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नेपाल चुनाव 2026: रैपर से नेता बने बालेन शाह की पार्टी का ऐतिहासिक उभार, पारंपरिक दलों की पकड़ कमजोर

7 मार्च 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार

नेपाल की राजनीति में वर्ष 2026 का आम चुनाव एक बड़े राजनीतिक परिवर्तन का संकेत बनकर उभरा है। दशकों से सत्ता के केंद्र में रहे पारंपरिक राजनीतिक दलों के बीच पहली बार एक नई राजनीतिक शक्ति ने ऐसा उभार दिखाया है जिसने पूरे चुनावी परिदृश्य को बदल दिया है। रैपर से राजनेता बने बालेन्द्र शाह (बालेन शाह) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (Rastriya Swatantra Party – RSP) चुनाव परिणामों में भारी बढ़त के साथ उभरती दिखाई दे रही है।

नेपाल निर्वाचन आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश की प्रतिनिधि सभा की कुल 165 प्रत्यक्ष सीटों में से अधिकांश पर मतगणना जारी है और अब तक के रुझानों में आरएसपी ने 41 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है, जबकि 78 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। यह स्थिति बताती है कि यदि अंतिम परिणाम भी इसी दिशा में रहे तो नेपाल में एक नया राजनीतिक अध्याय शुरू हो सकता है।


जनरेशन-Z आंदोलन के बाद पहली बड़ी परीक्षा

यह चुनाव केवल एक सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं था, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में नेपाल में उभरे युवा आंदोलन और राजनीतिक असंतोष की पहली बड़ी परीक्षा भी माना जा रहा है।

नेपाल में पारंपरिक दलों—जैसे नेपाली कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (सीपीएन-यूएमएल) और अन्य दलों—पर लंबे समय से भ्रष्टाचार, राजनीतिक अस्थिरता और शासन में अक्षमता के आरोप लगते रहे हैं।

इसी पृष्ठभूमि में युवा मतदाताओं के बीच बालेन शाह की छवि एक नए, साफ-सुथरे और गैर-परंपरागत नेता के रूप में उभरी। यही वजह है कि उनकी पार्टी को शहरी क्षेत्रों, खासकर युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं से व्यापक समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है।


संसद की सीटों पर आरएसपी की मजबूत पकड़

ताजा चुनावी आंकड़े नेपाल की राजनीति में बड़े बदलाव की ओर संकेत कर रहे हैं।

अब तक के परिणामों के अनुसार:

  • राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (RSP) – 41 सीटें जीत चुकी, 78 सीटों पर आगे

  • नेपाली कांग्रेस – 4 सीटें जीत, 11 सीटों पर बढ़त

  • सीपीएन-यूएमएल – 2 सीटें जीत, 8 सीटों पर बढ़त

  • अन्य दल और स्वतंत्र उम्मीदवार – सीमित प्रभाव

इस चुनाव में पारंपरिक दलों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा है, जिससे स्पष्ट है कि नेपाल के मतदाताओं का झुकाव बदलाव की ओर बढ़ रहा है।


झापा-5 सीट पर बालेन शाह की बड़ी बढ़त

प्रधानमंत्री पद के संभावित दावेदार माने जा रहे बालेन शाह झापा-5 संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं।

ताजा मतगणना के अनुसार:

  • बालेन शाह (RSP) – 52,096 वोट

  • केपी शर्मा ओली (CPN-UML) – 14,031 वोट

  • लक्ष्मी प्रसाद सांग्रौला (RPP) – 11,333 वोट

इस तरह बालेन शाह अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से 38,000 से अधिक वोटों की भारी बढ़त बनाए हुए हैं।

यदि अंतिम परिणाम भी इसी दिशा में रहते हैं तो यह नेपाल की राजनीति में पारंपरिक नेतृत्व के लिए एक बड़ा झटका माना जाएगा।


काठमांडू की सीटों पर भी आरएसपी का दबदबा

नेपाल की राजधानी काठमांडू में भी आरएसपी के उम्मीदवारों ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया है।

