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मोदी जी हर चुनाव से पहले भरपूर वादे करते हैं… लेकिन जनता को मिला क्या? 2014 से 2026 तक का गहन विश्लेषण – “अच्छे दिन”, “15 लाख”, “मोदी की गारंटी” और जनता की निराशा

नई दिल्ली 25 फरवरी 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi |वरिष्ठ पत्रकार 

हर लोकसभा या विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की ओर से ऐसे वादे किए जाते हैं कि सुनने वाले का दिल भर आता है। “बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार”, “अच्छे दिन आने वाले हैं”, “काला धन वापस लाएंगे और हर भारतीय के खाते में 15 लाख रुपए”, “हर साल 2 करोड़ नौकरियां”, “दिल्ली में महिलाओं को 2500 रुपये महीना”, “राजस्थान में हर दीवाली-होली पर फ्री गैस सिलेंडर”… और 2024 में तो पूरा चुनाव “मोदी की गारंटी” पर लड़ा गया।

लेकिन जब चुनाव बीत जाते हैं, तो ये वादे धीरे-धीरे “जुमला” या “इडियम” कहकर खारिज कर दिए जाते हैं। जनता पूछती है – आखिर कब आएंगे अच्छे दिन? कब आएंगे 15 लाख? कब मिलेंगी 2 करोड़ नौकरियां हर साल? यह रिपोर्ट 2014 से 2026 तक के सभी प्रमुख वादों, सरकारी आंकड़ों, स्वतंत्र संस्थाओं की रिपोर्ट्स (CMIE, RBI, NSSO, World Bank, Pew Research) और तथ्यों पर आधारित गहन विश्लेषण है।

1. 2014: “अबकी बार मोदी सरकार” – सबसे बड़े वादे

2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी जी ने पूरे देश में घूम-घूमकर तीन सबसे बड़े वादे किए थे:

  • काला धन वापस लाकर हर खाते में 15 लाख रुपये: रैली में बार-बार कहा गया – “विदेश में जमा काला धन वापस आएगा, हर गरीब को 15-20 लाख मिलेंगे।” वास्तविकता: चुनाव के बाद अमित शाह ने कहा – “यह इडियम था, अक्षरशः नहीं लिया जाना चाहिए।” कोई पैसा किसी खाते में नहीं आया। RTI में PMO ने जवाब दिया – “कोई ऐसा आंकड़ा या योजना नहीं है।” स्विस बैंक में भारतीयों का काला धन 2014 में 2.5 लाख करोड़ था, 2023 में बढ़कर 6 लाख करोड़ से ज्यादा हो गया (Global Financial Integrity Report)।
  • महंगाई पर लगाम, अच्छे दिन: “बहुत हुई महंगाई की मार” स्लोगन के साथ वादा किया गया कि पेट्रोल-डीजल, दाल-रोटी सस्ती होंगी। वास्तविकता: 2014 में CPI महंगाई 9.4% थी। 2022 में 7.8% पर पहुंच गई। पेट्रोल 2014 में औसत 72 रुपये था, 2022 में 110 रुपये से ऊपर चला गया। अच्छे दिन का नारा धीरे-धीरे गायब हो गया।
  • 2 करोड़ नौकरियां हर साल: मोदी जी ने स्पष्ट कहा था – “हम हर साल 2 करोड़ युवाओं को रोजगार देंगे।” वास्तविकता: CMIE डेटा के अनुसार 2014-2024 के बीच औसतन 4-5 लाख नौकरियां सालाना बनीं, 2 करोड़ की बात दूर रही। युवा बेरोजगारी 2014 में 10.2% थी, 2024 में 16.2% तक पहुंच गई (PLFS 2024)।

2. 2019: “मोदी है तो मुमकिन है” – नए और बड़े वादे

2019 में वादों की लिस्ट और लंबी हो गई:

  • किसानों की आय दोगुनी (2022 तक)
  • 10 करोड़ महिलाओं को उज्ज्वला गैस कनेक्शन
  • 2 करोड़ रोजगार जारी
  • CAA, Article 370 हटाना आदि

