असम | 6 अप्रैल 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | वरिष्ठ पत्रकार
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को असम के एक चाय बागान में महिलाओं के साथ बातचीत करते हुए दिखाया गया है। तस्वीर में चारों ओर कैमरे, लाइट्स और फिल्मांकन की भारी व्यवस्था दिखाई देती है, जिससे यह दावा किया जा रहा है कि यह एक सुनियोजित ‘फोटो-ऑप’ था।
लेकिन जब इस वायरल दावे की गहराई से जांच की गई, तो सामने आया एक बिल्कुल अलग और चौंकाने वाला सच।
असम चुनाव के बीच वायरल हुई तस्वीर
दरअसल, Assam में विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल से शुरू होने वाले हैं। इसी सिलसिले में प्रधानमंत्री मोदी हाल ही में राज्य के दौरे पर पहुंचे थे।
1 अप्रैल को उन्होंने Manohari Tea Estate का दौरा किया, जहां उन्होंने चाय बागान की महिला मजदूरों के साथ समय बिताया और खुद चाय की पत्तियां भी तोड़ीं।
इस वास्तविक दौरे का एक वीडियो खुद प्रधानमंत्री ने साझा किया था। इसी संदर्भ में एक तस्वीर सोशल मीडिया पर फैलने लगी, जिसमें दावा किया गया कि यह पूरा कार्यक्रम केवल दिखावे और प्रचार के लिए आयोजित किया गया था।
राजनीतिक आरोप और वायरल दावे
इस तस्वीर को कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने शेयर किया।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस सांसद Kirti Azad ने भी इस तस्वीर को पोस्ट करते हुए दावा किया कि प्रधानमंत्री का यह दौरा स्वाभाविक नहीं था, बल्कि पहले से तैयार किया गया एक महंगा फोटोशूट था।
कुछ अन्य यूज़र्स ने भी इसी तरह के आरोप लगाए और इसे “प्रचार की रणनीति” बताया, खासकर ऐसे समय में जब देश में एलपीजी से जुड़ी समस्याओं को लेकर चर्चा हो रही है।
फैक्ट चेक में क्या निकला?
जब इस तस्वीर की बारीकी से जांच की गई, तो कई ऐसे संकेत मिले जो इसे संदिग्ध बनाते हैं:
1. चेहरे की असंगति
तस्वीर में दिख रहा व्यक्ति प्रधानमंत्री मोदी से पूरी तरह मेल नहीं खाता। चेहरे की बनावट और हाव-भाव में स्पष्ट अंतर नजर आता है।
2. टेक्स्ट और साइनबोर्ड में गड़बड़ी
तस्वीर में मौजूद साइनबोर्ड और क्लैपबोर्ड पर लिखे शब्द अस्पष्ट और बेतरतीब हैं। यह एआई-जनरेटेड इमेज की एक सामान्य पहचान मानी जाती है।
3. पृष्ठभूमि में असामान्य दृश्य
तस्वीर में मौजूद कैमरा क्रू और अन्य लोग धुंधले और कृत्रिम रूप से बनाए गए प्रतीत होते हैं। खासकर बांस के मंच पर खड़े कैमरा ऑपरेटर अस्वाभाविक लगते हैं।
एआई टूल से पुष्टि
तस्वीर को एआई डिटेक्शन टूल से भी जांचा गया, जिसमें यह सामने आया कि इसके कृत्रिम (AI-generated) होने की संभावना 99.9% है।
यह निष्कर्ष इस बात को लगभग पूरी तरह साबित करता है कि यह तस्वीर वास्तविक नहीं, बल्कि तकनीक के जरिए बनाई गई है।
निष्कर्ष: सच बनाम भ्रम
स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि असम के चाय बागान में प्रधानमंत्री मोदी के “भव्य फोटो-ऑप” का दावा करने वाली यह तस्वीर फर्जी है।
यह एक एआई-जनरेटेड इमेज है, जिसे वास्तविक घटना से जोड़कर भ्रामक तरीके से फैलाया गया।
क्यों जरूरी है सतर्क रहना?
आज के डिजिटल दौर में एआई तकनीक के जरिए ऐसी तस्वीरें बनाना बेहद आसान हो गया है, जो पहली नजर में बिल्कुल असली लगती हैं।
ऐसे में हर वायरल कंटेंट पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना बेहद जरूरी है—खासतौर पर तब, जब मामला राजनीति और चुनाव से जुड़ा हो।
