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भारत में UPI पर चार्ज लगाने का फैसला: महंगाई से जूझ रही जनता पर एक और बोझ, सत्ता के गलत कदम का व्यापक विरोध

नई दिल्ली 16 सितम्बर  2026:✍🏻 Z S Razzaqi | वरिष्ठ पत्रकार 

नई दिल्ली। भारत की डिजिटल पेमेंट व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने 15 सितंबर 2026 को नए Merchant Discount Rate (MDR) framework की घोषणा की है। इसके तहत 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के कुछ Person-to-Merchant (P2M) UPI transactions पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा।

हालांकि इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह शुल्क सीधे UPI से भुगतान करने वाले ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। सामान्य परिस्थितियों में MDR का भुगतान merchant की ओर से acquiring bank को किया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि merchants को इस शुल्क को ग्राहक पर डालने से रोकने के लिए बैंकों को निर्देश दिए गए हैं। Person-to-Person यानी P2P UPI transactions पर कोई शुल्क नहीं लगाया गया है।

फिर भी यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में UPI ने जिस “zero-cost digital payment” culture को मजबूत किया है, उसमें पहली बार बड़े merchant payments के लिए एक व्यवस्थित MDR framework वापस आ रहा है। इससे कारोबारियों की payment cost, digital-payment economics, छोटे व्यापारियों की स्थिति और भविष्य में वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों पर संभावित प्रभाव को लेकर बहस शुरू हो गई है।

15 अक्टूबर 2026 से क्या बदलने वाला है?

नए नियम के तहत ₹2,000 तक के P2M UPI payments पर MDR नहीं लगेगा। ₹2,000 से अधिक के eligible merchant transactions पर सामान्य MDR 0.4 प्रतिशत होगा।

इसके अलावा ₹75,000 और उससे अधिक के transaction पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति transaction रखी गई है। यानी किसी सामान्य eligible merchant को ₹75,000 या उससे अधिक के transaction पर 0.4 प्रतिशत की गणना से बनने वाली राशि के बजाय अधिकतम ₹300 MDR देना होगा।

उदाहरण के लिए:

UPI Paymentसामान्य MDRMerchant पर संभावित MDR
₹2,0000%₹0
₹3,0000.4%₹12
₹5,0000.4%₹20
₹10,0000.4%₹40
₹20,0000.4%₹80
₹50,0000.4%₹200
₹75,0000.4%₹300
₹1,00,0000.4%, लेकिन cap लागू₹300

इसलिए यह समझना जरूरी है कि ₹2,000 की सीमा पार होते ही पूरे transaction पर 0.4 प्रतिशत लागू होगा, न कि केवल ₹2,000 से ऊपर की अतिरिक्त राशि पर।


ग्राहक से सीधे पैसा नहीं लिया जाएगा

इस पूरे बदलाव को समझने में सबसे बड़ी सावधानी यही है कि MDR और customer transaction fee एक ही चीज नहीं हैं।

MDR merchant-payment ecosystem में लगाया जाने वाला शुल्क है। नए framework के अनुसार इसका भुगतान merchant ecosystem के भीतर होगा। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि P2P UPI transactions पर कोई charge नहीं होगा और UPI application providers को platform fee या hidden charge लगाने की अनुमति नहीं होगी।

यानी अगर कोई व्यक्ति अपने दोस्त, रिश्तेदार या किसी दूसरे व्यक्ति को ₹5,000 UPI से भेजता है, तो केवल इस कारण उस transaction पर नया MDR नहीं लगेगा।

इसी तरह ₹2,000 तक के eligible merchant payments भी MDR के दायरे से बाहर रहेंगे।

इसलिए यह कहना कि “15 अक्टूबर से हर UPI payment पर charge लगेगा” तथ्यात्मक रूप से गलत होगा।


छोटे व्यापारियों के लिए क्या व्यवस्था है?

