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भारत में EVM हटाने का रास्ता: पूर्ण बहिष्कार, चुनौतियां और वैकल्पिक व्यवस्था – गहन शोध एवं विश्लेषण

 संपादकीय, 16 जून 2026।विस्तृत विश्लेषण |✍🏻 Z S Razzaqi |वरिष्ठ पत्रकार 

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता राष्ट्र की नींव है। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) 2004 से पूर्ण रूप से लागू हुई और VVPAT (Voter Verifiable Paper Audit Trail) के साथ इसे और मजबूत किया गया। फिर भी, विपक्षी दलों और कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा EVM हटाने और बैलट पेपर पर लौटने की मांग लगातार उठती रही है।

उपयोगकर्ता का सुझाव है कि सभी पार्टियों को EVM से चुनाव पूर्ण बहिष्कार करके सरकार और चुनाव आयोग (ECI) पर दबाव बनाना चाहिए। यह रिपोर्ट तथ्यों, आधिकारिक दस्तावेजों, सुप्रीम कोर्ट के फैसलों, स्वतंत्र अध्ययनों और राजनीतिक संदर्भ पर आधारित है (जून 2026 तक की जानकारी)।

1. EVM की पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति

  • परिचय: EVM में Ballot Unit (BU), Control Unit (CU) और VVPAT शामिल हैं। यह बैटरी से चलने वाली स्टैंडअलोन मशीन है, इंटरनेट से कनेक्ट नहीं होती। BEL और ECIL द्वारा निर्मित।
  • लाभ (ECI और Brookings Institution अध्ययन):
    • वोटिंग दर तेज (1.5 सेकंड प्रति वोट)।
    • अमान्य वोटों में भारी कमी (पेपर बैलट में 2-5% तक अमान्य)।
    • मतगणना घंटों में पूरी, न कि दिनों में।
    • बूथ कैप्चरिंग और बलपूर्वक वोटिंग में कमी।
    • पर्यावरण अनुकूल (कागज की बचत)।
  • VVPAT: 2013 से शुरू, 2019 सुप्रीम कोर्ट आदेश के बाद 2% VVPAT स्लिप्स का मिलान अनिवार्य।

ECI का दावा: EVM tamper-proof है — कोई कोडिंग नहीं, सीलिंग, रैंडमाइजेशन, राजनीतिक दलों की मौजूदगी में चेकिंग।

2. EVM पर उठने वाले विवाद और आलोचनाएं

  • मुख्य आरोप:
    • हैकिंग/टैम्परिंग की संभावना (2010 Haldeman रिपोर्ट, Syed Shuja जैसे दावे — कई बाद में debunked)।
    • Form 17C और EVM सीरियल नंबर मिसमैच की शिकायतें (2024-2025 चुनावों में)।
    • आखिरी घंटे में वोटिंग स्पाइक, EVM मूवमेंट में संदेह।
    • विपक्षी हार के बाद आरोप बढ़ना (2009, 2019, 2024, 2025-26 राज्य चुनाव)।
  • 2025-26 विवाद: राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक ने “वोट चोरी” का आरोप लगाया। TMC, कांग्रेस आदि ने EVM टैम्परिंग के दावे किए। ECI ने सभी आरोप खारिज किए। सुप्रीम कोर्ट ने कई याचिकाएं खारिज कीं (2024-2026), कहा — “हारने पर EVM दोषी, जीतने पर नहीं”।
  • स्वतंत्र विश्लेषण: कुछ विशेषज्ञ (Haldeman, Subramanian Swamy याचिकाएं) कहते हैं कि insider access से tampering संभव। ECI का जवाब — मशीन candidate-agnostic, multiple randomization, physical seals।

3. EVM हटाने का प्रस्तावित रास्ता: पूर्ण बहिष्कार

सभी पार्टियों (BJP, कांग्रेस, क्षेत्रीय दलों) द्वारा EVM से चुनाव लड़ने से पूर्ण इनकार सबसे मजबूत दबाव का तरीका हो सकता है:

संभावित प्रभाव:

  • चुनाव स्थगित या संकट — संवैधानिक संकट पैदा।
  • जनमत और मीडिया दबाव बढ़ेगा।
  • ECI/सरकार को बैलट पेपर या हाइब्रिड सिस्टम पर विचार करने को मजबूर करेगा।
  • ऐतिहासिक उदाहरण: 1970-80 के दशक में चुनाव सुधार आंदोलनों ने बदलाव लाए।

व्यावहारिक चुनौतियां:

