असम, 9 अप्रैल 2026।✍🏻 Z S Razzaqi | वरिष्ठ पत्रकार
यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का गणित नहीं, बल्कि असम की सामाजिक संरचना, राजनीतिक ध्रुवीकरण, आर्थिक आकांक्षाओं और पहचान की राजनीति का व्यापक जनमत संग्रह बन चुका है।
सत्ता बनाम बदलाव: असम की सबसे निर्णायक चुनावी लड़ाई
इस बार मुकाबला सीधा और स्पष्ट है—
- एक ओर भाजपा के नेतृत्व वाला NDA, जो लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने का लक्ष्य लेकर मैदान में है
- दूसरी ओर कांग्रेस, जो 2016 में खोई सत्ता को वापस पाने के लिए पूरी ताकत झोंक चुकी है
मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma इस चुनाव के सबसे बड़े चेहरे हैं। उनकी आक्रामक चुनावी रणनीति, प्रशासनिक पकड़ और विकास मॉडल इस चुनाव का केंद्रीय मुद्दा रहे।
वहीं कांग्रेस के प्रमुख नेता Gaurav Gogoi इस चुनाव को “भविष्य बचाने की लड़ाई” बताते हुए जनता से बड़े पैमाने पर मतदान की अपील करते रहे।
रिकॉर्ड मतदान: क्या कह रहे हैं आंकड़े?
मतदान प्रतिशत इस चुनाव की गंभीरता को खुद बयान करता है—
- 3 बजे तक कुल मतदान: 75.91%
- सबसे अधिक: चमरिया (कामरूप) – 84.43%
- सबसे कम: न्यू गुवाहाटी – 60.57%
- कुल मतदाता: लगभग 2.5 करोड़
- सीटें: 126
- उम्मीदवार: 722
सुबह 9 बजे तक 17.87% और 1 बजे तक 59.63% मतदान यह दिखाता है कि दिनभर मतदान की रफ्तार लगातार तेज रही।
बारिश, बादल और खराब मौसम के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ—यह अपने आप में लोकतंत्र के प्रति भरोसे का मजबूत संकेत है।
“लोकतंत्र का उत्सव”: जमीन पर कैसा रहा माहौल?
राज्य के कई जिलों—जोरहाट, कामरूप, कोकराझार, लखीमपुर—में सुबह से ही लंबी कतारें देखी गईं।
पहली बार वोट देने वाले युवाओं से लेकर 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों तक, हर वर्ग ने मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महिलाओं की बड़ी भागीदारी भी इस चुनाव की एक अहम विशेषता रही।
यह चुनाव सिर्फ राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक भागीदारी का एक बड़ा उत्सव बन गया।
बड़े चेहरे, बड़े बयान और सियासी संकेत
इस चुनाव में कई दिग्गजों ने वोट डाला और अपने-अपने दावे पेश किए—
- Himanta Biswa Sarma – तीसरी बार सत्ता में वापसी का भरोसा
- Gaurav Gogoi – “नया असम बनाने का मौका”
- Akhil Gogoi – सरकार बदलने का दावा
- Badruddin Ajmal – समर्थन की अपील
- Debabrata Saikia – विपक्ष की मजबूती का संकेत
इन बयानों से साफ है कि चुनाव केवल विकास बनाम वादों का नहीं, बल्कि विचारधाराओं और राजनीतिक नैरेटिव की टक्कर भी है।
“बसों में भरकर लाए गए वोटर?” — क्या है आरोपों का पूरा मामला
कई स्थानों से ऐसी रिपोर्ट्स सामने आईं, जिनमें दावा किया गया कि बाहरी राज्यों—खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार—से लोगों को बसों में भरकर असम लाया गया और मतदान कराया गया।
इन दावों को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो भी वायरल हुए, जिनमें कथित तौर पर बसों में बैठे लोगों से बातचीत करते हुए कुछ स्वतंत्र पत्रकारों ने यह दिखाने की कोशिश की कि वे स्थानीय मतदाता नहीं हैं।
हालांकि, इन वीडियो और दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
विपक्ष का हमला: “लोकतंत्र के साथ खिलवाड़”
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इन आरोपों को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा पर सीधा निशाना साधा है।
कांग्रेस नेता Gaurav Gogoi ने संकेतों में कहा कि “अगर चुनाव निष्पक्ष नहीं होगा, तो जनता का विश्वास टूटेगा।”
वहीं Akhil Gogoi जैसे नेताओं ने इसे “लोकतंत्र के लिए खतरा” बताया और स्वतंत्र जांच की मांग की।
विवाद, हिंसा और प्रशासनिक चुनौतियाँ
चुनाव पूरी तरह शांतिपूर्ण नहीं रहा। कई घटनाओं ने सवाल भी खड़े किए—
पोलिंग स्टेशन में वीडियो: लोकतांत्रिक मर्यादा का उल्लंघन?
