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भारत में EVM की गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोप: राहुल गांधी व विपक्षी नेताओं के सबूतों के साथ गहन शोध-आधारित विश्लेषण (अपडेटेड – अप्रैल 2026)

  नई दिल्ली | 6 अप्रैल 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi |  वरिष्ठ पत्रकार 

भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया EVM पर आधारित है, लेकिन 2024 लोकसभा, राज्य चुनावों और 2025-26 के बाद विपक्ष (कांग्रेस, INDIA ब्लॉक) ने EVM गड़बड़ी और “वोट चोरी” के गंभीर आरोप लगाए हैं। ये आरोप मुख्यतः वोटर लिस्ट मैनिपुलेशन पर हैं, लेकिन अब नया और सबसे विवादास्पद मामला सामने आया है – आंध्र प्रदेश 2024 विधानसभा चुनाव में आधी रात के बाद 17 लाख से अधिक वोट डाले जाने का दावा

यह लेख राहुल गांधी, विपक्षी नेताओं और अब अर्थशास्त्री परकला प्रभाकर (केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति) द्वारा दिए गए सबूतों का गहन, तथ्यात्मक और संतुलित विश्लेषण प्रस्तुत करता है। हम ECI के जवाब, सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और तकनीकी पहलुओं को भी शामिल करेंगे। उद्देश्य: पारदर्शिता पर प्रकाश डालना, बिना किसी राजनीतिक पक्षपात के।

EVM का इतिहास और तकनीकी संरचना (संक्षिप्त)

EVM 1982 से उपयोग में है। VVPAT 2013 से जोड़ा गया। ECI का दावा: मशीन स्टैंडअलोन, हैक-प्रूफ, कोई इंटरनेट कनेक्शन नहीं। polling आधिकारिक रूप से शाम 6 बजे तक सीमित।

विपक्ष का मुख्य दावा: गड़बड़ी वोटर लिस्ट से शुरू होती है, लेकिन अब पोलिंग बंद होने के बाद भी वोट डाले जाने के सबूत मिले हैं।

राहुल गांधी के “एटम बम प्रूफ” और विपक्षी सबूत (अपडेटेड)

राहुल गांधी ने कर्नाटक, हरियाणा, महाराष्ट्र में फर्जी वोटर, डुप्लिकेट एंट्री और बल्क रजिस्ट्रेशन के डेटा-आधारित सबूत पेश किए। अब 2026 में सबसे ताजा मामला जोड़ा गया है:

4. आंध्र प्रदेश 2024 विधानसभा चुनाव: आधी रात वोटिंग सर्ज (Midnight Surge) – सबसे बड़ा “अभी का मामला”

  • सबूत (परकला प्रभाकर द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस, अप्रैल 2026): ECI के आधिकारिक डेटा से विश्लेषण।
    • 11:45 PM से 2:00 AM के बीच 17,19,482 वोट (कुल वोटों का 4.16%) डाले गए।
    • कुल 52 लाख वोट 8 PM से 2 AM के बीच।
    • 3,500 बूथों पर यह सर्ज हुआ।
    • प्रति वोट समय: कुछ बूथों पर मात्र 4-6 सेकंड (कुछ रिपोर्ट में 6 सेकंड)।
    • गणना: 135 मिनट में 17.2 लाख वोट = प्रति बूथ औसतन 491 वोट → 3.6 वोटर प्रति मिनट। VVPAT रीसेट (14 सेकंड), ID चेक, इनकिंग आदि को मिलाकर प्रति वोटर 6 सेकंड से कम समय – शारीरिक रूप से असंभव
  • प्रभाव: ये वोट मुख्यतः NDA (TDP-BJP) के पक्ष में गए। NDA ने 175 में से 164 सीटें जीतीं (93.7% स्ट्राइक रेट)।
  • अन्य बिंदु: शाम 5 PM तक 68.04% टर्नआउट → 8 PM तक 68.12% → 11:45 PM तक 76.50% → अंतिम 80.66%+। रात में अचानक 4.16% बढ़ोतरी।
  • परकला प्रभाकर का बयान: “ECI डेटा से साबित। Form 17C, VVPAT, presiding officer diary और वीडियोग्राफी सार्वजनिक करें।” उन्होंने प्रशांत भूषण और पूर्व CEC S.Y. Quraishi के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक ने इस दावे को “vote chori का सबसे बड़ा प्रमाण” बताया। TMC, AAP आदि ने भी समर्थन दिया।

