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ईरान में शक्ति प्रदर्शन: खामेनेई सरकार ने लाखों समर्थकों को सड़कों पर उतारा, नागरिक प्रदर्शनों के जवाब में सख़्त संदेश

 13 जनवरी 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार  

तेहरान से उठी सत्ता की हुंकार, देशभर में सरकार समर्थक रैलियाँ

ईरान में व्यापक सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के कुछ ही दिनों बाद, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाली इस्लामिक रिपब्लिक सरकार ने सोमवार को राजधानी तेहरान समेत देश के कई प्रमुख शहरों में लाखों की संख्या में सरकार समर्थक नागरिकों को सड़कों पर उतारकर अपनी ताक़त का खुला प्रदर्शन किया। इसे न केवल सत्ता का शक्ति-प्रदर्शन माना जा रहा है, बल्कि नागरिक असंतोष और विरोध प्रदर्शनों के प्रतिशोधी जवाब के रूप में भी देखा जा रहा है।

राजधानी तेहरान के ऐतिहासिक एंगेलाब (क्रांति) स्क्वायर में ईरानी झंडे लहराते हुए भारी भीड़ जुटी, जहाँ सरकार द्वारा “दंगे” करार दिए गए हालिया प्रदर्शनों में मारे गए सुरक्षा बलों और नागरिकों के लिए सामूहिक प्रार्थनाएँ की गईं।


अंतिम यात्रा बनी राजनीतिक संदेश

सरकारी टीवी चैनलों पर प्रसारित तस्वीरों में देखा गया कि सुरक्षा बलों के मारे गए जवानों और कुछ नागरिकों के ताबूतों को कंधों पर उठाए शोक जुलूस निकाले गए। इन अंतिम यात्राओं को केवल शोक का क्षण नहीं, बल्कि राजनीतिक एकजुटता और सत्ता-समर्थन का प्रतीकात्मक मंच बना दिया गया।

सरकारी विमर्श में इन मौतों को “विद्रोहियों द्वारा फैलाए गए अराजक दंगों” का परिणाम बताया गया, जबकि विपक्षी और मानवाधिकार समूह इस कथा को सिरे से खारिज करते हैं।


राष्ट्रपति पेज़ेशकियन की अपील, पूरे देश में रैलियाँ

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन की अपील के बाद तेहरान के अलावा मशहद, इस्फ़हान, तब्रीज़ और शिराज़ जैसे प्रमुख शहरों में भी सरकार समर्थक रैलियाँ आयोजित की गईं। इन रैलियों में शामिल लोगों ने “इस्लामिक गणराज्य ज़िंदाबाद” और “क्रांति की रक्षा” जैसे नारे लगाए।

सरकारी तंत्र का यह प्रयास स्पष्ट संकेत देता है कि सत्ता प्रतिष्ठान सड़क की राजनीति में विपक्ष को पूरी तरह चुनौती देने के मूड में है


प्रदर्शन क्यों भड़के? आर्थिक संकट से राजनीतिक विद्रोह तक

ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों की जड़ें गहरे आर्थिक संकट में हैं। ईरानी मुद्रा रियाल के ऐतिहासिक पतन और बेकाबू महँगाई ने आम नागरिक की जीवन-यापन लागत को असहनीय बना दिया।

हालाँकि शुरुआती प्रदर्शन आर्थिक माँगों तक सीमित थे, लेकिन जल्द ही यह आंदोलन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई को सत्ता से हटाने की खुली माँग में बदल गया। कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने “मौत हो खामेनेई को” जैसे नारे लगाए, जो ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में अभूतपूर्व सीधी चुनौती मानी जाती है।


हिंसा, मौतें और विरोधाभासी दावे

विदेशों में स्थित ईरानी मानवाधिकार और एक्टिविस्ट समूहों का दावा है कि सरकारी दमन में सैकड़ों से लेकर हज़ारों तक प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है। उनका आरोप है कि सुरक्षा बलों ने सीधे गोलीबारी की।

वहीं सरकार स्वीकार करती है कि दर्जनों सुरक्षा कर्मी मारे गए, लेकिन नागरिक मौतों की संख्या को कम बताती है और प्रदर्शनों को “विदेश-प्रेरित अराजकता” करार देती है।


ट्रंप की चेतावनी: बातचीत भी, कार्रवाई भी

इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी नेतृत्व ने उनकी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के बाद बातचीत के लिए संपर्क किया है

एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा,

“ईरान के नेताओं ने कॉल किया है… एक बैठक तय की जा रही है। वे बातचीत चाहते हैं। लेकिन हमें बैठक से पहले भी कार्रवाई करनी पड़ सकती है।”

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या 500 के पार बताई जा रही है।


ईरान का दोहरा संदेश: बातचीत के लिए तैयार, युद्ध के लिए भी

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को तेहरान में विदेशी राजदूतों के सम्मेलन में स्पष्ट किया कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी टकराव के लिए पूरी तरह तैयार है

उनका बयान था,

“ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है। हम बातचीत के लिए भी तैयार हैं, बशर्ते वह समान अधिकारों और आपसी सम्मान पर आधारित हो।”

यह बयान ईरान की रणनीतिक दोहरी नीति को दर्शाता है—एक ओर कूटनीति का संकेत, दूसरी ओर शक्ति का प्रदर्शन।


निष्कर्ष:

 सड़क, सत्ता और संघर्ष

ईरान में मौजूदा हालात केवल अस्थायी विरोध नहीं, बल्कि सत्ता, जनता और अंतरराष्ट्रीय दबाव के त्रिकोणीय संघर्ष की ओर इशारा करते हैं। खामेनेई सरकार द्वारा लाखों समर्थकों को सड़कों पर उतारना यह स्पष्ट करता है कि शासन किसी भी चुनौती का जवाब शक्ति, संगठन और राष्ट्रवादी प्रतीकों के सहारे देने को तैयार है।

हालाँकि यह प्रदर्शन सरकार की ताक़त दिखाता है, लेकिन ज़मीनी असंतोष और आर्थिक संकट की गहराई यह संकेत देती है कि ईरान का संकट अभी समाप्त नहीं हुआ है—बल्कि एक नए, और अधिक जटिल चरण में प्रवेश कर चुका है

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