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Calcutta High Court adjourns ED plea: ईडी-ममता बनर्जी विवाद I-PAC रेड के बाद सुनवाई स्थगित, राजनीति गरमाई

 10 जनवरी 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi |वरिष्ठ पत्रकार     

कलकत्ता हाई कोर्ट में शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस याचिका की सुनवाई अस्थायी रूप से रोक दी गई, जिसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर I-PAC पर छापे के दौरान जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया गया था। सुनवाई हंगामे के कारण 14 जनवरी तक के लिए टाल दी गई

केंद्र बनाम राज्य: ED की याचिका में क्या कहा गया?

ED ने हाई कोर्ट में अपनी याचिका में मुख्य आरोप यह लगाया:

  • I-PAC के निदेशक प्रतीक जैन के घर और कार्यालय पर चल रही जांच के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अवरोध उत्पन्न किया

  • याचिका में दावा किया गया कि ममता और उसके समर्थकों ने महत्वपूर्ण दस्तावेज़, भौतिक रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जबरन ले लिए, जिससे मान्यताप्राप्त कानूनी जांच प्रभावित हुई।

  • ED ने यह भी कहा कि इन पायरेट दस्तावेजों और उपकरणों को फोरेन्सिक रूप से संरक्षित किया जाना आवश्यक है ताकि जांच में कोई छेड़छाड़ न हो सके।

  • एजेंसी ने CBI से भी यह मामला दर्ज करने और मामले की गहन जांच की मांग कोर्ट से की।



ED ने स्पष्ट किया कि ये छापेमारी साधारण वित्तीय जांच नहीं बल्कि प्रभावी नमूने पर आधारित कार्रवाई थी, न कि किसी राजनीतिक प्रतिष्ठान के खिलाफ लक्षित कार्रवाई।

I-PAC छापेमारी का मूल मामला

यह पूरा विवाद 2020 में कोलकाता में कोल स्कैम से जुड़े धन शोधन मामले की जांच से जुड़ा है जिसमें ED को हवाला लेन-देन के जरिये बड़ी रकम के ट्रांजैक्शन का पता चला। कथित रूप से, उन फंडों में I-PAC का नाम भी शामिल माना गया, जिसके चलते छापेमारी हुई।

ममता बनर्जी का तीखा पलटवार

मुख्य मंत्री ममता बनर्जी ने ED पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:

  • यह रेड राजनीतिक रूप से प्रेरित है और उसके माध्यम से टीएमसी के गोपनीय चुनावी रणनीति और डेटा की चोरी की जा रही है।

  • उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस कार्रवाई के पीछे हैं।

  • ममता ने ED पर टीएमसी के भौतिक दस्तावेज़, हार्ड डिस्क और डेटा प्रतीक लिए जाने का आरोप लगाया, जिसमें पार्टी के आगामी विधानसभा चुनाव-2026 की रणनीतियाँ मौजूद थीं।

वहीं टीएमसी ने कोर्ट में अलग से याचिका दायर कर ED द्वारा गोपनीय और संवेदनशील डेटा को वापस करने की भी मांग की। वह कहती है कि ED द्वारा जब्त सामग्री में पार्टी की निर्वाचनी सुव्यवस्था और रणनीति-संबंधित दस्तावेज शामिल हैं, जिनका राजनैतिक प्रक्रिया से कोई सम्बन्ध नहीं था।

कोर्ट में उपजे हालात और सुनवाई का विलंब

कलकत्ता हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति सुव्रा घोष के समक्ष मामला प्रस्तुत किया गया, लेकिन सुनवाई के दौरान:

  • वकील, इंटर्न और सुनवाई में शामिल लोग कोर्टरूम में काफी संख्या में जमा हो गए,

  • शोर-शराबा और व्यवधान के कारण कोर्ट का माहौल सुनवाई के लायक नहीं रहा,

  • न्यायाधीश ने बार-बार आदेश देने के बावजूद भी शांत नहीं होने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ाया और सुनवाई 14 जनवरी को तय कर दी।

यह सुनवाई इसी राजनीतिक टकराव और कानूनी लड़ाई का एक और अध्याय है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार के बीच गहन मतभेद उभर कर सामने आए हैं।


बड़े सवाल और आगे की प्रक्रिया

✔️ क्या कोर्ट जल्द सुनवाई में ED की दलीलों को मान्यता देगा?
✔️ क्या न्यायिक प्रक्रिया में ED या टीएमसी को कोई बड़ा लाभ मिलेगा?
✔️ इस पूरे विवाद का निर्णायक असर 2026 विधानसभा चुनावों पर क्या पड़ेगा?

इन सभी बिंदुओं पर 14 जनवरी की सुनवाई निर्णायक साबित हो सकती है।

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