27 दिसम्बर 2025 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब सीरिया पहले ही राजनीतिक संक्रमण, पूर्व सत्ता के पतन के बाद की अस्थिरता, और ISIS से जुड़े बचे-खुचे आतंकी नेटवर्क की गतिविधियों से जूझ रहा है।
जुमे की नमाज़ के दौरान हमला, मस्जिद बनी दहशत का केंद्र
सीरियाई सरकारी समाचार एजेंसी SANA और आंतरिक मंत्रालय के अनुसार, विस्फोट ठीक उस समय हुआ जब सैकड़ों नमाज़ी मस्जिद के भीतर जुमे की नमाज़ अदा कर रहे थे। अचानक हुए धमाके से पूरा इलाका दहल उठा। मस्जिद के अंदर अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
अल जज़ीरा द्वारा सत्यापित वीडियो फुटेज में देखा गया कि भयभीत लोग मस्जिद से बाहर निकलते हुए घायलों को स्ट्रेचर पर लाद रहे हैं, जबकि कई लोग खून से लथपथ नमाज़ियों को कंधों पर उठाकर एंबुलेंस तक पहुंचा रहे हैं।
विस्फोट की भयावहता: इबादतगाह तबाही में तब्दील
स्थल से सामने आई तस्वीरों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान बताते हैं कि विस्फोट मस्जिद के मुख्य प्रार्थना कक्ष के एक कोने में हुआ। धमाके से दीवार में गहरा गड्ढा बन गया, आसपास की दीवारें और छत झुलस गईं।
नमाज़ की कालीनें फटकर मलबे में दब गईं, कुरआन और अन्य धार्मिक पुस्तकें जमीन पर बिखर गईं, और हर ओर धुएँ, मलबे और खून के निशान दिखाई दिए।
यह दृश्य न केवल भौतिक नुकसान का प्रतीक है, बल्कि उस मानसिक आघात को भी दर्शाता है जो इस हमले ने स्थानीय समुदाय पर छोड़ा है।
आत्मघाती हमला या पूर्व-नियोजित विस्फोट? जांच जारी
रॉयटर्स से बातचीत में स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि हमला या तो आत्मघाती हमलावर द्वारा किया गया या फिर मस्जिद में पहले से विस्फोटक सामग्री छिपाकर रखी गई थी।
सीरिया के आंतरिक मंत्रालय ने इलाके को पूरी तरह सील कर दिया है और फॉरेंसिक टीमें विस्फोट के स्रोत और जिम्मेदारों की पहचान में जुटी हुई हैं।
सांप्रदायिक तनाव भड़काने की सुनियोजित कोशिश
अल जज़ीरा के वरिष्ठ संवाददाता अयमान ओघन्ना, जिन्होंने घटनास्थल का दौरा किया, ने कहा कि यह हमला केवल एक आतंकी वारदात नहीं, बल्कि होम्स जैसे धार्मिक रूप से विविध शहर में सांप्रदायिक तनाव भड़काने की गहरी साजिश प्रतीत होता है।
उनके अनुसार,
“इस तरह के हमले समाज में डर, अविश्वास और आपसी टकराव को जन्म देने के लिए किए जाते हैं, ताकि देश को अस्थिर बनाए रखा जा सके।”
ISIS से जुड़े संगठन ने ली जिम्मेदारी
एक चरमपंथी संगठन सराया अंसार अल-सुन्ना ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है और दावा किया है कि उसके हमले “जारी रहेंगे और और अधिक तेज़ होंगे।”
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ और किंग्स कॉलेज लंदन के व्याख्याता रॉब गाइस्ट पिनफोल्ड के अनुसार, यह संगठन ISIS (ISIL) से वैचारिक और संचालनात्मक रूप से जुड़ा हुआ माना जाता है।
उन्होंने कहा,
“इन समूहों की रणनीति अल्पसंख्यक धार्मिक समुदायों पर हमला कर देश को अस्थिर बनाए रखना और शासन को अकार्यक्षम दिखाना है।”
सीरियाई सरकार की तीखी प्रतिक्रिया
सीरिया की विदेश मंत्रालय ने इस हमले को
“देश की सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता को कमजोर करने का एक हताश प्रयास”
बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की।
मंत्रालय ने अपने बयान में दोहराया कि सीरिया
“आतंकवाद के सभी रूपों और उसकी हर अभिव्यक्ति के खिलाफ निर्णायक लड़ाई जारी रखेगा।”
सीरिया के सूचना मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि
“पूर्व शासन के अवशेष, ISIS आतंकवादी और उनके सहयोगी एक साझा लक्ष्य पर काम कर रहे हैं—नए राज्य की स्थिरता को पटरी से उतारना और नागरिक शांति को नष्ट करना।”
असद के पतन के बाद भी सुरक्षा संकट
यह हमला पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद की सत्ता से विदाई के एक वर्ष बाद हुआ है, जब देश में नई सत्ता व्यवस्था खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रही है।
हालांकि, इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि सीरिया में सुरक्षा स्थिति अब भी बेहद नाज़ुक बनी हुई है और आतंकी संगठन हालात का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
अमेरिकी कार्रवाई और वैश्विक परिदृश्य
गौरतलब है कि हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका ने सीरिया में ISIS ठिकानों पर हवाई हमले किए, जो दो अमेरिकी सैनिकों और एक नागरिक दुभाषिए की हत्या के जवाब में थे।
इसके अलावा, नवंबर 2025 में दमिश्क ने औपचारिक रूप से वैश्विक एंटी-ISIS गठबंधन में शामिल होकर आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मज़बूत करने की प्रतिबद्धता जताई थी।
