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बजट 2026 और आयकर की दिशा: क्या मध्यम वर्ग को मिलेगा एक और बड़ा कर-राहत पैकेज? टैक्स स्लैब, स्टैंडर्ड डिडक्शन और TDS पर टिकी देश की निगाहें

 नई दिल्ली। 27 जनवरी 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | वरिष्ठ पत्रकार   

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को संसद में केंद्रीय बजट 2026 प्रस्तुत करने जा रही हैं। यह न केवल उनका लगातार नौवां बजट होगा, बल्कि आयकर सुधारों के लिहाज़ से भी यह बजट अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीते वर्षों में जिस तरह सरकार ने आयकर व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और करदाता-अनुकूल बनाने की कोशिश की है, उसके बाद अब देश का मध्यम वर्ग, वेतनभोगी कर्मचारी, वरिष्ठ नागरिक और निवेशक वर्ग यह जानने को उत्सुक है कि क्या इस बार भी करदाताओं को कोई ठोस राहत मिलेगी।


बजट 2025 की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: क्यों बढ़ी हैं उम्मीदें

बजट 2025 को आयकर इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट के रूप में देखा जाता है। सरकार ने नए टैक्स रिजीम को आक्रामक रूप से आगे बढ़ाते हुए—

  • ₹12 लाख तक की आय को कर-मुक्त किया

  • वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन दिया

  • इस तरह प्रभावी कर-मुक्त आय ₹12.75 लाख तक पहुँची

  • साथ ही नया आयकर अधिनियम, 2025 लाने की घोषणा की गई

इन फैसलों का सीधा लाभ करोड़ों मध्यमवर्गीय परिवारों को मिला, जिससे उपभोग बढ़ा और अर्थव्यवस्था को मांग-आधारित सहारा मिला।


बजट 2026: क्या सरकार दोबारा टैक्स स्लैब में छेड़छाड़ करेगी?

अधिकांश कर विशेषज्ञों और नीति विश्लेषकों का मानना है कि—

  • आयकर स्लैब में बड़े बदलाव की संभावना कम है

  • सरकार पहले ही काफी राहत दे चुकी है

  • राजकोषीय घाटा और टैक्स कलेक्शन का संतुलन बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता रहेगा

हालाँकि, यह भी माना जा रहा है कि सरकार सूक्ष्म लेकिन प्रभावशाली सुधारों के ज़रिये करदाताओं को राहत दे सकती है।


वेतनभोगी वर्ग की सबसे बड़ी उम्मीद: स्टैंडर्ड डिडक्शन

वर्तमान में नए टैक्स रिजीम के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹75,000 है, जिसे पहले ₹50,000 से बढ़ाया गया था।
महँगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और शहरी जीवन-यापन की बढ़ती लागत को देखते हुए—

  • स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹1 लाख तक बढ़ाने की माँग तेज़ हो रही है

  • इससे सीधे तौर पर नेट टेक-होम सैलरी बढ़ेगी

  • मध्यम वर्ग की खपत क्षमता में इज़ाफा होगा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत सरकार के लिए कम लागत, अधिक प्रभाव वाला कदम हो सकता है।


TDS सुधार: अनुपालन से राहत की उम्मीद

टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स (TDS) को लेकर छोटे करदाताओं और वरिष्ठ नागरिकों को अक्सर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

बजट 2025 में—

  • किराये पर TDS की सीमा ₹2.4 लाख से बढ़ाकर ₹6 लाख की गई

  • वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज आय पर TDS सीमा ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख की गई

अब बजट 2026 में उम्मीद है कि—

  • TDS संरचना को और सरल बनाया जाएगा

  • ब्याज आय और एफडी निवेशकों को अतिरिक्त राहत मिल सकती है


पुराना बनाम नया टैक्स रिजीम: सरकार का स्पष्ट झुकाव

सरकार पिछले कुछ वर्षों से लगातार नए टैक्स रिजीम को बढ़ावा दे रही है—

  • 2023 में नए टैक्स रिजीम को डिफ़ॉल्ट विकल्प बनाया गया

  • कम स्लैब और कम जटिलता को इसकी पहचान बनाया गया

हालाँकि पुराना टैक्स रिजीम अभी भी उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो—

  • होम लोन

  • बीमा

  • NPS

  • ELSS
    जैसे निवेशों के ज़रिये टैक्स प्लानिंग करते हैं।

बजट 2026 में सरकार नए टैक्स रिजीम को और आकर्षक और संतुलित बना सकती है।


फिक्स्ड डिपॉजिट, वरिष्ठ नागरिक और निवेशक वर्ग की अपेक्षाएँ

एफडी निवेशकों की लंबे समय से यह माँग रही है कि—

  • ब्याज आय पर कर-दबाव कम किया जाए

  • TDS सीमा और बढ़ाई जाए

  • डिपॉजिट इंश्योरेंस (DICGC) कवर, जो अभी ₹5 लाख है, उसे बढ़ाया जाए

इससे बैंकिंग सिस्टम में भरोसा बढ़ेगा और सुरक्षित निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।


नया आयकर अधिनियम 2025: बजट 2026 की बड़ी परीक्षा

1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला नया आयकर कानून—

  • भाषा को सरल बनाएगा

  • पुराने और अप्रासंगिक प्रावधान हटाएगा

  • टैक्स विवादों को कम करने की दिशा में काम करेगा

बजट 2026 में सरकार इसके स्मूद ट्रांज़िशन, नियमों और प्रक्रियाओं को और स्पष्ट कर सकती है।


राजस्व, महँगाई और चुनावी संतुलन

सरकार के सामने तीन बड़ी चुनौतियाँ हैं—

  • करदाताओं को राहत

  • राजकोषीय अनुशासन

  • दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता

इसी संतुलन के आधार पर बजट 2026 में आयकर को लेकर फैसले लिए जाने की संभावना है।


निष्कर्ष: उम्मीदें ज़्यादा, लेकिन यथार्थवादी

बजट 2026 से करदाताओं को शायद कोई “बड़ा धमाका” न मिले, लेकिन—

स्टैंडर्ड डिडक्शन

TDS सरलीकरण

ब्याज आय पर राहत

जैसे कदम मध्यम वर्ग के लिए व्यावहारिक और असरदार साबित हो सकते हैं।




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