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संजीव भट्ट, कपिल मिश्रा, सुब्रमण्यम स्वामी के बाद अब मधु किश्वर – मोदी पर यौन भ्रष्टाचार के लगातार आरोप

 नई दिल्ली | 29 मार्च 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi |  वरिष्ठ पत्रकार 

एक समय की कट्टर मोदी समर्थक और उनकी किताब मोदी, मुसलमान और मीडिया की लेखिका मधु पूर्णिमा किश्वर ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। मार्च 2026 में एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक लंबे थ्रेड में उन्होंने मोदी को “प्रेडेटर” बताया, “यौन भ्रष्टाचार” और “व्यक्तित्व विकार” का जिक्र किया तथा दावा किया कि संसद सदस्यता और मंत्रिपद महिलाओं को “शारीरिक संबंधों” के बदले दिए गए। ये आरोप सुब्रमण्यम स्वामी के हालिया इंटरव्यू के जवाब में आए, जिसमें स्वामी ने भी 3-4 सांसदों के नाम लेते हुए यही दावा दोहराया। इससे पहले संजीव भट्ट जैसे पूर्व आईपीएस अधिकारी और कपिल मिश्रा के पुराने बयान, साथ ही 2026 में जारी एपस्टीन फाइल्स में मोदी का अप्रत्यक्ष जिक्र – पूरी तस्वीर अब राजनीतिक हलचल मचा रही है।

यह रिपोर्ट तथ्यों, आरोपों, सरकारी प्रतिक्रिया और गहन विश्लेषण पर आधारित है। हम किसी पक्षपात के बिना पूरी कहानी पेश कर रहे हैं।

1. मधु किश्वर कौन हैं और क्यों बदला उनका रुख?

मधु किश्वर एक प्रसिद्ध लेखिका, एकेडमिक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। 2014 में उन्होंने मोदी, मुसलमान और मीडिया: नरेंद्र मोदी के गुजरात से आवाजें नामक किताब लिखी, जिसमें 2002 के गुजरात दंगों में मोदी की भूमिका की कड़ी डिफेंस की गई थी। उन्होंने मोदी को “गेम-चेंजर” और “महान नेता” बताया था। मंशी फाउंडेशन की संस्थापक किश्वर लंबे समय तक मोदी की कट्टर समर्थक रहीं।

लेकिन मार्च 2026 में सब बदल गया। 25 मार्च को एक्स पर पोस्टेड थ्रेड में किश्वर ने लिखा: “मोदी की व्यक्तित्व संबंधी विकारों ने मुझे 2014 से ही उनसे दूरी बनाए रखने पर मजबूर कर दिया। यौन भ्रष्टाचार पर अब ज्यादा ध्यान देना चाहिए।” उन्होंने दावा किया कि “कुछ महिलाएं सांसद या मंत्री बनीं क्योंकि उन्हें मोदी को ‘संतुष्ट’ करना पड़ा।” एक जगह उन्होंने मोदी को “प्रेडेटर” और “सैतानी शासक” तक कहा। किश्वर ने मंसी सोनी (2013 स्नूपगेट कांड) का जिक्र करते हुए कहा कि “मोदी के करीबी ने मुझे कोर्ट में जमा दस्तावेज दिए थे” और यह स्कैंडल सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका था।

किश्वर का दावा है कि वे 2014 से मोदी से दूरी बनाए हुए थीं क्योंकि “ऐसी अफवाहें राजनीतिक और वैचारिक गलियारों में घूम रही थीं”। उन्होंने कहा कि अगर मोदी दूसरे मोर्चों पर अच्छा काम करते तो शायद वे “प्रेडेटरी सेक्शुअल कंडक्ट” को नजरअंदाज कर देतीं, लेकिन अब चुप रहना मुश्किल हो गया।

2. सुब्रमण्यम स्वामी का इंटरव्यू: आग में घी

बीजेपी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में यही दावा दोहराया। स्वामी ने कहा, “मैं 3-4 महिलाओं के नाम ले सकता हूं जो सांसद बनीं क्योंकि उन्हें मोदी के साथ सोना पड़ा। एक तो मंत्री भी बन गई।” किश्वर ने इसी वीडियो को शेयर कर अपना थ्रेड शुरू किया। स्वामी ने पहले भी मोदी पर कई मुद्दों पर सवाल उठाए थे, लेकिन यह यौन भ्रष्टाचार वाला आरोप सबसे तीखा है।

स्वामी और किश्वर दोनों ही मोदी के पुराने समर्थक रहे हैं। स्वामी ने 2014 में मोदी की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। अब दोनों के आरोपों ने बीजेपी में सन्नाटा छा गया है।

3. कपिल मिश्रा और पुराने बयान: गूंजती पुरानी आवाजें

दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने दिल्ली विधानसभा में सालों पहले एक बयान दिया था जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री रहते मोदी पर “लड़कियों को लेकर” कुछ संदिग्ध इशारे किए थे। हाल के विवाद में यह वीडियो फिर वायरल हो रहा है। मिश्रा ने कहा था कि “बीजेपी वाले लड़की को ले जाते थे…” (पूर्ण वाक्य विवादित है)। किश्वर के आरोपों के बाद यह क्लिप सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है और विपक्ष इसे “पुराना सबूत” बता रहा है।

