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Ali Khamenei funeral: को अंतिम विदाई: तीन बेटे जनाज़े में पहुंचे, नए सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई की गैरमौजूदगी ने बढ़ाए सवाल

 5 जुलाई  2026 | विस्तृत विश्लेषण |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार  

तेहरान में उमड़ा जनसैलाब, लेकिन सबसे अहम चेहरा रहा नदारद

ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए रविवार को राजधानी तेहरान में लाखों लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। राजधानी के इमाम ख़ुमैनी ग्रैंड मुसल्ला में आयोजित जनाज़े की नमाज़ में ईरान की राजनीतिक, धार्मिक और सैन्य नेतृत्व की लगभग पूरी शीर्ष टीम मौजूद रही।

हालांकि इस ऐतिहासिक समारोह की सबसे बड़ी चर्चा किसी नेता की मौजूदगी नहीं, बल्कि नए सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई की अनुपस्थिति बनी रही। मार्च 2026 में अपने पिता की मृत्यु के बाद सर्वोच्च नेता का पद संभालने वाले मोजतबा ख़ामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं। उनकी गैरहाजिरी ने ईरान के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।


तीन बेटे पहुंचे, लेकिन उत्तराधिकारी नहीं

ईरानी सरकारी टेलीविजन द्वारा प्रसारित तस्वीरों में अली ख़ामेनेई के तीन बेटे—

  • मुस्तफा ख़ामेनेई
  • मैसम (मेयसाम) ख़ामेनेई
  • मसूद ख़ामेनेई

अपने पिता के ताबूत के पीछे खड़े दिखाई दिए।

काले साफे से ढके ईरानी झंडे में लिपटे ताबूत के सामने तीनों पुत्रों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह के दौरान विशेष रूप से मसूद ख़ामेनेई भावुक नजर आए। वीडियो में उन्हें अपनी आँखों से आँसू पोंछते हुए देखा गया।


ईरान का शीर्ष नेतृत्व भी रहा मौजूद

अंतिम नमाज़ में ईरान के कई प्रमुख नेता शामिल हुए, जिनमें—

  • राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान
  • संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबाफ़
  • इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ अहमद वहीदी

जैसे शीर्ष अधिकारी शामिल थे।

यह समारोह केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि ईरान की सत्ता और राजनीतिक निरंतरता का भी महत्वपूर्ण प्रदर्शन माना जा रहा है।


ताबूत के साथ रखे गए परिवार के अन्य सदस्यों के शव

अली ख़ामेनेई का ताबूत अकेला नहीं था।

उनके साथ उन चार पारिवारिक सदस्यों के ताबूत भी रखे गए, जो फरवरी 2026 में हुए हवाई हमलों में मारे गए थे।

इनमें एक 14 महीने की पोती भी शामिल थी, जिसकी मृत्यु ने पूरे ईरान में भावनात्मक माहौल बना दिया।


एक करोड़ से अधिक लोगों के शामिल होने का दावा

ईरानी प्रशासन का अनुमान है कि पूरे देश में आयोजित शोक समारोहों में एक करोड़ (10 मिलियन) से अधिक लोग हिस्सा ले सकते हैं।

सरकार ने देशभर में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है तथा कई शहरों में विशेष शोक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।


मोजतबा ख़ामेनेई आखिर कहां हैं?

सबसे बड़ा प्रश्न यही बना हुआ है।

मार्च 2026 में सर्वोच्च नेता बनने के बाद मोजतबा ख़ामेनेई न तो सार्वजनिक मंच पर दिखाई दिए हैं और न ही उन्होंने कोई सार्वजनिक भाषण दिया है।

पिछले सप्ताह आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंतिम संस्कार समिति के प्रमुख अली अकबर पूरजमशिदियान से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा—

"सर्वोच्च नेता की उपस्थिति या अनुपस्थिति पर टिप्पणी करना मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है।"

यह बयान भी अटकलों को शांत नहीं कर सका।


पत्नी के स्मृति समारोह में भी नहीं पहुंचे थे मोजतबा

दिलचस्प बात यह है कि मोजतबा ख़ामेनेई अपनी पत्नी ज़हरा हदाद-अदिल के स्मृति समारोह में भी शामिल नहीं हुए थे।

ज़हरा की भी मृत्यु उसी हमले में हुई थी जिसमें अली ख़ामेनेई मारे गए थे।

हमले में उनका किशोर पुत्र और परिवार के कई अन्य सदस्य भी मारे गए थे।


क्या गंभीर रूप से घायल हैं नए सर्वोच्च नेता?