करबी आंगलोंग जिले में पोलिंग बूथ के अंदर वीडियो बनाए जाने का मामला सामने आया। प्रशासन ने तुरंत FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
यह घटना चुनावी पारदर्शिता और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल उठाती है।
चुनावी हिंसा: सीमित लेकिन चिंताजनक
कुछ क्षेत्रों में झड़पों की खबरें आईं, जिसमें 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
हालांकि बड़े पैमाने पर हिंसा नहीं हुई, लेकिन ये घटनाएँ चुनावी संवेदनशीलता को दर्शाती हैं।
पोलिंग अधिकारी की मौत: रहस्य बरकरार
सोनितपुर में एक पोलिंग अधिकारी की अचानक मौत ने प्रशासन को चौकन्ना कर दिया।
प्रारंभिक रिपोर्ट्स इसे स्वास्थ्य कारणों से जोड़ती हैं, लेकिन जांच जारी है।
वोटर लिस्ट से नाम हटने का विवाद
डिमोरिया क्षेत्र में कई परिवार वोट नहीं डाल सके क्योंकि उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे।
यह मुद्दा चुनावी पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों के संदर्भ में बड़ा सवाल बन सकता है।
अंतरराष्ट्रीय नजर: वैश्विक स्तर पर सराहना
इस चुनाव में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया और मतदान प्रक्रिया का निरीक्षण किया।
उन्होंने चुनावी प्रबंधन, पारदर्शिता और मतदाताओं की भागीदारी को “उत्सव जैसा” बताया—जो भारत की लोकतांत्रिक साख को और मजबूत करता है।
बदलती राजनीति: क्या नया ट्रेंड दिख रहा है?
इस चुनाव में कुछ नए संकेत भी उभरकर सामने आए—
1. युवा निर्णायक भूमिका में
पहली बार वोट देने वाले युवाओं की संख्या और उत्साह दोनों बढ़े हैं।
2. महिलाएं बनीं चुनाव का केंद्र
महिलाओं की रिकॉर्ड भागीदारी राजनीतिक दलों के लिए बड़ा संदेश है।
3. टेक्नोलॉजी और वोटिंग पर बहस
गायक पापोन ने रिमोट वोटिंग की जरूरत उठाकर एक नई बहस छेड़ दी—क्या भविष्य में डिजिटल वोटिंग संभव है?
क्या कहता है इतना भारी मतदान?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इतना अधिक मतदान कई संभावनाओं की ओर इशारा करता है—
- सत्ता के पक्ष में मजबूत समर्थन
- या फिर बड़े बदलाव की इच्छा
- या फिर दोनों के बीच कड़ी टक्कर
असम का मतदाता इस बार “चुपचाप फैसला” करने के मूड में दिख रहा है।
अंतिम विश्लेषण: असम का फैसला, राष्ट्रीय राजनीति पर असर
असम चुनाव 2026 केवल एक राज्य का चुनाव नहीं—यह राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी एक संकेतक है।
- अगर NDA जीतता है → विकास मॉडल पर मुहर
- अगर कांग्रेस वापसी करती है → विपक्ष के लिए नई ऊर्जा
- अगर त्रिकोणीय परिणाम आता है → गठबंधन राजनीति का नया दौर
एक बात साफ है—असम ने अपना काम कर दिया है। अब बारी है नतीजों की, जो यह तय करेंगे कि राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