4. संजीव भट्ट: उससे पहले का सबसे पुराना आरोप

2010-2013 में गुजरात के पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट ने मोदी पर 2002 दंगों में “मुस्लिमों को सबक सिखाने” का आरोप लगाया था। भट्ट ने दावा किया कि वे मुख्यमंत्री आवास की बैठक में मौजूद थे जहां ऐसे निर्देश दिए गए। भट्ट को बाद में जेल हुई, लेकिन उनके आरोप आज भी विपक्ष के हथियार बने हुए हैं। किश्वर और स्वामी के नए यौन भ्रष्टाचार वाले दावों को विपक्ष “भट्ट की लाइन का विस्तार” बता रहा है।

5. मंसी सोनी स्नूपगेट कांड: किश्वर ने फिर खोला पुराना घाव

2013 में लीक हुए टेपों में आरोप था कि गुजरात सीएम मोदी ने मंसी सोनी नामक महिला पर अवैध निगरानी करवाई। टेपों में “मधुरी” का जिक्र था। किश्वर ने उस समय मंसी सोनी को “टेररिस्ट” बताया था, लेकिन अब उन्होंने उसी कांड को “मोदी के व्यक्तिगत स्वार्थ” से जोड़कर अपनी दूरी का कारण बताया। मंसी सोनी के पिता ने भी सुरक्षा का जिक्र किया था। यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा था। किश्वर के हालिया थ्रेड में इसकी फाइलें “मोदी के करीबी” द्वारा उन्हें दी गई बताई गई हैं।

6. एपस्टीन फाइल्स 2026: मोदी का अप्रत्यक्ष नाम और विवाद

फरवरी 2026 में अमेरिकी जस्टिस विभाग द्वारा रिलीज एपस्टीन फाइल्स में मोदी का नाम अनिल अंबानी के ईमेल्स के जरिए आया। एपस्टीन ने अंबानी को लिखा कि “मोदी ने मेरी सलाह ली और इजरायल में डांस-सिंग किया” (2017 विजिट के संदर्भ में)। एपस्टीन ने लिखा “The Indian Prime Minister Modi took advice and danced and sang in Israel for the benefit of the US president.” भारतीय सरकार ने इसे “कन्विक्टेड क्रिमिनल की ट्रैशी रूमिनेशन्स” करार दिया और पूरी तरह खारिज कर दिया। MEA प्रवक्ता ने कहा कि सिर्फ नाम का जिक्र कोई गलत काम साबित नहीं करता। लेकिन विपक्ष इसे “ब्लैकमेल की संभावना” से जोड़ रहा है, जो किश्वर के “vulnerable to blackmail” वाले दावे से मेल खाता है।

सरकारी और बीजेपी की प्रतिक्रिया: चुप्पी या रणनीति?

अब तक मोदी, बीजेपी या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। न तो मानहानि का मुकदमा दर्ज हुआ, न किश्वर या स्वामी पर कोई कार्रवाई। एक बीजेपी नेता (मनीष मिश्रा) ने दिल्ली के बराखंबा पुलिस स्टेशन में किश्वर के खिलाफ शिकायत की, लेकिन एफआईआर नहीं हुई। विपक्ष पूछ रहा है – “अगर आरोप झूठे हैं तो डिफेमेशन क्यों नहीं?” बीजेपी चुप्पी को “उपेक्षा” बता रही है।

विश्लेषण: व्यक्तिगत दुश्मनी, सच्चाई या राजनीतिक साजिश?

  • किश्वर का टर्नअराउंड: कई विश्लेषक कहते हैं कि 2014 के बाद किश्वर को “साइडलाइन” किया गया, इसलिए यह “सौर ग्रेप्स” है। दूसरी ओर कुछ इसे “अंदरूनी सच” मानते हैं।
  • समय का महत्व: 2026 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले ये आरोप आए हैं। क्या यह “आरएसएस-बीजेपी के अंदरूनी खेल” है?
  • तथ्य vs अफवाह: कोई ठोस सबूत (नाम, तारीख, गवाह) सार्वजनिक नहीं हुए। लेकिन स्वामी और किश्वर जैसे “इंसाइडर” के दावे वजन रखते हैं।
  • लोकतंत्र पर असर: यौन भ्रष्टाचार के आरोप किसी भी नेता पर लगें तो जांच जरूरी है। लेकिन बिना सबूत के इसे “चरित्र हनन” भी कहा जा सकता है।


निष्कर्ष:-

मधु किश्वर का खुलासा भारतीय राजनीति में नया तूफान है। एक पूर्व समर्थक का “प्रेडेटर” कहना, स्वामी का नाम लेना, पुराने स्नूपगेट और एपस्टीन फाइल्स का मेल – ये सब सवाल उठाते हैं। जनता, मीडिया और न्यायपालिका को सतर्क रहना होगा। सच्चाई तभी सामने आएगी जब या तो ठोस जांच हो या मानहानि का मुकदमा। फिलहाल सन्नाटा बोल रहा है।

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