अन्य पुराने सबूत (संक्षिप्त): कर्नाटक (1 लाख+ फर्जी), हरियाणा (25 लाख फर्जी), महाराष्ट्र (70 लाख नए वोटर) – पहले वाले विश्लेषण में विस्तार से।

ECI, सरकार और विशेषज्ञों का जवाब

ECI ने सभी आरोपों को “baseless और untimely” बताया:

  • आंध्र केस पर: “पोलिंग घंटों के बाद वोटिंग असंभव। टर्नआउट डेटा aggregation (एकत्रीकरण) की देरी से अपडेट होता है, रियल-टाइम वोटिंग नहीं।” कोई उम्मीदवार/पार्टी ने समय पर कानूनी शिकायत नहीं की। 2 साल बाद आरोप लगाना प्रक्रिया के विरुद्ध।
  • सामान्य: Oath-bound declaration मांगे गए, लेकिन विपक्ष ने नहीं दिए। CCTV 45 दिन रखा जाता है। VVPAT-Supreme Court ने 100% वेरिफिकेशन खारिज किया।
  • परकला प्रभाकर के पत्रों पर: ECI ने अब तक कोई लिखित जवाब नहीं दिया।

BJP का स्टैंड: “पुरानी हार स्वीकार न करने की साजिश।”

तकनीकी पक्ष: EVM में रीसेट टाइम ~10-14 सेकंड माना जाता है। विशेषज्ञ कहते हैं – इतनी तेज गति असंभव, लेकिन ECI का कहना है डेटा timestamp polling time का नहीं, reporting का है।

गहन विश्लेषण: क्या ये सबूत पर्याप्त हैं? (अपडेटेड)

सकारात्मक (विपक्ष/परकला पक्ष):

  • ECI के ही डेटा से विश्लेषण → transparent।
  • आंध्र का मामला: रात 2 बजे तक वोटिंग + 6 सेकंड प्रति वोट = सिस्टेमैटिक पैटर्न। NDA को फायदा।
  • कर्नाटक-हरियाणा-महाराष्ट्र के साथ मिलता-जुलता पैटर्न → systematic fraud?

नकारात्मक/संभावित कमियां:

  • कोई स्वतंत्र वेरिफिकेशन नहीं (कोर्ट/थर्ड पार्टी ऑडिट)।
  • ECI: turnout aggregation प्रक्रिया का हिस्सा, polling बंद होने के बाद वोटिंग नहीं।
  • Supreme Court ने पहले tampering pleas को “vague” कहा।
  • समय: आंध्र 2024 के 2 साल बाद उठाया गया मुद्दा।

लोकतंत्र पर प्रभाव: ऐसे आरोप trust deficit बढ़ाते हैं। ECI को booth-level Form 17C, full VVPAT डेटा और लंबे समय तक CCTV retention बढ़ाना चाहिए।

निष्कर्ष:

 सबूतों की तुरंत जांच जरूरी

राहुल गांधी, विपक्ष और अब परकला प्रभाकर ने वोटर लिस्ट मैनिपुलेशन + आंध्र प्रदेश में आधी रात 17 लाख+ वोट (4-6 सेकंड प्रति वोट) के ठोस डेटा पेश किए हैं। ये EVM “गड़बड़ी” का सबसे ताजा और गंभीर उदाहरण हैं। ECI ने इन्हें खारिज किया, लेकिन Form 17C/VVPAT सार्वजनिक करने की मांग बढ़ रही है।

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