31 दिसम्बर 2025 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार
मुकल्ला बंदरगाह पर बमबारी: सऊदी अरब का पक्ष
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मालिकी ने इस सैन्य कार्रवाई से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की। उनके अनुसार, मंगलवार तड़के मुकल्ला बंदरगाह में प्रवेश करने पर यह स्पष्ट हुआ कि दो जहाजों में 80 से अधिक सैन्य वाहन, हथियार और गोला-बारूद मौजूद थे। सऊदी अरब का दावा है कि ये सामग्री यूएई से जुड़ी थी और इसे यमन के अलगाववादी संगठन सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) को समर्थन देने के लिए भेजा जा रहा था।
अल-मालिकी ने यह भी कहा कि यूएई ने इन वाहनों, कंटेनरों और अपने सैन्य कर्मियों को अल-रय्यान एयरबेस में सऊदी अरब को बिना सूचित किए स्थानांतरित किया, जिसे गठबंधन नियमों का उल्लंघन माना गया। सऊदी पक्ष ने जोर देकर कहा कि पूरी कार्रवाई नियमों और सैन्य आचार संहिता के तहत की गई।
यूएई की प्रतिक्रिया: सैनिकों की वापसी का फैसला
मुकल्ला पर हुए हवाई हमले के कुछ ही घंटों बाद यूएई ने यमन में अपनी मौजूदगी को लेकर बड़ा फैसला लिया। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि हालिया घटनाक्रमों और उनके संभावित प्रभावों का “व्यापक मूल्यांकन” करने के बाद यह निर्णय लिया गया है कि यमन में चल रहे तथाकथित “काउंटरटेररिज़्म मिशन” को समाप्त किया जाए।
बयान में कहा गया कि यूएई अपने शेष सैन्य कर्मियों को स्वेच्छा से और सुरक्षित तरीके से यमन से वापस बुला रहा है। यह घोषणा ऐसे समय आई जब यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने यूएई को 24 घंटे के भीतर अपने सैनिक हटाने का अल्टीमेटम दिया था—जिसे सऊदी अरब का भी समर्थन प्राप्त था।
एसटीसी और दक्षिण यमन का संकट
सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) ने हाल के हफ्तों में यमन की राजनीति को झकझोर दिया है। यह वही संगठन है जो पहले हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी समर्थित सरकार के साथ खड़ा था, लेकिन अब उसने दक्षिण यमन के लिए अलग राज्य की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ सैन्य अभियान छेड़ दिया है।
एसटीसी ने हद्रामौत और महरा जैसे रणनीतिक प्रांतों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। हद्रामौत सऊदी सीमा से सटा हुआ है, जबकि महरा ओमान के नजदीक स्थित है। सऊदी अरब ने इन इलाकों में एसटीसी की गतिविधियों को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताया है।
सऊदी अरब की सख्त चेतावनी
रियाद ने यूएई पर आरोप लगाया कि वह एसटीसी पर दबाव डालकर उसे इन प्रांतों में सैन्य कार्रवाई के लिए प्रेरित कर रहा है। सऊदी सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा एक “रेड लाइन” है और किसी भी प्रकार के खतरे का पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा।
यमन सरकार का कड़ा रुख
यमन के राष्ट्रपति परिषद प्रमुख रशाद अल-अलीमी ने यूएई के साथ किए गए रक्षा समझौते को रद्द कर दिया और अमीराती बलों को देश छोड़ने के लिए 24 घंटे का समय दिया। एक टेलीविज़न संबोधन में उन्होंने आरोप लगाया कि यह “निश्चित रूप से साबित हो चुका है” कि यूएई ने एसटीसी को राज्य की सत्ता के खिलाफ विद्रोह के लिए उकसाया।
इसके बाद यमन सरकार ने 72 घंटे के लिए नो-फ्लाई ज़ोन, समुद्री और ज़मीनी नाकेबंदी की घोषणा भी की।
यूएई का खंडन और एसटीसी की जिद
यूएई ने सऊदी हमले पर हैरानी जताते हुए कहा कि जिन जहाजों को निशाना बनाया गया, उनमें हथियार नहीं थे और वे एसटीसी के लिए नहीं, बल्कि यूएई बलों के लिए थे। अबू धाबी ने यह भी कहा कि वह सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और तनाव कम करने का रास्ता तलाश रहा है।
वहीं एसटीसी ने किसी भी तरह की पीछे हटने से इनकार कर दिया है। संगठन के प्रवक्ता अनवर अल-तमीमी ने कहा कि “ज़मीन के मालिक से उसकी ही ज़मीन छोड़ने को कहना तर्कसंगत नहीं है।” उन्होंने चेतावनी दी कि उनकी स्थिति रक्षात्मक है, लेकिन किसी भी सैन्य दबाव का जवाब दिया जाएगा।
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
तनाव कम करने की कोशिशों के तहत क़तर ने सऊदी अरब और यूएई के बयानों का स्वागत किया और इसे खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सिद्धांतों के अनुरूप बताया। इस बीच सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने अमेरिका के विदेश मंत्री और पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री से फोन पर बातचीत कर क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की।
निष्कर्ष:-
मुकल्ला पर हुई यह बमबारी केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि यमन युद्ध के भीतर गहरे होते अंतर-विरोधों की तस्वीर है। सऊदी अरब और यूएई के बीच पैदा हुआ यह तनाव न सिर्फ यमन के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र की सामरिक स्थिरता के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीति इस संकट को थाम पाती है या यमन एक और खतरनाक मोड़ की ओर बढ़ता है।