नए framework में छोटे व्यापारियों को लेकर भी विशेष प्रावधान किया गया है।

P2PM classification के तहत UPI QR के माध्यम से महीने में ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे merchants को mandatory zero-MDR व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार का तर्क है कि इससे छोटे दुकानदारों, छोटे कारोबारियों और कम-volume वाले merchants पर नई लागत का बोझ नहीं पड़ेगा।

इसका मतलब यह है कि हर किराना दुकानदार, रेहड़ी-पटरी वाला या छोटा व्यापारी automatic रूप से 0.4 प्रतिशत MDR के दायरे में नहीं आ जाएगा।

यही कारण है कि इस फैसले को केवल “हर व्यापारी पर UPI tax” के रूप में देखना सही नहीं होगा।


रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और Fuel पर सिर्फ ₹5 MDR

नए framework में कुछ महत्वपूर्ण और कम-margin वाले sectors के लिए अलग व्यवस्था की गई है।

रेलवे, telecommunications, insurance, fuel और agricultural inputs जैसे sectors में ₹2,000 से अधिक के eligible UPI transactions पर flat ₹5 MDR रखा गया है।

इसका अर्थ है कि सामान्य 0.4 प्रतिशत MDR के बजाय इन specified categories में transaction value बढ़ने के साथ शुल्क उसी अनुपात में नहीं बढ़ेगा।

उदाहरण के लिए, अगर कोई qualifying fuel payment ₹50,000 का है, तो सामान्य 0.4 प्रतिशत के हिसाब से ₹200 MDR बनने के बजाय specified category में flat ₹5 MDR होगा।

यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि fuel, railway ticket, telecom और insurance जैसे खर्च आम नागरिकों तथा businesses के नियमित financial transactions का हिस्सा हैं।


Capital Market में MDR की दर और भी कम

Capital-market related payments के लिए अलग rate निर्धारित किया गया है।

Mutual funds, securities, stockbrokers और dealers से संबंधित eligible payments पर 0.02 प्रतिशत MDR रखा गया है और इसकी maximum limit ₹300 प्रति transaction होगी।

सरकार का तर्क है कि comparatively low MDR retail participation को प्रभावित किए बिना formal financial markets में digital payments को बढ़ावा देने में मदद करेगा।


सरकार क्यों लाई MDR व्यवस्था?

सरकार और NPCI का प्रमुख तर्क UPI ecosystem की financial sustainability है।

UPI पिछले कुछ वर्षों में भारत की digital economy की रीढ़ बन चुका है। अगस्त 2026 में UPI network पर करीब 2,451 करोड़ transactions, जिनकी कुल value लगभग ₹29.9 लाख करोड़ रही।

इतने विशाल payment infrastructure को लगातार चलाने के लिए banking infrastructure, technology, cybersecurity, fraud prevention, server capacity और payment-processing systems पर खर्च होता है।

सरकार का कहना है कि नया MDR framework इस ecosystem को अधिक self-sustainable बनाने, infrastructure में निवेश को बढ़ाने और rural तथा semi-urban क्षेत्रों में digital payments के विस्तार को जारी रखने में मदद करेगा।

यानी सरकार के दृष्टिकोण से सवाल केवल “चार्ज लगाने” का नहीं बल्कि यह भी है कि इतने बड़े payment network की operational cost आखिर किस मॉडल से लंबे समय तक पूरी की जाए।


लेकिन असली सवाल: क्या इसका बोझ अंततः ग्राहक पर आएगा?

यही इस पूरे फैसले का सबसे बड़ा economic और consumer question है।

कागज पर MDR merchant की लागत है। सरकार ने यह भी कहा है कि merchant इसे customer पर pass on नहीं कर सकता।

लेकिन वास्तविक बाजार में व्यापारी अपनी कुल लागत को कैसे manage करता है, यह अलग प्रश्न है।

किसी merchant के लिए payment processing cost बढ़ती है तो उसके सामने सामान्यतः कई रास्ते होते हैं—वह अपना margin कम कर सकता है, operational expenses घटा सकता है, suppliers से बेहतर terms मांग सकता है या pricing strategy में बदलाव कर सकता है।

इसलिए यह कहना कि “MDR लगते ही महंगाई निश्चित रूप से बढ़ जाएगी” अभी जल्दबाजी होगी।

लेकिन यह सवाल जरूर जायज है कि यदि किसी व्यवसाय की payment cost लगातार बढ़ती है तो क्या उसका कोई हिस्सा भविष्य में prices में शामिल करने की कोशिश की जाएगी?

