11 जनवरी 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार
ईरान अभूतपूर्व आंतरिक संकट के दौर से गुजर रहा है
ईरान इस समय पिछले कई वर्षों के सबसे गहरे राजनीतिक और आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। देशभर में दो सप्ताह से जारी हिंसक प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने पहली बार सार्वजनिक रूप से राष्ट्र को संबोधित करते हुए आर्थिक ढांचे में व्यापक सुधार का वादा किया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार “जनता की आवाज़ सुनने के लिए पूरी तरह तैयार है”, लेकिन साथ ही उन्होंने अमेरिका और इज़राइल पर अशांति फैलाने के गंभीर आरोप लगाए।
राज्य टेलीविजन पर प्रसारित एक साक्षात्कार में पेज़ेश्कियन ने संतुलित और सुलहकारी भाषा अपनाने की कोशिश की, हालांकि उनका लहजा इस बात का संकेत भी देता रहा कि ईरानी सत्ता प्रतिष्ठान इस आंदोलन को सिर्फ़ आर्थिक असंतोष नहीं, बल्कि एक सुरक्षा चुनौती के रूप में देख रहा है।
आर्थिक बदहाली से भड़का जनाक्रोश
इस संकट की जड़ें ईरान की डगमगाती अर्थव्यवस्था में हैं। दिसंबर के अंत में ईरानी मुद्रा में अचानक आई भारी गिरावट ने आम जनता की क्रय-शक्ति को लगभग तोड़ दिया।
तेज़ महंगाई, बढ़ती बेरोज़गारी, ज़रूरी वस्तुओं की कीमतों में उछाल और वर्षों से जारी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने जनजीवन को असहनीय बना दिया।
शुरुआत में ये प्रदर्शन महज़ जीविका और महंगाई तक सीमित थे, लेकिन समय के साथ यह आंदोलन राजनीतिक रंग लेने लगा और सरकार-विरोधी नारों में तब्दील हो गया।
पेज़ेश्कियन का संदेश: संवाद भी, सख़्ती भी
राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने कहा कि सरकार का कर्तव्य है जनता की समस्याओं का समाधान करना, लेकिन उन्होंने “दंगाइयों” और “आतंकवादियों” को किसी भी सूरत में बख़्शने से इनकार किया।
उनके शब्दों में,
सरकार प्रदर्शनकारियों की वास्तविक चिंताओं को सुन रही है, लेकिन वह ऐसे तत्वों को अनुमति नहीं दे सकती जो समाज को अराजकता की ओर धकेलना चाहते हैं।
उन्होंने परिवारों से अपील की कि वे अपने युवाओं को हिंसक गतिविधियों से दूर रखें और यह दावा किया कि देश में “प्रशिक्षित विदेशी आतंकवादी” दाख़िल किए गए हैं।
अमेरिका और इज़राइल पर सीधे आरोप
पेज़ेश्कियन ने बिना किसी संकोच के अमेरिका और इज़राइल को इस अशांति के लिए ज़िम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि ये देश ईरान में अराजकता फैलाने और राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिए प्रदर्शनों को दिशा दे रहे हैं।
ईरानी नेतृत्व लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि पश्चिमी ताक़तें आंतरिक असंतोष को भड़काकर शासन परिवर्तन की रणनीति अपनाती हैं। इस बार भी यही नैरेटिव दोहराया गया।
2022 के आंदोलन की यादें फिर ताज़ा
वर्तमान प्रदर्शन 2022-23 के उस आंदोलन की याद दिलाते हैं, जो महसा अमीनी की हिरासत में मौत के बाद भड़का था। वह आंदोलन ईरान के लिए एक गहरा सामाजिक और राजनीतिक झटका साबित हुआ था।
हालिया आंदोलन को भी उसी कड़ी में देखा जा रहा है, लेकिन इस बार आर्थिक संकट इसकी मुख्य प्रेरक शक्ति है।
मौतों के आंकड़े और सूचना युद्ध
सरकारी मीडिया के अनुसार, प्रदर्शनों के दौरान अब तक 109 सुरक्षा कर्मियों की मौत हो चुकी है।
वहीं विपक्षी कार्यकर्ता दावा कर रहे हैं कि मरने वालों में दर्जनों आम प्रदर्शनकारी भी शामिल हैं और वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक है।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि संभव नहीं हो पाई है, क्योंकि देश में 60 घंटे से अधिक समय से इंटरनेट बंद है, जिससे सूचनाओं का प्रवाह लगभग ठप हो गया है।
संसद और सैन्य नेतृत्व का कड़ा रुख
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबाफ़ ने संसद में साफ़ शब्दों में कहा कि सरकार शांतिपूर्ण आर्थिक विरोध को मान्यता देती है, लेकिन सशस्त्र और हिंसक तत्वों के खिलाफ़ सख़्त कार्रवाई करेगी।
पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर ग़ालिबाफ़ ने अमेरिका को भी खुली चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि ईरान पर हमला हुआ, तो इज़राइल और क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने वैध लक्ष्य होंगे।
ट्रंप की धमकी और बढ़ता तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को “मदद” की पेशकश करते हुए संकेत दिया कि यदि प्रदर्शनकारियों की हत्या हुई तो सैन्य कार्रवाई से इंकार नहीं किया जाएगा। हालांकि उन्होंने ज़मीनी सेना भेजने की संभावना को खारिज किया।
ट्रंप की इस टिप्पणी को तेहरान ने सीधा उकसावा माना है और इससे हालात और ज़्यादा विस्फोटक हो गए हैं।
क्या यह संकट थमेगा या और गहराएगा
राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन के सुधारों के वादे क्या जनता का भरोसा जीत पाएंगे, या यह संकट 2022 से भी बड़ा रूप लेगा — इसका जवाब आने वाले दिनों में ही मिलेगा।
