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डावोस में ट्रंप का ‘Board of Peace’: गाज़ा की तबाही पर शांति या नया वैश्विक कंट्रोल मॉडल?

 डावोस | 22 जनवरी 2026 | ✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार  

विश्व आर्थिक मंच (WEF) के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस ‘Board of Peace’ की औपचारिक घोषणा की है, वह केवल एक नई अंतरराष्ट्रीय संस्था नहीं है। यह एक ऐसा राजनीतिक-आर्थिक ढांचा है, जो आने वाले दशकों में युद्ध, शांति, पुनर्निर्माण और संप्रभुता की परिभाषा बदल सकता है।

ट्रंप ने इसे “असंभव को संभव करने वाला मंच” बताया, लेकिन जैसे-जैसे इसके दस्तावेज़, भाषण और योजनाएं सामने आ रही हैं, यह सवाल और गहरा होता जा रहा है —
क्या यह शांति का बोर्ड है, या युद्ध के बाद की ज़मीन का पुनर्विकास प्रोजेक्ट?


🌍 डावोस का मंच और शक्ति का संदेश

डावोस में हुए इस साइनिंग सेरेमनी में 19 देशों के प्रतिनिधि मंच पर मौजूद थे। कैमरों के सामने ट्रंप ने चार्टर पर हस्ताक्षर किए, उसे ऊपर उठाया और मुस्कुराते हुए कहा:

“यह वो काम है जो मैं हमेशा करना चाहता था। दुनिया को अब ऐसे ही समाधान चाहिए।”

यह दृश्य केवल औपचारिक नहीं था — यह अमेरिकी नेतृत्व की वापसी का संकेत था, जिसमें ट्रंप यह दिखाना चाहते हैं कि शांति अब संयुक्त राष्ट्र, बहुपक्षीय संस्थाओं या अंतरराष्ट्रीय सहमति से नहीं, बल्कि डील-मेकिंग मॉडल से आएगी।


💰 एक अरब डॉलर की शांति: सदस्यता या प्रभुत्व?

Board of Peace की सबसे चौंकाने वाली शर्त है —
स्थायी सदस्यता के लिए 1 अरब डॉलर का योगदान।

राजनयिक हलकों में इसे लेकर तीखी चर्चा है:

  • क्या शांति अब भुगतान-आधारित होगी?

  • क्या गरीब, संघर्षग्रस्त देश इस प्रक्रिया से बाहर रह जाएंगे?

  • क्या यह बोर्ड अमीर देशों और निवेशकों का क्लब बन जाएगा?

विशेषज्ञ इसे “Peace as a Commodity” यानी शांति को बाज़ारू वस्तु में बदलने की शुरुआत मान रहे हैं।


🧱 गाज़ा: पुनर्निर्माण या पुनर्संरचना?

इस बोर्ड की मूल परिकल्पना गाज़ा के पुनर्निर्माण से जुड़ी थी। लेकिन डावोस में जो प्रस्तुत हुआ, वह पारंपरिक युद्ध-पश्चात पुनर्निर्माण से बिल्कुल अलग था।

कुशनर का ब्लूप्रिंट:

जैरेड कुशनर ने गाज़ा के लिए जो नक्शा दिखाया, उसमें शामिल था:

  • गाज़ा को अलग-अलग ज़ोन में बांटना

  • “Coastal Tourism Mixed Zone”

  • हाई-राइज़ टावरों वाला “New Gaza”

  • रफ़ाह में 1 लाख नए घर

  • विदेशी निवेश आधारित रोज़गार मॉडल

उन्होंने साफ कहा:

“बिना सुरक्षा के कोई निवेश नहीं करेगा।”

लेकिन इस पूरी योजना में राजनीतिक अधिकार, चुनाव, आत्मनिर्णय जैसे शब्द लगभग नदारद थे।


🏖️ ‘लोकेशन, लोकेशन, लोकेशन’: ट्रंप का बयान और विवाद

ट्रंप का वह बयान, जिसने इस पहल को सबसे ज़्यादा विवादित बना दिया:

“मैं रियल एस्टेट का आदमी हूँ… गाज़ा एक शानदार लोकेशन है।”

आलोचकों का कहना है कि:

  • मानव त्रासदी को रियल एस्टेट अवसर में बदला जा रहा है

  • विस्थापन और पुनर्वास की भाषा में “विकास” थोपा जा रहा है

  • फिलिस्तीनी जनता को भागीदार नहीं, परियोजना का विषय माना जा रहा है


❓ फिलिस्तीनी प्रतिनिधित्व: सबसे बड़ा शून्य

Board of Peace की सबसे गंभीर कमी है — फिलिस्तीनी आवाज़ की अनुपस्थिति

रामल्ला से रिपोर्ट्स बताती हैं:

  • फिलिस्तीनी प्राधिकरण के सभी सुझाए गए नाम इज़राइल ने वीटो कर दिए

  • गाज़ा के लिए बनी “टेक्नोक्रेटिक कमेटी” सीमित अधिकारों वाली है

  • निर्णय प्रक्रिया में वास्तविक पीड़ित समुदाय बाहर है

विश्लेषकों के अनुसार:

“शांति उस कमरे में तय की जा रही है, जहां पीड़ितों के लिए कुर्सी ही नहीं।”


🔥 ज़मीनी सच्चाई: शांति के बीच युद्ध जारी

डावोस में शांति की बातें हो रही थीं, उसी वक्त गाज़ा और वेस्ट बैंक में हालात बदतर होते जा रहे थे।

भयावह आंकड़े:

  • अक्टूबर 2023 से अब तक 71,000+ फिलिस्तीनी मारे गए

  • 293 पत्रकारों की मौत

  • ठंड से नवजात शिशु की मौत

  • सैकड़ों शव अब भी मलबे में दबे

  • UNRWA के दफ्तरों पर बुलडोज़र

  • स्कूल बंद, अस्पतालों पर छापे

यह अंतर बताता है कि नीतिगत शांति और ज़मीनी यथार्थ के बीच गहरी खाई है।


🕌 अल-अक्सा और वेस्ट बैंक: शांति के विपरीत घटनाक्रम

जब Board of Peace की घोषणा हो रही थी:

  • अल-अक्सा मस्जिद परिसर में सेटलर घुसे

  • वेस्ट बैंक में छापे तेज़

  • 18 अवैध बस्तियों को हथियार लाइसेंस

  • हज़ारों फ़िलिस्तीनी गिरफ्तार

यह सब उस समय हो रहा था, जब शांति की भाषा वैश्विक मंच से बोली जा रही थी।


🌐 संयुक्त राष्ट्र की अनदेखी: नई विश्व व्यवस्था?

ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र पर कटाक्ष करते हुए कहा कि:

“मैंने आठ युद्ध खत्म किए, लेकिन UN से बात नहीं की।”

यह बयान संकेत देता है कि:

  • अमेरिका UN-केंद्रित व्यवस्था से हटना चाहता है

  • शक्ति अब संस्थानों से व्यक्तियों और गठबंधनों की ओर जा रही है

  • Board of Peace भविष्य का अमेरिकी-प्रभुत्व वाला शांति मॉडल हो सकता है


🧠 गहन विश्लेषण: शांति का भविष्य किस दिशा में?

विशेषज्ञों के अनुसार Board of Peace तीन स्तरों पर असर डालेगा:

1️⃣ राजनीतिक स्तर

संप्रभुता और आत्मनिर्णय को पीछे धकेलकर स्थिरता को प्राथमिकता

2️⃣ आर्थिक स्तर

पुनर्निर्माण को निवेश-केंद्रित मॉडल में बदलना

3️⃣ नैतिक स्तर

न्याय से पहले विकास की अवधारणा

फिलिस्तीनी समाज का संदेश स्पष्ट है:

“हमें टावर नहीं, अधिकार चाहिए।”


🔚 निष्कर्ष:-

 डील से शांति नहीं आती

डावोस में पेश किया गया ‘Board of Peace’ आकर्षक, महंगा और शक्तिशाली है।
लेकिन इतिहास गवाह है कि शांति बिना न्याय, प्रतिनिधित्व और सम्मान के टिकती नहीं।

अगर यह बोर्ड वास्तव में शांति चाहता है, तो उसे:

फिलिस्तीनियों को निर्णयकर्ता बनाना होगा

पुनर्निर्माण को राजनीतिक समाधान से जोड़ना होगा
शांति को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट से ऊपर रखना होगा

वरना यह पहल भी इतिहास में दर्ज होगी 
एक और शानदार योजना, जो ज़मीन पर इंसाफ़ नहीं ला सकी।

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