यही वह बिंदु है जहां consumer groups और merchant organisations की चिंता समझ में आती है।


₹10,000 की खरीदारी पर क्या होगा?

मान लीजिए किसी ग्राहक ने किसी सामान्य merchant से ₹10,000 का सामान खरीदा और UPI से भुगतान किया।

नए framework में 0.4 प्रतिशत MDR के हिसाब से merchant-side charge ₹40 होगा।

लेकिन ग्राहक के bank account से ₹10,000 की जगह ₹10,040 नहीं कटना चाहिए। ग्राहक के लिए transaction amount वही ₹10,000 रहेगा, जबकि MDR merchant-side payment ecosystem में लागू होगा।

यही अंतर इस नए नियम को समझने के लिए सबसे जरूरी है।


क्या ₹2,000 से ऊपर हर UPI transaction महंगा होगा?

ग्राहक के लिए सीधे तौर पर नहीं।

नया framework मुख्य रूप से P2M transactions को प्रभावित करता है।

P2P यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI payments पर कोई नया MDR नहीं लगाया गया है। वित्त मंत्रालय ने यह भी कहा है कि individuals के लिए free UPI transactions की संख्या पर कोई monthly quota या volume limit नहीं लगाई गई है।

इसलिए:

व्यक्ति → व्यक्ति: मुफ्त
Merchant को ₹2,000 तक: MDR-free
Merchant को ₹2,000 से अधिक: eligible transactions पर MDR
छोटे P2PM merchants, ₹1 लाख तक monthly UPI QR receipts: zero MDR
कुछ essential sectors: ₹5 flat MDR
Capital market: 0.02% MDR, ₹300 cap


UPI के “Free Era” का अंत क्यों कहा जा रहा है?

भारत में UPI की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण इसकी simplicity और low-cost nature रही है।

एक QR code scan किया, amount डाला और payment हो गया।

कई छोटे दुकानदारों के लिए cash handling, change की समस्या और banking friction कम हुआ। ग्राहकों के लिए भी UPI ने shopping से लेकर bills और services तक payment को आसान बनाया।

इसीलिए नए MDR framework को कुछ analysts UPI के free merchant-payment era में बदलाव के रूप में देख रहे हैं। Reuters ने भी इसे छह साल से अधिक समय के free digital merchant payments के बाद आने वाला महत्वपूर्ण बदलाव बताया है।

हालांकि “free era खत्म” कहना भी संदर्भ के साथ समझना होगा—P2P transactions और ₹2,000 तक के कई P2M transactions अभी भी zero-MDR व्यवस्था में रहेंगे।


महंगाई के दौर में यह फैसला क्यों बन सकता है बड़ा राजनीतिक-आर्थिक मुद्दा?

भारत में household budgets पहले से food, fuel, education, healthcare, housing और transportation जैसे खर्चों से प्रभावित होते हैं। ऐसे माहौल में किसी भी नई business cost को लेकर सार्वजनिक बहस होना स्वाभाविक है।

लेकिन UPI MDR को सीधे महंगाई का नया स्रोत घोषित करना अभी उचित नहीं होगा।

इसके संभावित प्रभाव को समझने के लिए तीन अलग-अलग स्तर देखने होंगे:

पहला—सीधा consumer impact

सरकार के मौजूदा framework के अनुसार ग्राहक से MDR सीधे नहीं लिया जाना है।

दूसरा—merchant impact

₹2,000 से ऊपर के eligible P2M transactions पर merchant-side payment cost बढ़ेगी।

तीसरा—indirect price impact

अगर कोई व्यापारी इस अतिरिक्त लागत को absorb नहीं कर पाता और अपनी pricing strategy बदलता है, तभी इसका indirect असर consumer prices पर पड़ सकता है।

इसलिए “UPI charge = महंगाई” का सीधा equation स्थापित करना तथ्यात्मक रूप से जल्दबाजी होगा। वास्तविक प्रभाव implementation और market behaviour पर निर्भर करेगा।


सरकार के सामने भी एक बड़ी चुनौती: नियम का पालन कैसे होगा?