  • कानूनी: Representation of the People Act, 1951 के तहत EVM वैध। बहिष्कार करने वाली पार्टी पर अविश्वास प्रस्ताव या कानूनी कार्रवाई हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने बैलट पेपर पर लौटना “regression” माना।
  • राजनीतिक: BJP जैसे सत्ताधारी दल बहिष्कार नहीं करेंगे। विपक्ष अकेला पड़ेगा — “जनता से भागना” का आरोप।
  • लागत और लॉजिस्टिक्स: 90 करोड़+ मतदाता। बैलट पेपर पर लौटने से मतगणना में हफ्ते लगेंगे, अमान्य वोट बढ़ेंगे, बूथ लेवल हिंसा का खतरा।
  • जनता का विश्वास: सर्वे दिखाते हैं कि ज्यादातर मतदाता EVM को सुविधाजनक मानते हैं। बहिष्कार से लोकतंत्र की छवि खराब हो सकती है।

4. EVM हटाने या सुधार के अन्य विकल्प

पूर्ण बहिष्कार के अलावा व्यावहारिक रास्ते:

  1. 100% VVPAT मिलान: सुप्रीम कोर्ट ने 2% पर रोक लगाई, लेकिन 100% की मांग जारी। लागत बढ़ेगी, लेकिन पारदर्शिता बढ़ेगी।
  2. हाइब्रिड सिस्टम: VVPAT स्लिप voter को दें, जो खुद बॉक्स में डाले (कुछ याचिकाओं में सुझाव)।
  3. GPS/Timestamping VVPAT: 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने ECI को timestamping पर विचार करने को कहा।
  4. Paper Ballot + Technology: कुछ polling booths पर बैलट, बाकी EVM — पायलट प्रोजेक्ट।
  5. स्वतंत्र ऑडिट: विदेशी/स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा EVM कोड और हार्डवेयर की जांच (ECI विरोधी)।
  6. चुनावी सुधार: Voter list cleaning, Aadhaar linkage (विवादास्पद), campaign finance reform — EVM से ज्यादा जरूरी।

अंतरराष्ट्रीय तुलना: जर्मनी, नीदरलैंड्स ने EVM छोड़ा (संवैधानिक कारणों से)। ब्राजील, फिलीपींस अभी भी इस्तेमाल करते हैं। भारत का स्केल अनोखा है।

5. गहन विश्लेषण: क्या बहिष्कार व्यावहारिक है?

  • सकारात्मक: Unified opposition से ECI पर दबाव, जन जागरण, पारदर्शिता की बहस।
  • नकारात्मक: लोकतंत्र को कमजोर करना, विकास मुद्दों से भटकाव, कानूनी जटिलताएं। ECI की विश्वसनीयता पर सवाल पहले से उठ रहे हैं (2025 विवाद)।
  • वास्तविकता: EVM हटाना आसान नहीं। तकनीकी सुरक्षा मजबूत है, लेकिन perception of fairness कमजोर। विश्वास बहाली सबसे बड़ा मुद्दा।

संभावित समयरेखा:

  • सभी पार्टियां बहिष्कार का प्रस्ताव पास करें।
  • सुप्रीम कोर्ट/राष्ट्रपति को ज्ञापन।
  • बड़े आंदोलन + मीडिया कैंपेन।
  • लेकिन 2029 आम चुनाव तक पूर्ण बदलाव मुश्किल।

6. निष्कर्ष और सुझाव

EVM हटाने के लिए पूर्ण बहिष्कार एक радикल कदम है, जो लोकतांत्रिक दबाव पैदा कर सकता है, लेकिन इससे चुनावी प्रक्रिया ठप हो सकती है। बेहतर रास्ता सुधार है — 100% VVPAT verification, स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट, voter education और चुनावी संस्थाओं की स्वायत्तता मजबूत करना।

सिफारिशें:

  • सभी पार्टियां संयुक्त रूप से ECI से 100% VVPAT audit मांगें।
  • पायलट आधार पर कुछ राज्यों में बैलट पेपर ट्रायल।
  • डिजिटल वोटिंग (blockchain) पर R&D, लेकिन सुरक्षा पहले।
  • मतदाता जागरूकता: मुद्दों पर वोट, मशीन पर नहीं।

भारत का लोकतंत्र मजबूत है। EVM या बैलट — महत्वपूर्ण है निष्पक्षता और विश्वास। पारदर्शिता बढ़ाकर हम “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के लक्ष्य को साकार कर सकते हैं।




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