Type Here to Get Search Results !

ADS5

ADS2

निर्वासित ‘शहज़ादा’ जो ईरानियों से शहरों पर कब्ज़ा करने की अपील कर रहा है

12 जनवरी 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार  

ईरान की राजनीति में दशकों बाद एक ऐसा नाम फिर सुर्खियों में है, जो कभी इतिहास की किताबों तक सीमित माना जाता था। रज़ा पहलवी—ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के पुत्र और निर्वासित क्राउन प्रिंस—अब सिर्फ़ लोकतांत्रिक सुधारों की बात नहीं कर रहे, बल्कि खुले तौर पर शहरों पर कब्ज़ा करने और सत्ता को चुनौती देने का आह्वान कर रहे हैं।

65 वर्षीय रज़ा पहलवी की यह बदली हुई रणनीति न केवल ईरानी सत्ता प्रतिष्ठान को झकझोर रही है, बल्कि विपक्ष के भीतर भी तीखी बहस और विभाजन को जन्म दे रही है।


नरम विपक्ष से आक्रामक विद्रोह तक का सफ़र

पिछले चार दशकों से रज़ा पहलवी को ईरान के निर्वासित विपक्ष का सभ्य और संयमित चेहरा माना जाता रहा है। अमेरिका में रहकर उन्होंने बार-बार अहिंसक आंदोलन, जनमत संग्रह और धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र की बात की।

लेकिन हालिया बयानबाज़ी ने उनकी छवि को पूरी तरह बदल दिया है।

अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर जारी संदेश में उन्होंने कहा:

“हमारा उद्देश्य अब सिर्फ़ सड़कों पर उतरना नहीं है। हमारा लक्ष्य शहरों के केंद्रों पर कब्ज़ा करना और उन्हें अपने नियंत्रण में रखना है।”

यह बयान सीधे-सीधे ईरान की मौजूदा सत्ता के लिए खुली चुनौती माना जा रहा है।


जन्म से निर्वासन तक: रज़ा पहलवी की पृष्ठभूमि

रज़ा पहलवी का जन्म 31 अक्टूबर 1960 को तेहरान में हुआ था—ऐसे दौर में जब ईरान शीत युद्ध, तेल राजनीति और पश्चिमी हस्तक्षेपों के केंद्र में था। वे महज़ सात साल के थे जब उन्हें औपचारिक रूप से क्राउन प्रिंस घोषित किया गया।

लेकिन 1979 की इस्लामिक क्रांति ने इतिहास की धारा ही बदल दी।

17 वर्ष की उम्र में वे अमेरिका गए, जहाँ टेक्सास के रीस एयर फ़ोर्स बेस में फाइटर पायलट की ट्रेनिंग ली। उसी दौरान ईरान में शाह की सत्ता गिर चुकी थी और इस्लामिक रिपब्लिक की स्थापना हो चुकी थी—जिसने उनके देश लौटने के रास्ते हमेशा के लिए बंद कर दिए।

बाद में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ़ सदर्न कैलिफ़ोर्निया से राजनीतिक विज्ञान में डिग्री हासिल की। ईरान-इराक युद्ध के दौरान उन्होंने ईरानी वायुसेना में सेवा देने की पेशकश भी की, लेकिन तेहरान ने इसे ठुकरा दिया।

तब से वे अमेरिका में निर्वासन का जीवन जी रहे हैं।


‘वापसी की तैयारी’ और राष्ट्रव्यापी हड़ताल की अपील

हाल के दिनों में रज़ा पहलवी की भाषा सिर्फ़ सैद्धांतिक नहीं रही।

उन्होंने परिवहन, तेल और गैस जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के मज़दूरों से देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया, ताकि “राज्य की आर्थिक नसों को काटा जा सके।”

इसके साथ ही उन्होंने सुरक्षा बलों और तथाकथित “इम्मॉर्टल गार्ड” से विद्रोह कर जनता के साथ खड़े होने की अपील की।

उनका दावा है:

“मैं स्वयं भी मातृभूमि लौटने की तैयारी कर रहा हूँ, ताकि राष्ट्रीय क्रांति की जीत के क्षण में मैं आपके साथ खड़ा रह सकूँ।”

उन्होंने समर्थकों से 1979 से पहले का ‘शेर और सूरज’ वाला झंडा फहराने और सार्वजनिक स्थलों पर कब्ज़ा करने का भी आग्रह किया।


तेहरान का पलटवार: ‘आतंकवाद’ का आरोप

ईरानी सत्ता प्रतिष्ठान ने इस अपील को बेहद गंभीर खतरे के रूप में लिया है।

सरकारी मीडिया और कट्टरपंथी अख़बारों ने इसे “आंतरिक सशस्त्र युद्ध” और “आतंकवादी कार्रवाई” करार दिया। दावा किया गया कि पुलिस और बसीज बलों पर संगठित हमले हुए हैं और कई सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं।

तेहरान ने इसके पीछे अमेरिका और इज़राइल की साज़िश का आरोप लगाया है। ईरानी मीडिया का कहना है कि यह रणनीति मई में हुए ईरान-इज़राइल संघर्ष के बाद तैयार किया गया एक “प्लान-बी” है।


विपक्ष के भीतर भी विरोध: ‘विपक्ष का विपक्ष’?

हालाँकि सड़कों पर रज़ा पहलवी के समर्थक दिख रहे हैं, लेकिन निर्वासित ईरानी विपक्ष का एक बड़ा वर्ग उनसे असहमत है।

ईरान मामलों के विशेषज्ञ अलीरेज़ा नादेर का मानना है कि रज़ा पहलवी की राजनीति अब विभाजनकारी होती जा रही है। उन पर आरोप है कि उनके समर्थक अन्य असंतुष्ट नेताओं—जैसे नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी—को “वामपंथी” या “आतंकवादी” कहकर बदनाम कर रहे हैं।

नादेर के अनुसार, यह भी आशंका है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाला समर्थन आंशिक रूप से साइबर-अभियानों का नतीजा हो सकता है, जिनका उद्देश्य विपक्ष के भीतर भ्रम और टकराव पैदा करना है।


आख़िरी दांव या ऐतिहासिक वापसी?

आज की स्थिति यह है कि ईरान की सड़कों पर आग है, सत्ता सशंकित है और विपक्ष बँटा हुआ है। अमेरिका आधिकारिक तौर पर कह रहा है कि “ईरान के भविष्य का फैसला ईरानी जनता को करना है।”

ऐसे माहौल में रज़ा पहलवी शायद अपने जीवन का सबसे बड़ा और जोखिम भरा दांव खेल रहे हैं—उस सिंहासन के लिए, जिसे उन्होंने 47 साल पहले खो दिया था।

यह दांव ईरान को लोकतंत्र की ओर ले जाएगा या एक और रक्तरंजित टकराव की ओर—इसका फैसला अब इतिहास के अगले अध्याय में लिखा जाएगा।

ये भी पढ़े 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

ADS3

ADS4