सरकार ने merchants को MDR customer पर pass करने से रोकने की बात कही है।

लेकिन ground-level implementation अपने आप में बड़ी चुनौती होगी।

देश में लाखों merchants अलग-अलग प्रकार के businesses चलाते हैं। कुछ formal accounting systems का इस्तेमाल करते हैं, जबकि कुछ छोटे व्यापारी informal तरीके से कारोबार करते हैं।

ऐसे में सवाल उठेंगे:

  • क्या merchant customer से अतिरिक्त payment मांगेगा?

  • क्या अलग-अलग payment methods के लिए अलग price बताए जाएंगे?

  • क्या ग्राहक को शिकायत का आसान mechanism मिलेगा?

  • क्या banks और payment companies monitoring करेंगी?

  • क्या MDR को किसी दूसरे service charge के नाम पर recover करने की कोशिश होगी?

इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों में महत्वपूर्ण होंगे।


UPI ecosystem में revenue किस तरह बंटेगा?

NPCI के अनुसार MDR से प्राप्त revenue payment ecosystem के अलग-अलग participants के बीच साझा होगा, जिसमें banks, payment service providers और UPI application providers शामिल हैं।

इसका मतलब यह व्यवस्था केवल merchant से पैसा लेने की व्यवस्था नहीं है। इसका उद्देश्य payment infrastructure से जुड़े पूरे ecosystem के लिए एक revenue mechanism तैयार करना है।

यही वजह है कि इसे UPI के future business model में बड़ा structural change माना जा रहा है।


क्या इससे UPI की लोकप्रियता प्रभावित होगी?

यह अभी निश्चित रूप से कहना संभव नहीं है।

भारत में UPI की acceptance बहुत व्यापक हो चुकी है। अगस्त 2026 में 2,451 करोड़ transactions का volume इस बात को दिखाता है कि digital payments भारतीय अर्थव्यवस्था में कितनी गहराई से प्रवेश कर चुके हैं।

लेकिन high-value merchant transactions में merchant cost बढ़ने के बाद businesses अपने payment preferences, pricing और transaction practices में बदलाव करते हैं या नहीं—यह आने वाले समय में देखा जाएगा।

विशेष रूप से ₹2,000 से ऊपर की shopping, education payments, professional services, electronics, travel और अन्य relatively high-value purchases में merchant behaviour पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।


छोटे दुकानदारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात

छोटे व्यापारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण provision यह है कि P2PM category में महीने में ₹1 लाख तक UPI QR receipts वाले merchants के लिए zero MDR व्यवस्था जारी रहेगी।

इससे सरकार का उद्देश्य यह दिखता है कि वह छोटे कारोबारियों को नए payment cost structure से बचाना चाहती है।

लेकिन merchants को यह भी समझना होगा कि उनका classification कैसे होगा और उनका monthly UPI receipt threshold किस तरह calculate किया जाएगा।


क्या P2P UPI पूरी तरह सुरक्षित और मुफ्त रहेगा?

मौजूदा घोषणा के अनुसार P2P UPI transactions पर MDR नहीं लगाया जाएगा, चाहे transaction value कितनी भी हो।

साथ ही finance ministry ने कहा है कि individuals के लिए free UPI transactions पर कोई monthly quota, volume limit या tiered cap नहीं होगा।

इसका मतलब यह है कि किसी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति को पैसा भेजने के लिए इस नए MDR framework के कारण अलग transaction fee देने की जरूरत नहीं होगी।


UPI और Digital India के लिए यह बदलाव कितना महत्वपूर्ण?

UPI केवल payment method नहीं रहा है। इसने भारत के digital economy model को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है।

छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े retailers तक QR payment स्वीकार करते हैं। रिक्शा, चाय की दुकान, किराना store, restaurants, hospitals और online businesses तक UPI का इस्तेमाल व्यापक हो चुका है।

ऐसे में MDR का नया framework केवल banking industry का technical change नहीं है।

यह merchant economics, payment companies, banks, fintech platforms और consumer behaviour—सभी को प्रभावित करने वाला policy change है।


विपक्ष और आलोचकों के लिए मुद्दा क्या है?