किसानों की आय दोगुनी: 2016 में वादा किया गया। 2022 तक आय सिर्फ 28% बढ़ी (NSSO-2023)। MSP पर 50% मुनाफा देने का वादा भी अधूरा रहा। तीन कृषि कानून लाए गए, लेकिन किसान आंदोलन के बाद वापस लेने पड़े।

रोजगार: 2019 में फिर 2 करोड़ नौकरियों का वादा दोहराया गया। लेकिन 2019-2024 में औसतन 3-4 लाख नौकरियां सालाना बनीं।

3. 2024: “मोदी की गारंटी” – सबसे पॉलिश्ड कैंपेन

2024 के चुनाव में भाजपा ने पूरा अभियान “मोदी की गारंटी” पर चलाया। मेनिफेस्टो में 24 गारंटी थीं:

  • भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना
  • हर साल लाखों नई नौकरियां
  • किसानों को आय दोगुनी
  • महिलाओं, गरीबों के लिए नई योजनाएं

वास्तविकता 2026 तक: अर्थव्यवस्था पांचवीं से चौथी स्थान पर पहुंची है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय अभी भी 140वें स्थान पर है। बेरोजगारी दर 2025 में 8.1% रही (CMIE जनवरी 2026)। युवा बेरोजगारी 13.8%।

4. राज्य चुनावों में वादे – दिल्ली और राजस्थान के उदाहरण

  • दिल्ली 2025: भाजपा ने वादा किया – “हर गरीब महिला को 2500 रुपये महीना” और “हर दीवाली-होली पर फ्री गैस सिलेंडर”। चुनाव के बाद सत्ता में आने के बाद भी ये वादे अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हुए। AAP ने इन्हें “जुमला” बताया।
  • राजस्थान 2023: भाजपा ने वादा किया – “हर दीवाली और होली पर फ्री गैस सिलेंडर”। सत्ता में आने के बाद कुछ लाभार्थियों को एक-दो सिलेंडर मिले, लेकिन योजना व्यापक स्तर पर लागू नहीं हुई।

5. गहन विश्लेषण: जनता क्यों महसूस करती है कि “ठगा गया”?

  1. वादों का पैटर्न: हर चुनाव में भावनात्मक, आसान-समझने वाले और बड़े आंकड़ों वाले वादे। चुनाव जीतने के बाद “यह इडियम था”, “कोविड आ गया”, “विपक्ष बाधा डाल रहा है” जैसे बहाने।
  2. डेटा vs वादा:
    • काला धन: 0 रुपये खातों में।
    • रोजगार: 2 करोड़ की जगह 4-5 लाख सालाना।
    • महंगाई: 2014 में 9.4%, 2022 में 7.8% पीक पर।
  3. जनता का भरोसा: Pew Research 2025 सर्वे में 68% लोगों ने कहा कि “महंगाई और बेरोजगारी बढ़ी है”। Youth Survey 2025 (CSDS-Lokniti) में 74% युवाओं ने कहा – “नौकरियां नहीं मिल रही हैं।”
  4. कुछ उपलब्धियां भी: डिजिटल इंडिया, UPI, आधार, PM Awas, Ujjwala, PM-KISAN, इंफ्रास्ट्रक्चर (रेलवे, हाईवे) में तेजी आई। लेकिन ये उपलब्धियां वादों जितनी बड़ी नहीं लगतीं।

अंतिम सवाल: क्या जनता ठगी गई?

  • हां: बड़े-बड़े वादे (15 लाख, 2 करोड़ नौकरियां, अच्छे दिन) अधूरे रह गए। जनता ने विश्वास किया, लेकिन डिलीवरी नहीं हुई।

लेकिन जनता अब “वादे” नहीं, “परिणाम” देखना चाहती है। 2026 के आने वाले राज्य चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव में यही सबसे बड़ा मुद्दा होगा – “मोदी की गारंटी” अब “जनता की गारंटी” कब बनेगी?

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