नई दिल्ली | 23 फरवरी 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi |वरिष्ठ पत्रकार
UGC के मुताबिक, इन फर्जी विश्वविद्यालयों से प्राप्त की गई डिग्रियां सरकारी नौकरी, निजी क्षेत्र में रोजगार या उच्च शिक्षा—किसी भी उद्देश्य के लिए मान्य नहीं होंगी। ऐसे में यहां पढ़ाई कर रहे या कर चुके छात्रों का भविष्य गंभीर खतरे में पड़ सकता है।
📜 UGC एक्ट के तहत क्यों अवैध हैं ये संस्थान?
UGC ने स्पष्ट किया है कि UGC अधिनियम 1956 की धारा 2(एफ) और धारा 3 के अंतर्गत केवल वही विश्वविद्यालय डिग्री प्रदान कर सकते हैं, जिन्हें आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त हो।
इन 32 संस्थानों को न तो केंद्रीय, न राज्य और न ही डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त है, इसके बावजूद ये खुद को “विश्वविद्यालय” बताकर छात्रों को गुमराह कर रहे थे।
👉 नतीजा:
इन संस्थानों से मिली डिग्री कानूनन सिर्फ एक कागज़ का टुकड़ा है।
🏙️ दिल्ली में सबसे ज्यादा फर्जी यूनिवर्सिटी
UGC द्वारा जारी सूची के अनुसार, राजधानी दिल्ली में सबसे अधिक 12 फर्जी विश्वविद्यालय पाए गए हैं।
इसके बाद उत्तर प्रदेश में 4, जबकि आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में 2-2 फर्जी संस्थान सामने आए हैं।
यह आंकड़ा दर्शाता है कि महानगरों और शिक्षा हब के नाम पर छात्रों को सबसे अधिक निशाना बनाया जा रहा है।
📊 राज्यवार फर्जी विश्वविद्यालयों की संख्या
दिल्ली – 12
उत्तर प्रदेश – 4
आंध्र प्रदेश – 2
कर्नाटक – 2
केरल – 2
महाराष्ट्र – 2
पुडुचेरी – 2
पश्चिम बंगाल – 2
अरुणाचल प्रदेश – 1
हरियाणा – 1
झारखंड – 1
राजस्थान – 1
🚨 छात्रों और अभिभावकों के लिए UGC की सख्त चेतावनी
UGC ने कहा है कि उच्च शिक्षा के बढ़ते दायरे का फायदा उठाकर कई निजी संस्थान खुद को विश्वविद्यालय बताकर छात्रों से मोटी फीस वसूल रहे हैं।
आयोग ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि किसी भी कॉलेज या विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने से पहले उसकी मान्यता की जांच अवश्य करें।
🔎 मान्यता जांचने के लिए केवल UGC की आधिकारिक वेबसाइट पर भरोसा करें:
👉 www.ugc.gov.in
📌 फर्जी विश्वविद्यालयों में एडमिशन लेने के क्या हो सकते हैं नुकसान?
डिग्री की कानूनी वैधता शून्य
सरकारी नौकरी में पूरी तरह अमान्य
विदेश या भारत में आगे पढ़ाई का मौका खत्म
समय, पैसा और करियर—तीनों का नुकसान
कानूनी विवादों में फंसने का जोखिम
