लोकसभा से राज्यसभा तक, तेज़ी से आगे बढ़ा विधेयक
SHANTI बिल को बुधवार को लोकसभा से मंज़ूरी मिली थी। इससे पहले सोमवार को इसे संसद में केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) परमाणु ऊर्जा जितेंद्र सिंह ने पेश किया था। विधेयक के दोनों सदनों से पारित होते ही यह कानून बनने की दिशा में अंतिम चरण में पहुंच गया है।
क्या है SHANTI बिल का मूल उद्देश्य?
इस विधेयक का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब तक केवल सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों तक सीमित रहे परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के संचालन का अधिकार निजी कंपनियों को भी दिया जाएगा। इसके तहत—
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निजी कंपनियां या संयुक्त उपक्रम (Joint Ventures) परमाणु बिजलीघर का निर्माण, स्वामित्व, संचालन और डी-कमीशनिंग कर सकेंगे।
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संचालन से पहले रेडिएशन सुरक्षा और परमाणु सुरक्षा प्राधिकरण से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
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परमाणु दुर्घटनाओं की स्थिति में नागरिक दायित्व (Civil Liability) से जुड़े प्रावधानों को “व्यावहारिक और संतुलित” बनाया गया है।
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ईंधन और तकनीक आपूर्तिकर्ताओं पर लागू विवादास्पद दायित्व क्लॉज को हटाया गया है, जिससे विदेशी और घरेलू निवेशकों की चिंताएं कम होंगी।
पुराने कानूनों में बड़ा बदलाव
SHANTI बिल के लागू होने के साथ ही सरकार ने दो महत्वपूर्ण कानूनों को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है—
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Atomic Energy Act 1962
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Civil Liability for Nuclear Damage Act 2010
साथ ही, पेटेंट्स एक्ट 1970 में भी संशोधन का रास्ता साफ किया गया है, ताकि परमाणु ऊर्जा से जुड़ी तकनीकों के पेटेंट को सरल और आधुनिक बनाया जा सके।
प्रधानमंत्री मोदी का बयान: “टेक्नोलॉजी लैंडस्केप के लिए परिवर्तनकारी क्षण”
विधेयक के पारित होने पर नरेंद्र मोदी ने इसे भारत के लिए “परिवर्तनकारी क्षण” बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कानून—
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स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य को मज़बूती देगा
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AI और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को सुरक्षित ऊर्जा उपलब्ध कराएगा
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निजी क्षेत्र और युवाओं के लिए निवेश, नवाचार और निर्माण के नए अवसर खोलेगा
उन्होंने विधेयक के समर्थन में वोट देने वाले सांसदों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि “यह भारत में निवेश और निर्माण के लिए सबसे सही समय है।”
निवेश और वैश्विक साझेदारी को मिलेगा बढ़ावा
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, SHANTI बिल से भारत का परमाणु ऊर्जा क्षेत्र वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनेगा। स्पष्ट दायित्व ढांचा और निजी भागीदारी से—
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नई तकनीकों का तेज़ी से समावेश
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रोज़गार के अवसरों में वृद्धि
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ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूती
जैसे दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
निष्कर्ष:-
ऊर्जा नीति में ऐतिहासिक बदलाव
SHANTI बिल केवल एक कानून नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का आधार स्तंभ माना जा रहा है। यह विधेयक जहां स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम है, वहीं निजी क्षेत्र की भागीदारी से भारत को 21वीं सदी की परमाणु शक्ति बनने की राह पर तेज़ी से आगे ले जाएगा।
