नातिया और मनज़ूम अक़ीदतनामों से हुई, जिसमें शहर और क्षेत्र के मशहूर शायरों तथा अदीबों ने अपने ख़ूबसूरत कलाम पेश किए। महफ़िल में प्रस्तुत किए गए अशआर और रचनाओं ने उपस्थित लोगों को भावुक और प्रभावित कर दिया।

इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार एवं बुद्धिजीवी डॉ. नसीमुज़ ज़फ़र साहब ने अपना प्रभावशाली कलाम पेश किया। मशहूर शायर शफ़ीक़ बरकाती ने भी अपनी अदबी प्रस्तुति से महफ़िल को रौनक बख्शी। प्रोफेसर आबिद हुसैन हैदरी साहब ने अपने विचारोत्तेजक अशआर के माध्यम से अहलेबैत की महान शिक्षाओं को उजागर किया।

वरिष्ठ पत्रकार और शायर मीर शाह हुसैन आरिफ़ साहब ने भी अपना ख़ूबसूरत कलाम पेश करते हुए मोहब्बत, इंसानियत और तहज़ीब के पैग़ाम को मज़बूती से रखा। इसके अलावा जमाल हुसैन, मौलाना अज़हर और तौसीफ़ रज़ा नक़वी ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से महफ़िल को अदबी और रूहानी रंग में रंग दिया।

शहर की नामचीन हस्तियों की रही मौजूदगी

कार्यक्रम में संभल शहर के बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, शिक्षाविद, साहित्यकार, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। उपस्थित लोगों ने इस आयोजन को न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण बताया।

महफ़िल में मौजूद लोगों ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आपसी भाईचारे, मोहब्बत और इंसानी मूल्यों को मज़बूत करने का काम करते हैं। खास तौर पर नई पीढ़ी को अहलेबैत की शिक्षाओं से जोड़ना आज के दौर की अहम ज़रूरत है।

डॉ. किश्वर जहाँ ज़ैदी ने जताया आभार

कार्यक्रम के अंत में प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं लेखिका डॉ. किश्वर जहाँ ज़ैदी ने सभी मेहमानों, उलेमा, शायरों, अदीबों और प्रतिभागियों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की महफ़िलें समाज में सकारात्मक सोच और इल्म की रौशनी फैलाने का ज़रिया बनती हैं।

उन्होंने कहा कि कंज़ा रौग़-ए-उर्दू सोसाइटी हमेशा अदब, तहज़ीब, उर्दू ज़बान और इंसानी मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत रही है और आगे भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।

मेहमानों के लिए शानदार खाने और नाश्ते का इंतज़ाम

कार्यक्रम के समापन पर सभी मेहमानों के लिए बेहतरीन नाश्ते और खाने का विशेष इंतज़ाम किया गया। लोगों ने आयोजन की शानदार व्यवस्था, अदबी माहौल और मेज़बानी की जमकर सराहना की।

यह महफ़िल न केवल एक धार्मिक आयोजन रही, बल्कि यह इंसानियत, मोहब्बत, इल्म और सांस्कृतिक एकता का ऐसा खूबसूरत संगम बनी, जिसने उपस्थित लोगों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी।



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