यह प्रदर्शनी न केवल ऐ वेइवेई के तीन दशकों के रचनात्मक सफ़र को समेटे हुए है, बल्कि भारतीय दर्शकों के लिए वैश्विक कला-राजनीति को समझने का एक दुर्लभ अवसर भी प्रदान करती है।
कला और प्रतिरोध का वैश्विक चेहरा
ऐ वेइवेई को केवल एक कलाकार कहना उनके कद को कम आँकना होगा। वे ऐसे रचनाकार हैं जिनकी कला सत्ता से सवाल पूछती है, इतिहास की परतें खोलती है और सामूहिक स्मृतियों को चुनौती देती है। चीन में सरकारी दमन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के मुद्दों पर उनकी मुखरता ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक कलात्मक असंतुष्ट के रूप में स्थापित किया है।
अपने बयान में ऐ वेइवेई ने कहा कि भारत में यह उनकी पहली प्रदर्शनी है और भले ही इसमें सीमित संख्या में कृतियाँ प्रदर्शित हों, लेकिन ये उनके बीस से तीस वर्षों के रचनात्मक विकास के अहम पड़ावों को रेखांकित करती हैं।
टॉय-ब्रिक से बनी राजनीति और इतिहास
इस प्रदर्शनी का एक बड़ा आकर्षण ऐ वेइवेई की चर्चित टॉय-ब्रिक रचनाएँ हैं। साधारण खिलौना ईंटों को जोड़कर वे विशाल पिक्सल-जैसी सतहें रचते हैं, जिनमें कला इतिहास, राजनीतिक घटनाएँ, प्रसिद्ध चित्र और सामूहिक स्मृति के दृश्य उभरते हैं।
प्रदर्शित प्रमुख कृतियों में शामिल है Surfing (After Hokusai), जो जापानी कलाकार होकुसाई की विश्वप्रसिद्ध पेंटिंग द ग्रेट वेव की समकालीन पुनर्व्याख्या है। वहीं Water Lilies में क्लोद मोने की आइकॉनिक श्रृंखला को आधुनिक संदर्भों के साथ प्रस्तुत किया गया है।
नवपाषाण से शरणार्थी संकट तक
प्रदर्शनी ऐ वेइवेई की उस विशिष्ट शैली को भी रेखांकित करती है, जिसमें वे प्राचीन इतिहास और आधुनिक वैश्विक संकटों को एक ही फ्रेम में लाकर खड़ा कर देते हैं।
Stone Axes Painted White में नवपाषाण कालीन पत्थर की कुल्हाड़ियों का उपयोग है, जो सभ्यता की शुरुआत और सत्ता के औज़ारों की ओर संकेत करती है।
वहीं Porcelain Pillar with Refugee Motif आधुनिक दुनिया के सबसे संवेदनशील मुद्दे—प्रवास और शरणार्थी संकट—पर सीधा संवाद स्थापित करती है।
पहली बार प्रदर्शित होने वाली कृतियाँ
इस प्रदर्शनी में ऐ वेइवेई की कुछ हालिया और पहली बार प्रदर्शित की जा रही रचनाएँ भी शामिल हैं।
F.U.C.K. नामक कृति, जो बटनों के माध्यम से बनाई गई है, प्रतीकों और भाषा की राजनीति पर तीखा व्यंग्य करती है।
इसके अलावा Whitewashed Remnants of History of the State of Emerging Future Works को लेकर कला जगत में खास उत्सुकता है, क्योंकि इसे पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जा रहा है।
भारत क्यों है इस संवाद के लिए ज़रूरी
नेचर मोर्ते की सह-निदेशक अपराजिता जैन के अनुसार, ऐ वेइवेई की कला को भारत लाना किसी तमाशे का निर्माण नहीं, बल्कि समय की ज़रूरत है। उनके शब्दों में, भारत वह जगह है जहाँ इतिहास, सत्ता, सीमाएँ और स्मृति जैसे सवाल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के अनुभव हैं।
गैलरी के सह-निदेशक पीटर नागी का कहना है कि जब छवियों की राजनीति, आवाजाही और पहचान वैश्विक जीवन को आकार दे रही हैं, तब भारत में ऐ वेइवेई की पहली एकल प्रदर्शनी का होना न केवल ज़रूरी, बल्कि देर से आया हुआ न्याय है।
एक प्रदर्शनी, कई सवाल
यह प्रदर्शनी केवल कला देखने का अनुभव नहीं है, बल्कि यह दर्शकों को सत्ता, इतिहास, प्रवास, पहचान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सोचने के लिए आमंत्रित करती है। ऐ वेइवेई की कृतियाँ दर्शक से संवाद करती हैं, असहज करती हैं और सवाल छोड़ जाती हैं—और शायद यही उनकी सबसे बड़ी ताक़त है।
दिल्ली में यह प्रदर्शनी भारतीय कला जगत के लिए एक वैश्विक क्षण की तरह है, जहाँ कला और प्रतिरोध एक ही मंच पर खड़े नज़र आते हैं।