  • रंजु न्यौपाने ने काठमांडू-1 सीट जीत ली

  • राजू नाथ पांडे ने काठमांडू-3 सीट पर लगभग 7,500 वोटों से जीत दर्ज की

  • पुकार बाम ने काठमांडू-4 सीट पर भारी अंतर से विजय हासिल की

  • डोल प्रसाद अर्याल ने काठमांडू-9 सीट पर निर्णायक जीत दर्ज की

राजधानी क्षेत्र में इस तरह का परिणाम यह संकेत देता है कि शहरी मतदाता पारंपरिक दलों से हटकर नई राजनीति की ओर बढ़ रहे हैं।


आनुपातिक मतदान में भी आरएसपी आगे

नेपाल की चुनाव प्रणाली में प्रत्यक्ष सीटों के साथ-साथ प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन (PR) के तहत भी सीटें दी जाती हैं।

अब तक गिने गए मतों के अनुसार:

  • आरएसपी – लगभग 57 प्रतिशत वोट

  • नेपाली कांग्रेस – लगभग 17 प्रतिशत

  • सीपीएन-यूएमएल – लगभग 8 प्रतिशत

  • अन्य दल – 2 प्रतिशत से भी कम

यह आंकड़ा बताता है कि आरएसपी का समर्थन केवल सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि वोट प्रतिशत के स्तर पर भी पार्टी को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है।


राजशाही समर्थक दल में झटका

इसी बीच राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RPP) के वरिष्ठ नेता रवीन्द्र मिश्रा ने काठमांडू-1 सीट से हार के बाद पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी।

उन्होंने कहा कि पार्टी लगातार प्रयासों के बावजूद राजशाही की बहाली और राजनीतिक सुधारों के मुद्दे पर जनता का पर्याप्त समर्थन जुटाने में असफल रही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे भविष्य में एक स्वतंत्र राजनेता के रूप में इन मुद्दों को उठाते रहेंगे।


दुर्गम इलाकों में मतगणना में देरी

नेपाल के कुछ पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में मतगणना प्रक्रिया अभी भी पूरी तरह शुरू नहीं हो पाई है।

  • सांखुवासभा

  • मुगु

  • गोरखा-1

इन क्षेत्रों में बैलेट बॉक्स को मतदान केंद्रों से मतगणना केंद्र तक पहुंचाने में कठिनाइयाँ आईं।

कुछ जगहों पर हेलीकॉप्टर के माध्यम से बैलेट बॉक्स पहुंचाए गए, जबकि मुगु जिले के कुछ इलाकों में बैलेट बॉक्स को लोगों द्वारा पैदल ले जाया गया।


लगभग 60 प्रतिशत मतदान

इस बार नेपाल के संसदीय चुनाव में लगभग 60 प्रतिशत मतदाता मतदान दर्ज किया गया।

  • लगभग 1.89 करोड़ मतदाता मतदान के लिए पात्र थे

  • 275 सांसदों का चुनाव होना है

  • इनमें 165 सीटें प्रत्यक्ष चुनाव से

  • और 110 सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व से भरी जाएंगी

निर्वाचन आयोग के अनुसार अंतिम परिणाम 9 मार्च तक घोषित होने की संभावना है।


नेपाल की राजनीति में नई शुरुआत?

नेपाल के चुनावी रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि देश की राजनीति में एक नई पीढ़ी का उदय हो रहा है।

यदि बालेन शाह की पार्टी इसी तरह आगे बढ़ती रही तो यह केवल सरकार बदलने की घटना नहीं होगी, बल्कि नेपाल की राजनीति में पारंपरिक दलों के प्रभुत्व के अंत और नई राजनीतिक संस्कृति की शुरुआत के रूप में देखा जाएगा।

नेपाल के मतदाता अब यह संदेश देते दिखाई दे रहे हैं कि वे केवल पुराने वादों से नहीं, बल्कि पारदर्शिता, सुशासन और नए नेतृत्व की तलाश में हैं।

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