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गाज़ा में बारिश और कड़ाके की ठंड ने विस्थापित फ़लस्तीनियों पर ढाया कहर, टेंट डूबे, मानवीय संकट गहराया

 27 दिसम्बर 2025 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार       

गाज़ा पट्टी में जारी युद्ध और व्यापक तबाही के बीच अब कुदरत की मार ने हालात को और भयावह बना दिया है। तेज़ ठंड, मूसलाधार बारिश और तूफ़ानी हवाओं ने हज़ारों विस्थापित फ़लस्तीनी परिवारों के लिए जीवन को असहनीय बना दिया है। जगह-जगह लगे अस्थायी टेंटों और झुग्गीनुमा शरणस्थलों में पानी भर गया है, चारों ओर कीचड़ और मलबा फैल गया है, जबकि प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में बारिश एक भीषण तूफ़ान का रूप ले सकती है।

सर्दी के मौसम में लगातार तीसरा तूफ़ानी सिस्टम

मौसम विज्ञानियों के अनुसार, गाज़ा इस सर्दी में तीसरे ‘पोलर लो-प्रेशर सिस्टम’ की चपेट में आ चुका है, जिसके साथ तेज़ बारिश और तेज़ हवाएं चलीं। विशेषज्ञों का कहना है कि एक और सिस्टम जल्द ही क्षेत्र में प्रवेश कर सकता है। यह स्थिति ऐसे समय में बनी है, जब गाज़ा की अधिकांश इमारतें पहले ही इज़राइली बमबारी में नष्ट या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और लाखों लोग सुरक्षित आवास से वंचित हैं।

टेंटों में कैद ज़िंदगी, बारिश बनी आफ़त

गाज़ा सिटी, बुरैज शरणार्थी शिविर और दीर अल-बलाह जैसे इलाक़ों में हालात सबसे ज़्यादा चिंताजनक हैं। विस्थापित परिवारों के टेंट कुछ ही घंटों की बारिश में पानी से भर गए। बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार लोगों को ठंड से बचाना मुश्किल हो गया है। गाज़ा सिटी में शरण लिए मोहम्मद मसलह बताते हैं कि उनके पास कहीं और जाने का विकल्प नहीं है। उनका घर अब भी इज़राइली नियंत्रण में है, इसलिए वे मजबूरी में खुले इलाके में टेंट लगाकर रह रहे हैं। बारिश शुरू होते ही उनके टेंट में पानी भर गया और वे पूरी तरह भीग गए।

दो वर्षों से अस्थायी जीवन, उम्मीदें टूटती हुईं

दीर अल-बलाह में रह रहीं शैमा वादी, जो उत्तरी गाज़ा के जबालिया से विस्थापित हुई थीं, कहती हैं कि उनका परिवार पिछले दो साल से टेंट में रह रहा है। हर बारिश के साथ टेंट गिरने लगता है और वे लकड़ी के टुकड़ों और प्लास्टिक शीट से उसे दोबारा खड़ा करने की कोशिश करती हैं। बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी और लगातार संघर्ष के कारण वे अपने बच्चों के लिए गर्म कपड़े, गद्दे या बुनियादी ज़रूरतें भी पूरी नहीं कर पा रही हैं।

ठंड से मौतें, ढहते ढांचे और आपात हालात

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, दिसंबर महीने में अब तक कम से कम 15 लोगों की मौत ठंड और हाइपोथर्मिया के कारण हो चुकी है, जिनमें तीन नवजात शिशु भी शामिल हैं। लगातार बारिश और तेज़ हवाओं से कई जर्जर इमारतें ढह गईं, जिससे जान-माल का नुकसान और बढ़ गया। सिविल डिफेंस की टीमें लगातार आपात कॉल्स पर पहुंच रही हैं और जहां संभव हो रहा है, वहां टेंटों को प्लास्टिक शीट से ढककर लोगों को अस्थायी राहत देने का प्रयास कर रही हैं।

मानवीय सहायता पर बढ़ता दबाव

गाज़ा प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय राहत संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि तुरंत बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता नहीं पहुंचाई गई, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। संगठनों ने इज़राइल से अधिक शेल्टर, कंबल, तिरपाल, ईंधन और अन्य ज़रूरी राहत सामग्री को गाज़ा में प्रवेश की अनुमति देने की अपील की है। उनका कहना है कि सर्दी और बारिश के बीच खुले में रह रहे हज़ारों लोगों की जान गंभीर खतरे में है।

युद्धविराम के बीच भी जारी पीड़ा

इन कठिन परिस्थितियों के बीच युद्धविराम को लेकर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन ज़मीनी हालात अब भी बेहद दर्दनाक हैं। युद्धविराम लागू होने के बाद भी हिंसा की घटनाएं पूरी तरह नहीं रुकी हैं। गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इस अवधि में सैकड़ों फ़लस्तीनी मारे गए और हज़ारों घायल हुए हैं। मलबे से अब भी शव निकाले जा रहे हैं, जिससे मृतकों की कुल संख्या लगातार बढ़ रही है।

गहराता मानवीय संकट

गाज़ा में युद्ध, विस्थापन, सर्दी और बारिश का यह घातक मेल एक भीषण मानवीय संकट का रूप ले चुका है। बिना सुरक्षित आश्रय, पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं के, लाखों फ़लस्तीनी नागरिक हर दिन जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है कि यदि तत्काल और प्रभावी मानवीय हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो हालात और भी भयावह हो सकते हैं।






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