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हज़रत अली शेर-ए-ख़ुदा की याद में 13 रजब की रूहानी महफ़िल, साहित्यकारों,पत्रकारों और बुद्धिजीवियों की रही खास भागीदारी

4 जनवरी 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi |वरिष्ठ पत्रकार    

भुरे शाह की ज़ियारत के समीप स्थित वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रसिद्ध शायर मीर शाह हुसैन के निवास पर 13 रजब के मुबारक अवसर पर मौला-ए-कायनात हज़रत अली शेर-ए-ख़ुदा की शान में एक भव्य और रूहानियत से परिपूर्ण मनक़बती महफ़िल तथा लंगर-ए-आम का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और अदब के साथ किया गया। यह आयोजन न सिर्फ़ धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक समरसता, अमन और भाईचारे के संदेश को भी मज़बूती से सामने लाया।

इस विशेष कार्यक्रम में शहर के नामचीन अदीबों, दानिश्वरों, शायरों, साहित्यकारों और वरिष्ठ पत्रकारों ने बड़ी संख्या में शिरकत की। महफ़िल की शुरुआत हज़रत अली के फ़ज़ाइल और उनकी महान शख़्सियत पर प्रकाश डालते हुए की गई, जिससे पूरा माहौल आध्यात्मिक ऊर्जा और अदब से भर गया।

मनक़बती महफ़िल के दौरान प्रोफेसर आबिद हुसैन हैदरीतनवीर हुसैन अशरफ़ीसलमान नबीमीर शाह हुसैनज़ियाउस सहर रज़्ज़ाक़ी सहित अन्य शायरों और साहित्यकारों ने अपनी-अपनी मनक़बतों और कलाम के ज़रिये हज़रत अली की शहादत, इंसाफ़-पसंदी, बहादुरी, इल्म और इंसानियत से प्रेम जैसे गुणों को अत्यंत प्रभावशाली अंदाज़ में प्रस्तुत किया। शायरों की बुलंद आवाज़ और अर्थपूर्ण अल्फ़ाज़ ने श्रोताओं के दिलों को छू लिया, जिससे महफ़िल में मौजूद हर व्यक्ति भाव-विभोर हो उठा।

इस अवसर पर उपस्थित शहर के कई प्रबुद्ध बुद्धिजीवियों और विचारकों ने अपने वक्तव्यों में कहा कि मौला-ए-कायनात हज़रत अली की तालीम किसी एक मज़हब या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समूची मानवता के लिए मार्गदर्शन का स्रोत है। उन्होंने कहा कि हज़रत अली का संदेश आज के दौर में और भी ज़्यादा प्रासंगिक है, क्योंकि उनकी शिक्षाएँ इंसाफ़, सच्चाई, सब्र, सहिष्णुता और भाईचारे पर आधारित हैं। जो भी व्यक्ति शांति, अमन और खुशहाल समाज चाहता है, उसके लिए हज़रत अली का जीवन और उनके विचार एक मिसाल हैं।

कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा गया कि इस प्रकार की महफ़िलें समाज में आपसी प्रेम, सौहार्द और सांस्कृतिक एकता को मज़बूत करती हैं तथा नई पीढ़ी को नैतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करती हैं। आयोजन स्थल पर मौजूद माहौल रूहानियत और आपसी सम्मान की जीवंत तस्वीर पेश कर रहा था।

महफ़िल के समापन पर अलमदार यूसुफ़ ने कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों, शायरों, अदीबों, पत्रकारों और सहयोगियों का दिल से शुक्रिया अदा किया। इसके पश्चात लंगर-ए-आम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की। लंगर के माध्यम से सेवा, समानता और इंसानियत का वह संदेश सामने आया, जो हज़रत अली की शिक्षाओं का मूल आधार है। आयोजन का समापन दुआ और अमन-शांति की कामना के साथ किया गया।




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