24 जनवरी 2026 | ✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार
अमेरिका–कनाडा संबंधों में बढ़ती तल्ख़ी, चीन बना केंद्रबिंदु
वॉशिंगटन और ओटावा के बीच रिश्तों में एक बार फिर तीखी खटास उभर आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर तीखा हमला बोलते हुए चेतावनी दी है कि यदि वह अमेरिका समर्थित सुरक्षा योजनाओं से दूरी बनाकर चीन के करीब जाता रहा, तो बीजिंग “एक साल के भीतर उसे निगल जाएगा।”
ट्रंप की यह प्रतिक्रिया उस वक्त आई है, जब कनाडा ने ग्रीनलैंड क्षेत्र में प्रस्तावित अमेरिकी ‘गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट’ का समर्थन करने से इनकार कर दिया और इसके बजाय चीन के साथ एक बड़े व्यापार समझौते की घोषणा की।
क्या है ‘गोल्डन डोम’ और क्यों है विवाद?
‘गोल्डन डोम’ दरअसल अमेरिका की प्रस्तावित अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणाली है, जिसे ग्रीनलैंड के ऊपर तैनात करने की योजना थी। अमेरिका का दावा है कि यह प्रणाली न केवल अमेरिकी हितों की रक्षा करेगी, बल्कि कनाडा की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी—खासकर आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ते रूसी और चीनी प्रभाव के मद्देनज़र।
लेकिन कनाडा ने इस परियोजना का खुलकर समर्थन नहीं किया, जिससे ट्रंप भड़क उठे।
ट्रंप का सीधा आरोप: “कनाडा अमेरिका की वजह से जिंदा है”
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा:
“कनाडा ‘गोल्डन डोम’ के खिलाफ है, जबकि यह उसी की रक्षा करता। इसके बजाय वे चीन के साथ व्यापार चुन रहे हैं, जो पहले ही साल में उन्हें खा जाएगा।”
इतना ही नहीं, ट्रंप ने दावोस में हुए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान भी कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पर निशाना साधते हुए कहा कि:
“कनाडा को अमेरिका से मिलने वाली मुफ़्त सुरक्षा और सुविधाओं के लिए आभारी होना चाहिए। कनाडा अमेरिका की वजह से जिंदा है—यह बात याद रखनी चाहिए।”
यह बयान अमेरिका-कनाडा के पारंपरिक सहयोगी रिश्तों में असहजता को और गहरा करता है।
दावोस से शुरू हुआ टकराव
दावोस में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इशारों-इशारों में अमेरिका की नीतियों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि दुनिया एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुकी है जहाँ “नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था कमजोर पड़ रही है” और व्यापार को राजनीतिक दबाव के औज़ार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह टिप्पणी अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर वित्तीय और सामरिक दबाव बनाने की रणनीति की ओर संकेत थी।
कनाडा–चीन व्यापार समझौता: असली चिंगारी
17 जनवरी को कनाडा ने चीन के साथ एक नया व्यापार समझौता घोषित किया, जिसके तहत:
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कनाडाई निर्यातकों के लिए 7 अरब डॉलर से अधिक के नए बाज़ार खुलेंगे
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चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर 100% टैरिफ घटाया जाएगा
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बदले में चीन, कनाडा के कैनेला बीज पर टैक्स 84% से घटाकर लगभग 15% करेगा
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हर साल 49,000 चीनी EVs को कनाडा में अनुमति मिलेगी, जो 5 वर्षों में 70,000 तक पहुँच सकती है
मार्क कार्नी ने साफ कहा कि चीन अब अमेरिका की तुलना में “ज्यादा अनुमानित और स्थिर व्यापारिक साझेदार” बनता जा रहा है।
टैरिफ युद्ध और बदला हुआ वैश्विक संतुलन
कनाडा फिलहाल अमेरिकी टैरिफ दबाव से भी जूझ रहा है:
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कनाडाई उत्पादों पर 35% शुल्क
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आयातित धातुओं पर 50%
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गैर-अमेरिकी कारों पर 25%
वहीं अमेरिका और चीन के बीच भी 100% टैरिफ की धमकियों के बाद, ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात के चलते कुछ उत्पादों पर नवंबर 2026 तक अस्थायी राहत दी गई है।
बड़ा सवाल: क्या कनाडा रणनीतिक रूप से चीन की ओर झुक रहा है?
इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है—
क्या कनाडा अब पारंपरिक अमेरिकी सुरक्षा छतरी से बाहर निकलकर एक ‘स्वतंत्र आर्थिक और रणनीतिक रास्ता’ चुन रहा है?
विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक रक्षा परियोजना का विवाद नहीं, बल्कि विश्व व्यवस्था के बदलते केंद्रों और महाशक्तियों की नई प्रतिस्पर्धा का संकेत है।