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को ईरान में ख़ामेनेई परिवार के परिसर पर हुए संयुक्त अमेरिकी-इज़रायली हवाई हमलों में मोजतबा भी गंभीर रूप से घायल हुए थे।

सूत्रों के अनुसार उन्हें—

  • दोनों पैरों में गंभीर चोटें,
  • चेहरे पर गंभीर घाव,
  • तथा लंबे समय तक चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता

पड़ी।

हालांकि ईरानी सरकार ने अब तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।


सुरक्षा एजेंसियों ने सार्वजनिक रूप से सामने आने से रोका?

ईरान के भीतर से सामने आई कुछ रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा विशेषज्ञों ने मोजतबा को सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहने की सलाह दी है।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि ईरानी सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि यदि मोजतबा सार्वजनिक रूप से दिखाई देते हैं तो उनकी लोकेशन का पता लगाया जा सकता है और उन पर संभावित हमला हो सकता है।

इसी कारण उनके सुरक्षा सलाहकार कथित रूप से उन्हें किसी भी बड़े सार्वजनिक आयोजन में शामिल होने से रोक रहे हैं।

इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।


क्या अंतिम दफ़न में दिखाई देंगे मोजतबा?

हालांकि अभी तक मोजतबा किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में नहीं पहुंचे हैं, लेकिन कुछ रिपोर्टों में यह संभावना जताई गई है कि वे अंतिम दफ़न के समय मशहद में दिखाई दे सकते हैं।

बताया जा रहा है कि उन्होंने स्वयं अपने पिता की कब्र पर अंतिम दुआ पढ़ने की इच्छा व्यक्त की है।

फिलहाल इस संबंध में भी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।


पांच शहरों और दो देशों में चल रहा है शोक कार्यक्रम

अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार को केवल तेहरान तक सीमित नहीं रखा गया है।

पूरे कार्यक्रम को पांच शहरों और दो देशों तक विस्तारित किया गया है।

ईरान सरकार उनके पार्थिव शरीर को पड़ोसी इराक के प्रमुख शिया धार्मिक स्थलों पर भी ले जाने की योजना पर काम कर रही है, ताकि श्रद्धालु अंतिम दर्शन कर सकें।


9 जुलाई को होगा अंतिम सुपुर्द-ए-ख़ाक

सरकारी कार्यक्रम के अनुसार—

  • तेहरान में अंतिम श्रद्धांजलि,
  • विभिन्न शहरों में शोक यात्राएं,
  • धार्मिक स्थलों पर अंतिम दर्शन,

के बाद 9 जुलाई 2026 को अली ख़ामेनेई को उनके जन्मस्थान मशहद स्थित इमाम रज़ा दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया जाएगा।


राजनीतिक और रणनीतिक मायने भी कम नहीं

विश्लेषकों का मानना है कि मोजतबा ख़ामेनेई की लगातार गैरमौजूदगी केवल सुरक्षा का विषय नहीं बल्कि ईरान की आंतरिक सत्ता संरचना, उत्तराधिकार व्यवस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों से भी जुड़ी हो सकती है।

यदि वे अंतिम संस्कार के अंतिम चरण में भी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आते हैं, तो उनकी स्वास्थ्य स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अटकलें और तेज़ हो सकती हैं।

वहीं यदि वे मशहद में आयोजित अंतिम दफ़न समारोह में शामिल होते हैं, तो यह नए सर्वोच्च नेता के रूप में उनका पहला सार्वजनिक संदेश माना जाएगा।


निष्कर्ष:-

अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की विदाई केवल एक राष्ट्रीय शोक का अवसर नहीं, बल्कि ईरान की भविष्य की सत्ता, नेतृत्व और सुरक्षा व्यवस्था की दिशा तय करने वाला ऐतिहासिक क्षण भी बन गई है। जहां उनके तीन पुत्रों की मौजूदगी ने पारिवारिक एकजुटता का संदेश दिया, वहीं नए सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई की अनुपस्थिति पूरे समारोह का सबसे बड़ा प्रश्न बनी हुई है। आने वाले दिनों में मशहद में होने वाला अंतिम दफ़न समारोह इस रहस्य पर कुछ हद तक पर्दा उठा सकता है, लेकिन फिलहाल दुनिया की निगाहें ईरान के नए नेतृत्व और उसकी अगली सार्वजनिक उपस्थिति पर टिकी हुई हैं।

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