नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के अनुसार, जिस लियरजेट विमान में अजित पवार सवार थे, वह मुंबई से उड़ान भरने के बाद बारामती हवाई अड्डे के पास उतरते समय नियंत्रण खो बैठा और हवाई पट्टी से सटे एक खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। बारामती वही क्षेत्र है, जिसे अजित पवार का राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है।
हादसे का भयावह दृश्य और प्रारंभिक जानकारी
हादसे के बाद सामने आई तस्वीरों और वीडियो में विमान का मलबा आग की लपटों में घिरा हुआ दिखाई दिया। काले धुएँ के गुबार और जले हुए ढांचे ने दुर्घटना की भयावहता को उजागर कर दिया। DGCA ने पुष्टि की है कि विमान में सवार कोई भी व्यक्ति जीवित नहीं बचा।
अधिकारियों के अनुसार, इस विमान में अजित पवार के साथ
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उनके दो निजी स्टाफ सदस्य,
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और विमान के दो क्रू मेंबर मौजूद थे।
दुर्घटना के कारणों की फिलहाल पुष्टि नहीं हुई है। तकनीकी खराबी, मौसम संबंधी परिस्थितियाँ या मानवीय त्रुटि—इन सभी पहलुओं की जाँच के लिए एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर दी गई है।
चुनावी दौरे पर थे अजित पवार
जानकारी के मुताबिक, अजित पवार स्थानीय निकाय चुनावों से पहले अपने गृह क्षेत्र बारामती जा रहे थे। यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उनकी यह अंतिम यात्रा बन जाएगी, किसी ने सोचा भी नहीं था।
महाराष्ट्र में शोक की लहर, तीन दिन का राजकीय शोक
इस हादसे की खबर सामने आते ही पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर दौड़ गई। राज्य सरकार ने तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। सरकारी भवनों पर झंडे आधे झुके रहेंगे और सभी सार्वजनिक कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच X पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा कि अजित पवार का निधन “स्तब्ध करने वाला और अत्यंत पीड़ादायक” है। उन्होंने उन्हें “जनता का नेता” बताते हुए कहा कि प्रशासनिक मामलों की उनकी गहरी समझ और गरीब-वंचित वर्ग को सशक्त करने की प्रतिबद्धता हमेशा याद रखी जाएगी।
राजनीतिक जगत से श्रद्धांजलियों का तांता
महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश के राजनीतिक नेताओं ने अजित पवार के निधन पर गहरा दुख जताया।
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शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने इसे महाराष्ट्र के लिए “एक अंधकारमय दिन” करार दिया।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह,
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी,
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और विभिन्न दलों के मुख्यमंत्रियों व वरिष्ठ नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
सभी ने एक स्वर में माना कि अजित पवार के जाने से महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसा खालीपन पैदा हुआ है, जिसे भरना आसान नहीं होगा।
‘दादा’ — एक जननेता की पहचान
अजित पवार को पार्टी कार्यकर्ता और आम लोग प्यार से ‘दादा’ कहकर बुलाते थे। मराठी समाज में यह संबोधन केवल उम्र नहीं, बल्कि भरोसे और अपनत्व का प्रतीक माना जाता है। उनकी सहज भाषा, तीखे लेकिन चुटीले बयान और जनसंपर्क की गहरी पकड़ ने उन्हें आम जनता के बीच बेहद लोकप्रिय बनाया।
राजनीतिक विरासत और उतार-चढ़ाव भरा सफर
66 वर्षीय अजित पवार, दिग्गज नेता शरद पवार के भतीजे थे और उन्होंने 1980 के दशक में राजनीति में कदम रखा। शुरुआती वर्षों में उन्होंने जमीनी राजनीति पर ध्यान दिया—
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मजदूर संगठनों,
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सहकारी बैंकों,
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और ग्रामीण नेटवर्क के जरिए अपनी मजबूत पकड़ बनाई।
1991 में वे पहली बार बारामती विधानसभा सीट से विधायक बने। इसके बाद कई दशकों तक वे लगातार इसी क्षेत्र से चुने जाते रहे, जो उनके जनाधार की मजबूती को दर्शाता है।
सत्ता के केंद्र में एक मजबूत स्तंभ
अजित पवार ने महाराष्ट्र सरकार में कई अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली, जिनमें
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वित्त मंत्रालय,
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कृषि मंत्रालय,
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और उपमुख्यमंत्री का पद शामिल है।
उन्हें एक कुशल प्रशासक और तेज़तर्रार वक्ता के रूप में जाना जाता था। उनकी भाषण शैली कई बार विवादों में भी घिरी, लेकिन यही बेबाकी उनकी पहचान भी बनी।
राजनीतिक विभाजन और नई राह
हाल के वर्षों में महाराष्ट्र की राजनीति गहरे अस्थिर दौर से गुज़री है। इसी दौरान अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार की पार्टी से अलग होकर नया राजनीतिक रास्ता चुना और भाजपा के साथ गठबंधन कर सरकार में शामिल हुए। चुनाव आयोग द्वारा उनके गुट को आधिकारिक रूप से एनसीपी के रूप में मान्यता मिलना, उनकी राजनीतिक चतुराई का उदाहरण माना गया।
विवाद और ‘सिंचाई घोटाले’ की छाया
उनके करियर पर कुछ विवादों की छाया भी रही। वर्ष 2009 में सिंचाई मंत्री रहते हुए उन पर परियोजनाओं में अनियमितताओं के आरोप लगे। हालांकि उन्होंने हमेशा इन आरोपों से इनकार किया और उनके खिलाफ कभी औपचारिक आरोप तय नहीं हुए। इसके बावजूद यह मुद्दा वर्षों तक उनके राजनीतिक जीवन के साथ जुड़ा रहा।
एक युग का अंत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजित पवार का अचानक यूँ चला जाना महाराष्ट्र की राजनीति में एक पूरे युग के अंत जैसा है। सत्ता संतुलन, गठबंधन की राजनीति और आगामी चुनावों पर इसका गहरा असर पड़ना तय माना जा रहा है।
