संभल, 13 जून 2026।विस्तृत विश्लेषण |✍🏻 Z S Razzaqi |वरिष्ठ पत्रकार
डॉ. नसीम उस ज़फ़र एजुकेशनल सोसाइटी के तत्वावधान में आयोजित हुई विचार गोष्ठी, शहर के शिक्षाविदों, साहित्यकारों और समाजसेवियों ने रखे अपने विचार
शहर में शैक्षिक, सामाजिक और बौद्धिक जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डॉ. नसीम उस ज़फ़र एजुकेशनल सोसाइटी के तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह गोष्ठी वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रख्यात शायर मीर शाह हुसैन आरिफ़ के निवास पर सम्पन्न हुई, जिसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े शिक्षाविदों, समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
गोष्ठी का मुख्य विषय समाज में शिक्षा, नैतिक मूल्यों और नई पीढ़ी के मार्गदर्शन में वरिष्ठ नागरिकों की भूमिका रहा। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि किसी भी समाज की प्रगति केवल आधुनिक शिक्षा से नहीं, बल्कि बुज़ुर्गों के अनुभव, मार्गदर्शन और नैतिक शिक्षाओं से भी सुनिश्चित होती है।
इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं सामाजिक चिंतक मोहम्मद सरफ़राज़ ज़हूरी ने कहा कि बुज़ुर्गों की तालीम, जीवन के अनुभव और उनकी दूरदर्शिता नई नस्ल को सफलता की राह दिखाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी आधुनिक तकनीक और ज्ञान से सम्पन्न है, लेकिन उसे अपने बुज़ुर्गों के अनुभवों से सीख लेकर जीवन के वास्तविक मूल्यों को भी समझना चाहिए।
सरफ़राज़ ज़हूरी ने कहा कि परिवार और समाज की मजबूत नींव बुज़ुर्गों की सलाह, उनके अनुभव और उनके संघर्षों की कहानियों पर टिकी होती है। यदि युवा वर्ग अपने वरिष्ठों के अनुभवों से मार्गदर्शन प्राप्त करे तो वह न केवल व्यक्तिगत जीवन में बल्कि सामाजिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में भी अधिक सफलता प्राप्त कर सकता है।
गोष्ठी में मोहम्मद उस्मान नौशाही ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र की तरक्की का आधार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा होती है। उन्होंने युवाओं से ज्ञानार्जन के साथ-साथ नैतिक शिक्षा को भी अपनाने का आह्वान किया।
ज़ियाउस सहर रज़्ज़ाक़ी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में समाज को ऐसे शिक्षित और जागरूक युवाओं की आवश्यकता है जो सामाजिक जिम्मेदारियों को समझते हों और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकें। उन्होंने सामाजिक सौहार्द, शिक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया।
वहीं शारिक जीलानी ने साहित्य और शिक्षा के आपसी संबंधों पर चर्चा करते हुए कहा कि साहित्य समाज का आईना होता है और यह नई पीढ़ी के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने युवाओं को अध्ययन की आदत विकसित करने और साहित्य से जुड़ने की सलाह दी।
कार्यक्रम के मेज़बान एवं वरिष्ठ पत्रकार मीर शाह हुसैन आरिफ़ ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे बौद्धिक संवाद समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनते हैं। उन्होंने कहा कि विचारों का आदान-प्रदान ही किसी भी समाज को आगे बढ़ाने की शक्ति देता है।
गोष्ठी के दौरान शिक्षा, सामाजिक विकास, युवा नेतृत्व, साहित्यिक गतिविधियों और समाज में बढ़ती नैतिक चुनौतियों जैसे विषयों पर भी गंभीर चर्चा हुई। वक्ताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि वर्तमान दौर में युवाओं को केवल रोजगारपरक शिक्षा ही नहीं बल्कि चरित्र निर्माण, सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों की शिक्षा भी दी जानी चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने समाज में शिक्षा के प्रसार, युवाओं के सर्वांगीण विकास और सामाजिक जागरूकता को बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। गोष्ठी सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई और उपस्थित लोगों ने भविष्य में भी इस प्रकार के विचार-विमर्श कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता व्यक्त की।
यह आयोजन न केवल शिक्षा और समाज के विभिन्न पहलुओं पर सार्थक चर्चा का मंच बना, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि बुज़ुर्गों का अनुभव और मार्गदर्शन किसी भी समाज की सबसे बड़ी पूंजी है, जो नई पीढ़ी को सफलता, संस्कार और सही दिशा प्रदान कर सकता है।
