23 फरवरी 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi |वरिष्ठ पत्रकार
टॉस, रणनीति और शुरुआती संकेत
दक्षिण अफ्रीका के कप्तान एडेन मार्कराम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी का निर्णय लिया — एक ऐसा फैसला, जो पिच के स्वभाव और नॉकआउट चरण की मनोवैज्ञानिक जटिलताओं को देखते हुए साहसिक कहा जा सकता है। शुरुआती ओवरों में भारतीय तेज़ गेंदबाज़ों ने अनुशासित लाइन–लेंथ के साथ दबाव बनाया। जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह की धारदार गेंदबाज़ी ने प्रोटियाज़ को पाँच ओवरों में 31/3 पर रोक दिया।
इस चरण में भारत स्पष्ट रूप से मैच पर हावी दिख रहा था। बुमराह ने अपनी घातक सटीकता से दो महत्वपूर्ण झटके दिए, जबकि अर्शदीप ने निरंतरता से रनगति को जकड़े रखा।
मध्य ओवरों में वापसी: मिलर–ब्रेविस की साझेदारी
कठिन शुरुआत के बाद दक्षिण अफ्रीका की पारी को डेविड मिलर और डेवाल्ड ब्रेविस ने संभाला। दोनों ने जोखिम और धैर्य के बीच संतुलन साधते हुए स्ट्राइक रोटेशन पर ध्यान केंद्रित किया। भारतीय स्पिनरों के खिलाफ सिंगल्स–डबल्स के जरिए लय बनाते हुए इस जोड़ी ने स्कोरबोर्ड को गति दी।
ब्रेविस ने 13वें ओवर में आक्रामकता का परिचय देते हुए छक्का जड़ा, लेकिन अगली ही गेंद पर बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में कैच दे बैठे। इसके बावजूद, मिलर की संयमित बल्लेबाज़ी ने दक्षिण अफ्रीका को मज़बूत आधार प्रदान किया।
डेथ ओवर्स में विस्फोट: स्टब्स का तूफ़ान
अंतिम ओवरों में ट्रिस्टन स्टब्स ने मैच का रुख निर्णायक रूप से मोड़ दिया। उन्होंने तेज़ी से रन बटोरते हुए भारतीय गेंदबाज़ों की योजनाओं को ध्वस्त कर दिया। अंतिम ओवर में दो छक्कों और एक चौके की बदौलत दक्षिण अफ्रीका ने 20 रन जोड़े और 20 ओवरों में 187/7 का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया।
भारत की ओर से स्लो ओवर–रेट के कारण अंतिम ओवर में केवल चार फील्डर बाहर रखने की पेनल्टी भी महंगी साबित हुई — एक सूक्ष्म, किंतु महत्वपूर्ण कारक।
बुमराह का ऐतिहासिक क्षण
इस मुकाबले के बीच एक उज्ज्वल व्यक्तिगत उपलब्धि भी दर्ज हुई। जसप्रीत बुमराह ने T20 विश्व कप इतिहास में किसी भारतीय गेंदबाज़ द्वारा सर्वाधिक विकेट लेने का रिकॉर्ड अपने नाम किया, पूर्व रिकॉर्डधारी रविचंद्रन अश्विन को पीछे छोड़ते हुए। हालांकि, टीम के समग्र परिणाम के सामने यह उपलब्धि फीकी पड़ गई।
भारतीय पारी: शुरुआत से ही दबाव
187 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की शुरुआत बेहद खराब रही। पहले ही ओवर में इशान किशन का विकेट गिरा, जिससे दबाव और बढ़ गया। दूसरे ओवर में तिलक वर्मा के आउट होने के बाद दक्षिण अफ्रीकी तेज़ गेंदबाज़ मार्को यान्सेन ने मैच पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली।
अभिषेक शर्मा ने कुछ आकर्षक शॉट्स खेले, लेकिन यान्सेन की अतिरिक्त उछाल और गति के सामने टिक नहीं सके।
मध्यक्रम का ढहना: साझेदारियों का अभाव
सूर्यकुमार यादव और वॉशिंगटन सुंदर ने पारी को स्थिर करने का प्रयास किया, किंतु रनगति आवश्यक स्तर तक नहीं पहुंच सकी। सूर्यकुमार का विकेट गिरते ही भारतीय बल्लेबाज़ी क्रम में अस्थिरता स्पष्ट हो गई।
हार्दिक पांड्या, रिंकू सिंह और अर्शदीप सिंह के त्वरित विकेटों ने भारत को गहरे संकट में धकेल दिया। पारी के 15वें ओवर तक भारत 94/8 पर संघर्ष कर रहा था — जीत लगभग असंभव प्रतीत होने लगी।
यान्सेन का निर्णायक प्रहार
मार्को यान्सेन का स्पेल मैच का सबसे बड़ा निर्णायक तत्व साबित हुआ। उन्होंने शिवम दुबे और जसप्रीत बुमराह को लगातार गेंदों पर आउट कर भारत की शेष उम्मीदों पर विराम लगा दिया। उनकी उछाल, गति और सटीक यॉर्कर–लेंथ ने भारतीय बल्लेबाज़ों को खुलकर खेलने का अवसर नहीं दिया।
हार के कारण: तकनीकी और मानसिक पहलू
इस करारी हार के पीछे कई परतें नज़र आती हैं:
1. पावरप्ले में विकेटों का नुकसान
शीर्ष क्रम का जल्दी ढहना लक्ष्य का पीछा करते समय सबसे बड़ा झटका रहा।
2. स्ट्राइक रोटेशन की कमी
मध्य ओवरों में सिंगल्स–डबल्स का अभाव रनगति को जकड़ता रहा।
3. डेथ ओवर्स की रणनीति
गेंदबाज़ी में स्लो ओवर–रेट और अंतिम ओवरों में नियंत्रण का अभाव महंगा पड़ा।
4. दक्षिण अफ्रीका की सामरिक श्रेष्ठता
प्रोटियाज़ ने परिस्थितियों के अनुरूप योजनाओं को सटीकता से लागू किया।
आगे की राह: सुधार और संतुलन की आवश्यकता
सुपर–8 जैसे उच्च दबाव वाले चरण में यह हार भारतीय टीम के लिए चेतावनी संकेत है। बल्लेबाज़ी क्रम में लचीलापन, पारी निर्माण की स्पष्ट रणनीति और दबाव में निर्णय–क्षमता पर पुनर्विचार आवश्यक दिखता है।
क्रिकेट के इस सबसे छोटे प्रारूप में अक्सर “छोटे क्षण” ही परिणाम तय करते हैं — और इस मुकाबले में वे अधिकांशतः दक्षिण अफ्रीका के पक्ष में गए।
