जनपद संभल |12 फरवरी 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi |वरिष्ठ पत्रकार
जनपद संभल में अधिवक्ताओं के बीच गहरा शोक, आक्रोश और असुरक्षा की भावना उस समय स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आई, जब ज़िला बार एसोसिएशन संभल के आह्वान पर बड़ी संख्या में वकील शंकर कॉलेज के चौराहे पर एकत्र हुए और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन रामपुर बार एसोसिएशन के अधिवक्ता फ़ारुख़ अहमद ख़ान की गोली मारकर की गई हत्या के विरोध में आयोजित किया गया, जिसने न केवल विधिक समुदाय बल्कि शहर के आम नागरिकों को भी स्तब्ध कर दिया है।
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने न्याय, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवाल उठाए। वकीलों ने शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावशाली तरीके से नारेबाज़ी कर अपना विरोध दर्ज कराया और स्पष्ट संदेश दिया कि न्याय व्यवस्था से जुड़े पेशेवरों की सुरक्षा पर किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।
घटना की पृष्ठभूमि: अधिवक्ता की हत्या से उपजा रोष
जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता फ़ारुख़ अहमद ख़ान की कथित रूप से 11 फरवरी 2026 को गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना ने अधिवक्ता समाज में गहरी चिंता और रोष पैदा कर दिया। बार एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि कानून और न्याय के प्रतिनिधि पर सीधा प्रहार है।
अधिवक्ताओं ने सवाल उठाया कि यदि न्यायिक प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने वाले वकील ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की स्थिति पर गंभीर चिंतन आवश्यक हो जाता है। इस संदर्भ में शंकर कॉलेज के चौराहे पर हुआ यह प्रदर्शन प्रतीकात्मक होने के साथ-साथ व्यवस्था के प्रति असंतोष की स्पष्ट अभिव्यक्ति भी था।
शंकर कॉलेज के चौराहे पर प्रदर्शन: एकजुटता और असंतोष
शहर के प्रमुख और संवेदनशील स्थलों में गिने जाने वाले शंकर कॉलेज के चौराहे पर अधिवक्ताओं की बड़ी उपस्थिति ने इस विरोध को विशेष महत्व प्रदान किया। प्रदर्शन में शामिल अधिवक्ताओं ने काली पट्टियाँ बांधकर और हाथों में तख्तियाँ लेकर न्याय की मांग को मुखर किया।
वकीलों का कहना था कि इस प्रकार की घटनाएँ न केवल पेशेवर स्वतंत्रता को प्रभावित करती हैं, बल्कि न्यायिक प्रणाली में कार्यरत व्यक्तियों के मनोबल पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। उन्होंने प्रशासन से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि अपराधियों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कार्रवाई की जाए।
बार एसोसिएशन का ज्ञापन: प्रमुख मांगें और तर्क
प्रदर्शन के उपरांत ज़िला बार एसोसिएशन सांभल के प्रतिनिधिमंडल ने सांभल पुलिस प्रशासन को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी गईं:
1. आरोपियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई
अधिवक्ताओं ने मांग की कि अधिवक्ता फ़ारुख़ अहमद ख़ान की हत्या में शामिल सभी आरोपियों की शीघ्र पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाया जाए। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच से ही न्यायिक व्यवस्था में विश्वास कायम रह सकता है।
2. परिजनों के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता
बार एसोसिएशन ने राज्य सरकार से मृतक अधिवक्ता के परिवार को न्यूनतम एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की। अधिवक्ताओं का तर्क है कि यह सहायता केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार के प्रति संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रतीक होगी।
3. अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था