इस फैसले को लेकर राजनीतिक और आर्थिक बहस स्वाभाविक रूप से तेज हो सकती है।

आलोचक यह सवाल उठा सकते हैं कि जिस UPI ecosystem को वर्षों तक low-cost और mass adoption के model के रूप में आगे बढ़ाया गया, उसमें बड़े merchant payments पर MDR लाने की जरूरत क्यों पड़ी।

दूसरी ओर सरकार का पक्ष है कि इतनी विशाल payment infrastructure को लगातार maintain करने के लिए sustainable financial model जरूरी है और नए charges का दायरा सीमित रखा गया है। सरकार यह भी रेखांकित कर रही है कि अधिकांश low-value transactions, P2P payments और eligible small merchants zero-MDR framework में बने रहेंगे।

इसलिए इस फैसले का मूल्यांकन केवल “चार्ज आया” या “चार्ज नहीं आया” के आधार पर नहीं, बल्कि किस transaction पर, किससे और कितनी राशि ली जा रही है, इसके आधार पर करना होगा।


आम आदमी को 15 अक्टूबर के बाद क्या याद रखना चाहिए?

सबसे जरूरी बातें सरल भाषा में:

1. ₹2,000 तक के eligible UPI merchant payments पर MDR नहीं।

2. ₹2,000 से अधिक के eligible P2M payments पर सामान्य MDR 0.4%।

3. ₹75,000 या उससे अधिक के सामान्य eligible transactions पर maximum MDR ₹300।

4. P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति UPI transfer पर कोई नया charge नहीं।

5. Railways, telecom, insurance, fuel और specified essential sectors में ₹2,000 से ऊपर flat ₹5 MDR।

6. Capital-market transactions के लिए 0.02% MDR, maximum ₹300।

7. ₹1 लाख तक monthly UPI QR receipts वाले eligible small P2PM merchants को zero MDR।

8. ग्राहक से MDR सीधे वसूलने की अनुमति नहीं है।

9. UPI apps को platform fee या hidden charge लगाने की अनुमति नहीं है।


असली परीक्षा 15 अक्टूबर के बाद होगी

UPI MDR framework पर असली तस्वीर 15 अक्टूबर 2026 के बाद सामने आएगी।

कागज पर सरकार ने consumer protection के लिए स्पष्ट व्यवस्था की है। ₹2,000 तक के payments को zero-MDR रखा गया है, P2P transactions free हैं, small merchants को protection दिया गया है और essential sectors के लिए concessional ₹5 MDR रखा गया है।

लेकिन ground reality इस बात से तय होगी कि merchants इस लागत को किस तरह absorb करते हैं, banks और payment companies नियमों को कितनी प्रभावी ढंग से लागू करती हैं और क्या consumers से किसी अप्रत्यक्ष तरीके से अतिरिक्त पैसा लेने की कोशिश होती है।

यहीं से इस policy की वास्तविक सफलता या विफलता का आकलन होगा।


निष्कर्ष:

 UPI पर “चार्ज” की खबर को समझने की जरूरत

UPI को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक बहस में “15 अक्टूबर से UPI महंगा हो जाएगा” जैसी बातें तेजी से फैल सकती हैं। लेकिन वास्तविक नियम इससे अधिक specific है।

हर UPI transaction पर charge नहीं लगाया गया है।

नया MDR framework मुख्यतः ₹2,000 से अधिक के eligible Person-to-Merchant transactions पर लागू होगा। सामान्य दर 0.4 प्रतिशत है और ₹75,000 तथा उससे ऊपर के transactions के लिए ₹300 की maximum cap है। P2P payments free रहेंगे और कई छोटे तथा low-value transactions भी zero-MDR व्यवस्था में रहेंगे। 

फिर भी यह फैसला भारतीय digital-payment ecosystem में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। UPI जिस दौर में लगभग universally accepted, frictionless और low-cost payment mechanism बन चुका है, उसमें बड़े merchant payments के लिए MDR की वापसी businesses, banks, fintech companies और consumers के बीच cost-sharing की नई बहस शुरू करती है।


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