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NEET-UG 2026 पेपर लीक मामला: CBI के शिकंजे में ‘मास्टरमाइंड’, पुणे की बायोलॉजी लेक्चरर गिरफ्तार, देशभर में मचा हड़कंप

दिल्ली , 15 मई 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi |  वरिष्ठ पत्रकार 

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा मानी जाने वाली NEET-UG 2026 अब केवल एक परीक्षा विवाद नहीं रह गई है, बल्कि यह भारत की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा सुरक्षा और सरकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला राष्ट्रीय संकट बन चुकी है। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी Central Bureau of Investigation ने बड़ा खुलासा करते हुए पुणे की एक बायोलॉजी लेक्चरर को गिरफ्तार किया है, जिसे जांच एजेंसी इस पूरे पेपर लीक नेटवर्क का प्रमुख “मास्टरमाइंड” मान रही है।

NTA से जुड़ी विशेषज्ञ पर लगा गंभीर आरोप

CBI के अनुसार गिरफ्तार की गई महिला का नाम मनीषा गुरुनाथ मांढरे है, जो पुणे में बायोलॉजी पढ़ाती थीं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उन्हें National Testing Agency यानी NTA ने इस वर्ष परीक्षा प्रक्रिया में “एक्सपर्ट” के रूप में नियुक्त किया था।

जांच एजेंसी का कहना है कि मनीषा मांढरे को बॉटनी और जूलॉजी प्रश्नपत्रों तक सीधी पहुंच प्राप्त थी। इसी पहुंच का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए उन्होंने परीक्षा से पहले चुनिंदा छात्रों तक संभावित प्रश्न पहुंचाए और उन्हें विशेष कोचिंग दी।

यह खुलासा ऐसे समय हुआ है जब पूरे देश में NEET परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों और अभिभावकों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और छात्र संगठन NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।

पुणे स्थित घर में चलती थीं ‘सीक्रेट कोचिंग क्लास’

CBI की जांच में सामने आया है कि अप्रैल 2026 के दौरान आरोपी लेक्चरर ने पुणे की मनीषा वाघमारे नामक महिला की मदद से NEET अभ्यर्थियों को इकट्ठा किया।

बताया जा रहा है कि मनीषा वाघमारे पेशे से एक ब्यूटी पार्लर संचालिका हैं, लेकिन जांच एजेंसी का दावा है कि वह इस नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा थीं। उन्हें पहले ही 14 मई को गिरफ्तार किया जा चुका है।

CBI के मुताबिक, आरोपी लेक्चरर अपने घर पर विशेष कोचिंग क्लास चलाती थीं, जहां छात्रों को बॉटनी और जूलॉजी से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न समझाए जाते थे। छात्रों से उन प्रश्नों को नोटबुक में लिखवाया जाता था और किताबों में मार्क भी करवाया जाता था।

सबसे बड़ा खुलासा यह है कि इन क्लासों में बताए गए अधिकांश प्रश्न 3 मई 2026 को आयोजित वास्तविक NEET-UG परीक्षा के प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए।

केवल ‘गेस पेपर’ नहीं, संगठित लीक नेटवर्क का शक

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कोई सामान्य “गेस पेपर” या कोचिंग ट्रिक नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित पेपर लीक नेटवर्क था, जिसमें परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोग भी शामिल हो सकते हैं।

पिछले 24 घंटों में CBI ने देशभर में छह स्थानों पर छापेमारी की है। इस दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज और कई डिजिटल सबूत जब्त किए गए हैं। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से कितने छात्रों को फायदा पहुंचाया गया और इसके पीछे आर्थिक लेन-देन कितना बड़ा था।

केमिस्ट्री पेपर लीक का भी खुलासा

इस मामले में CBI पहले ही पुणे के केमिस्ट्री लेक्चरर पी.वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसी का आरोप है कि वह भी NTA की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े हुए थे और उन्हें केमिस्ट्री प्रश्नपत्रों तक पहुंच थी।

CBI का दावा है कि कुलकर्णी ने भी छात्रों को अपने घर पर विशेष क्लास देकर संभावित प्रश्न और उनके सही उत्तर बताए थे। जांच में सामने आया कि वे प्रश्न वास्तविक परीक्षा पत्र से लगभग पूरी तरह मेल खाते थे।

अब तक नौ आरोपी गिरफ्तार

इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक कुल नौ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें महाराष्ट्र, राजस्थान और हरियाणा के कई आरोपी शामिल हैं।

गिरफ्तार लोगों में:

  • धनंजय लोखंडे (अहिल्यानगर)

  • शुभम खैरनार (नासिक)

  • मंगलीलाल बिवाल

  • विकास बिवाल

  • दिनेश बिवाल (जयपुर)

  • यश यादव (गुरुग्राम)

जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

CBI अब उन छात्रों और अभिभावकों की भी पहचान कर रही है जिन्हें कथित तौर पर पहले से प्रश्न उपलब्ध कराए गए थे।

शिक्षा मंत्रालय की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला

यह मामला 12 मई 2026 को उस समय आधिकारिक रूप से दर्ज किया गया जब शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले उच्च शिक्षा विभाग ने लिखित शिकायत दी।

इसके बाद CBI ने विशेष जांच टीमें गठित कीं, जिनका उद्देश्य पेपर लीक नेटवर्क, लाभार्थियों और परीक्षा माफिया के पूरे तंत्र का पता लगाना है।

जांच एजेंसी “गेस पेपर” के नाम पर बांटे गए उन दस्तावेजों की भी जांच कर रही है, जिनके प्रश्न असली परीक्षा पत्र से अत्यधिक मेल खाते थे।

NTA की विश्वसनीयता पर फिर उठे सवाल

NEET-UG विवाद ने एक बार फिर National Testing Agency की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पिछले कुछ वर्षों में कई राष्ट्रीय परीक्षाओं में पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने, तकनीकी गड़बड़ियों और कथित अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े “एक्सपर्ट” ही प्रश्नपत्र लीक करने लगें, तो यह केवल सुरक्षा चूक नहीं बल्कि संस्थागत विफलता का संकेत है।

केंद्र सरकार ने NTA में किए बड़े प्रशासनिक बदलाव

विवाद के बीच केंद्र सरकार ने शनिवार को NTA में बड़े प्रशासनिक बदलाव भी किए।

सरकार ने दो नए संयुक्त सचिव और दो संयुक्त निदेशकों की नियुक्ति की घोषणा की है। इनमें:

  • अनुजा बापट

  • रुचिता विज

  • आकाश जैन

  • आदित्य राजेंद्र भोजगढिया

जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है।

सरकार का उद्देश्य अब NTA की विश्वसनीयता बहाल करना और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना बताया जा रहा है।

लाखों छात्रों का भविष्य अधर में

इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा असर उन लाखों छात्रों पर पड़ा है जिन्होंने वर्षों की मेहनत के बाद NEET-UG 2026 परीक्षा दी थी। परीक्षा रद्द होने और पेपर लीक के खुलासों ने छात्रों को मानसिक तनाव, असुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता में डाल दिया है।

देशभर में अब यह मांग तेज हो रही है कि:

परीक्षा प्रणाली पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित बनाई जाए,

प्रश्नपत्र निर्माण और वितरण प्रक्रिया की स्वतंत्र निगरानी हो,
और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।

फिलहाल CBI की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।



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