6 जनवरी 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में महासचिव की ओर से राजनीतिक मामलों की अवर महासचिव रोज़मेरी डीकार्लो द्वारा पढ़े गए बयान में कहा गया कि 3 जनवरी को हुआ अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
“यह एक बेहद गंभीर समय है” – संयुक्त राष्ट्र महासचिव
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सुरक्षा परिषद ऐसी घड़ी में बैठक कर रही है, जब एक संप्रभु राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता को बल प्रयोग के ज़रिए चुनौती दी गई है।
उन्होंने याद दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर किसी भी देश के खिलाफ सैन्य बल के प्रयोग या उसकी धमकी को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित करता है।
महासचिव ने कहा,
“अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा तभी कायम रह सकती है जब सभी सदस्य देश संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रत्येक प्रावधान का सम्मान करें।”
काराकास से उत्तरी राज्यों तक फैला सैन्य अभियान
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई वेनेज़ुएला की राजधानी काराकास समेत मिरांडा, अरागुआ और ला गुएरा जैसे उत्तरी राज्यों में फैली रही। हालांकि अभियान के व्यापक स्तर की जानकारी सामने आ चुकी है, लेकिन जान-माल के नुकसान का वास्तविक आंकड़ा अब भी अस्पष्ट बना हुआ है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्रवाई को “बड़े पैमाने का हमला” बताया और यह दावा किया कि वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में ले लिया गया है। इसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अब “संक्रमण काल तक देश का संचालन करेगा”।
वेनेज़ुएला का तीखा विरोध: खुला सैन्य आक्रमण
वेनेज़ुएला सरकार ने इस कार्रवाई को खुला सैन्य आक्रमण, संयुक्त राष्ट्र चार्टर का घोर उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा करार दिया है।
राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को न्यूयॉर्क में हिरासत में रखा गया है, जहाँ उन्हें अमेरिकी अदालत में पेश किया जाना है। अमेरिकी अधिकारियों ने मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस पर नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं।
“वेनेज़ुएला का भविष्य अनिश्चित”
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने चेतावनी दी कि इस घटनाक्रम के बाद वेनेज़ुएला का तत्काल भविष्य बेहद अनिश्चित हो गया है।
उन्होंने कहा कि इससे:
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आंतरिक अस्थिरता और गहराएगी
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पड़ोसी देशों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा
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अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक खतरनाक उदाहरण स्थापित होगा
महासचिव ने स्पष्ट रूप से कहा कि 3 जनवरी की सैन्य कार्रवाई में बल प्रयोग से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया गया।
दशकों से संकट में घिरा वेनेज़ुएला
संयुक्त राष्ट्र ने याद दिलाया कि वेनेज़ुएला पहले से ही:
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राजनीतिक अस्थिरता
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आर्थिक बदहाली
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लोकतांत्रिक संस्थाओं के क्षरण
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मानवाधिकार उल्लंघनों
से जूझ रहा है। इन हालातों के चलते लाखों वेनेज़ुएलावासी देश छोड़ने को मजबूर हुए हैं, जिससे लैटिन अमेरिका में मानवीय संकट और गहरा गया है।
समावेशी और लोकतांत्रिक संवाद की अपील
हालात को “अत्यंत नाज़ुक” बताते हुए भी महासचिव ने उम्मीद जताई कि अभी भी स्थिति को और भड़कने से रोका जा सकता है।
उन्होंने सभी वेनेज़ुएलावासी पक्षों से अपील की कि वे:
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समावेशी संवाद की प्रक्रिया अपनाएँ
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मानवाधिकारों का सम्मान करें
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कानून के शासन को प्राथमिकता दें
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जनता की संप्रभु इच्छा को आधार बनाएँ
“कानून की ताकत, ताकत के कानून से ऊपर हो”
अपने बयान के अंत में महासचिव ने बेहद सशक्त संदेश देते हुए कहा:
“ऐसे जटिल और भ्रमित हालात में सिद्धांतों से समझौता नहीं किया जा सकता। संप्रभुता, राजनीतिक स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अनिवार्य है।”
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि मानवाधिकार, अवैध तस्करी और संसाधन विवादों जैसे मुद्दों के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के पास पर्याप्त साधन मौजूद हैं, और यही वह रास्ता है जिसे अपनाया जाना चाहिए।