ज्ञापन में अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए ठोस, दीर्घकालिक और प्रभावी सुरक्षा तंत्र लागू करने की मांग की गई। अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े पेशेवरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
अधिवक्ताओं की चिंता: न्यायिक पेशे की गरिमा और सुरक्षा
प्रदर्शन के दौरान कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने यह चिंता व्यक्त की कि हाल के समय में विधिक पेशे से जुड़े लोगों के खिलाफ हिंसक घटनाओं में वृद्धि की खबरें मिल रही हैं, जो लोकतांत्रिक ढांचे के लिए चिंताजनक संकेत हैं।
अधिवक्ताओं का मानना है कि वकील न्याय व्यवस्था का अनिवार्य स्तंभ हैं — वे न केवल कानून की व्याख्या करते हैं, बल्कि नागरिक अधिकारों की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा पर उठते सवाल व्यापक संस्थागत सुधार की आवश्यकता की ओर संकेत करते हैं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया: जांच और कार्रवाई का आश्वासन
ज्ञापन प्राप्त करने के पश्चात स्थानीय पुलिस प्रशासन ने अधिवक्ताओं को मामले की गंभीरता के अनुरूप निष्पक्ष जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, घटना से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है और दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कदम उठाए जाएंगे।
व्यापक सामाजिक और संस्थागत प्रभाव
अधिवक्ता फ़ारुख़ अहमद ख़ान की हत्या की घटना ने शहर में कानून-व्यवस्था, पेशेवर सुरक्षा और न्यायिक गरिमा से जुड़े बहस को फिर से केंद्र में ला दिया है। शंकर कॉलेज के चौराहे पर हुआ अधिवक्ताओं का यह प्रदर्शन केवल एक विरोध कार्यक्रम नहीं, बल्कि न्याय और सुरक्षा के मुद्दे पर सामूहिक चेतावनी और संवेदनशील प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
अब जनमानस और विधिक समुदाय की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई, जांच की प्रगति और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित सुधारों पर टिकी हैं। यह घटना इस तथ्य को रेखांकित करती है कि न्यायिक व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा, लोकतांत्रिक प्रणाली की मजबूती के लिए अनिवार्य है।
प्रदर्शन में ज़िला बार एसोसिएशन सांभल के अनेक पदाधिकारी, वरिष्ठ अधिवक्ता और युवा वकील बड़ी संख्या में मौजूद रहे, जिससे अधिवक्ता समुदाय की एकजुटता स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई। विरोध कार्यक्रम के दौरान बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद शकील अशरफी एडवोकेट, सचिव मोहम्मद सरफराज नवाज एडवोकेट और कोषाध्यक्ष शान एडवोकेट ने अग्रणी भूमिका निभाई। इनके अतिरिक्त शाहीन जमाल एडवोकेट, मतीन रहीस एडवोकेट, आमिर फाजिल एडवोकेट, यावर एडवोकेट, जमाल पाशा एडवोकेट, अब्दुल रहमान एडवोकेट, इकरार अहमद एडवोकेट, अब्दुल जब्बार एडवोकेट, अली आब्दी एडवोकेट, मुख्तार फातिमा एडवोकेट, यामीन एडवोकेट, सलमान एडवोकेट, फहीम एडवोकेट, संदीप एडवोकेट तथा मुन्तज़िम एडवोकेट सहित कई अन्य अधिवक्ताओं ने सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई। उपस्थित अधिवक्ताओं ने सामूहिक रूप से अधिवक्ता फ़ारुख़ अहमद ख़ान रामपुर की हत्या की कड़ी निंदा करते हुए इसे न्यायिक व्यवस्था और विधिक पेशे की गरिमा पर गंभीर आघात बताया। वक्ताओं ने निष्पक्ष, त्वरित और पारदर्शी जांच की आवश्यकता पर बल देते हुए दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई, अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए प्रभावी तंत्र और पीड़ित परिवार के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता की मांग दोहराई। पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासित और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया गया, जबकि अधिवक्ता समुदाय ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि न्याय, सुरक्षा और कानून के शासन से जुड़े मुद्दों पर उनकी आवाज़ निरंतर और दृढ़ बनी रहेगी।

