नई दिल्ली/तेहरान/वॉशिंगटन | 27 जनवरी 2026 | ✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार
USS अब्राहम लिंकन की तैनाती, ट्रंप की ‘यूएस आर्माडा’ चेतावनी और मध्य-पूर्व में युद्ध की आशंका
मध्य-पूर्व एक बार फिर इतिहास के सबसे खतरनाक मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब केवल कूटनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे सैन्य तैनाती, युद्धाभ्यास, हवाई क्षेत्र प्रतिबंध और क्षेत्रीय शक्तियों की खुली चेतावनियों में बदल चुका है। अमेरिकी नौसेना का शक्तिशाली विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन का मध्य-पूर्वी क्षेत्र में सक्रिय रहना और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान कि “ईरान के पास अब अमेरिका की एक बड़ी आर्माडा मौजूद है”, हालात की गंभीरता को रेखांकित करता है।
USS अब्राहम लिंकन की मौजूदगी: सिर्फ तैनाती नहीं, रणनीतिक संदेश
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के “एरिया ऑफ रिस्पॉन्सिबिलिटी” में USS अब्राहम लिंकन की मौजूदगी को सामान्य सैन्य गतिविधि मानना भूल होगी। यह तैनाती ईरान को एक स्पष्ट संदेश देती है कि वॉशिंगटन किसी भी संभावित टकराव के लिए तैयार है। सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, यह कैरियर स्ट्राइक ग्रुप न केवल हवाई हमलों की क्षमता रखता है, बल्कि यह मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने का भी एक बड़ा साधन है।
ईरान ने इस तैनाती को सीधे-सीधे उकसावे की कार्रवाई बताया है और चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी जहाज़ों ने उसकी क्षेत्रीय सीमाओं का उल्लंघन किया, तो जवाब “अभूतपूर्व” होगा।
ट्रंप की आक्रामक भाषा: कूटनीति से टकराव की ओर
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो अपने दूसरे कार्यकाल में पहले से कहीं अधिक आक्रामक तेवर दिखा रहे हैं, ने खुले तौर पर कहा है कि अमेरिका ने ईरान के आसपास “एक बड़ी नौसैनिक शक्ति” तैनात कर दी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन, आर्थिक संकट और इंटरनेट बंदी ने पहले ही देश को आंतरिक दबाव में डाल रखा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह रणनीति ईरान पर बहुस्तरीय दबाव बनाने की है—सैन्य, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक।
ईरान की चेतावनी: हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा फ्लैशपॉइंट
ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि उस पर हमला हुआ तो वह हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने जैसे विकल्पों से भी पीछे नहीं हटेगा। यह वही समुद्री मार्ग है जहाँ से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति गुजरती है।
ईरान द्वारा हॉर्मुज़ के पास लाइव-फायर सैन्य अभ्यास की घोषणा और एयरस्पेस को खतरनाक क्षेत्र घोषित करना वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है।
इज़राइल का रुख: नेतन्याहू की खुली धमकी
इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान ने इज़राइल पर हमला किया, तो जवाब ऐसा होगा “जो ईरान ने पहले कभी नहीं देखा होगा।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब इज़राइल पहले ही जून 2025 में ईरानी ठिकानों पर घातक हमले कर चुका है और व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका लगातार बढ़ रही है।
क्षेत्रीय देशों की स्थिति: सऊदी अरब ने खींची लाल रेखा
सऊदी अरब ने स्पष्ट कर दिया है कि वह न तो अपने हवाई क्षेत्र और न ही अपनी ज़मीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई के लिए होने देगा। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेशेश्कियन के बीच बातचीत इस बात का संकेत है कि खाड़ी देश फिलहाल युद्ध नहीं, बल्कि स्थिरता चाहते हैं।
IRGC और यूरोप की दुविधा
यूरोपीय संघ के भीतर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकी संगठन घोषित करने पर मतभेद उभर कर सामने आए हैं। फ्रांस ने इस कदम का विरोध किया है, यह कहते हुए कि संवाद के रास्ते बंद करना हालात को और बिगाड़ सकता है।
IRGC न केवल ईरान की सैन्य रीढ़ है, बल्कि उसकी राजनीति और अर्थव्यवस्था में भी गहराई से जुड़ी हुई है। इसे आतंकी संगठन घोषित करना सीधे-सीधे युद्ध जैसे हालात पैदा कर सकता है।
ईरान की अर्थव्यवस्था: युद्ध के साये में टूटता जीवन
अमेरिकी-ईरानी तनाव का सबसे गहरा असर आम ईरानी नागरिकों पर पड़ रहा है। ईरानी मुद्रा रियाल का डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट पर पहुंचना, महंगाई का विस्फोट और इंटरनेट बंदी ने लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को बेहद कठिन बना दिया है।
तेहरान के बाज़ारों से आ रही रिपोर्ट्स बताती हैं कि खाने-पीने की चीज़ों के दाम कई गुना बढ़ चुके हैं और आम लोगों की क्रय-शक्ति लगभग खत्म हो चुकी है।
संयुक्त राष्ट्र की चिंता: संयम की अपील
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने अमेरिका और ईरान दोनों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है। उनका कहना है कि इस तरह की सैन्य तैनाती और आक्रामक बयानबाज़ी पूरे क्षेत्र को एक ऐसे युद्ध में झोंक सकती है, जिसके परिणाम वैश्विक स्तर पर विनाशकारी होंगे।
विशेषज्ञों की राय: क्या ट्रंप को ‘निर्णायक जीत’ मिल पाएगी?
यूरोपीय काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस की विशेषज्ञ एली गेरनमायेह के अनुसार, यदि अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो नुकसान सबसे ज़्यादा ईरान को होगा, लेकिन ट्रंप को वह “निर्णायक जीत” नहीं मिलेगी जिसकी उन्हें उम्मीद है।
पिछले दो दशकों का अनुभव बताता है कि ऐसे हस्तक्षेप अस्थिरता, आर्थिक तबाही और लंबे संघर्ष को जन्म देते हैं।
