Type Here to Get Search Results !

ADS5

ADS2

लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव से गरमाई संसद: विपक्ष–सरकार में तीखी टकराहट, 10 घंटे की बहस शुरू

नयी दिल्ली 10 मार्च 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार

 संसद के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को भारतीय लोकतंत्र के सबसे अहम मंच लोकसभा में एक असाधारण राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव पेश किया, जिसे आवश्यक समर्थन मिलने के बाद सदन में स्वीकार कर लिया गया।

इस प्रस्ताव के समर्थन में 50 से अधिक सांसद खड़े हुए, जिसके बाद इसे चर्चा के लिए अनुमति दे दी गई। संसद ने इस मुद्दे पर 10 घंटे की लंबी बहस तय की है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाले घंटों में संसद के भीतर राजनीतिक तापमान और बढ़ सकता है।

इस प्रस्ताव के साथ ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाज़ी शुरू हो गई है, जिसमें राहुल गांधी, गौतम गोगोई, अमित शाह और किरेन रिजिजू जैसे प्रमुख नेताओं के बीच आरोप–प्रत्यारोप तेज़ हो गए हैं।


स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव क्यों लाया गया?

विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा की कार्यवाही के दौरान स्पीकर ओम बिरला ने निष्पक्षता नहीं दिखाई और विपक्षी नेताओं को अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं दिया।

कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने सदन में औपचारिक रूप से यह प्रस्ताव पेश किया। बताया गया कि इस प्रस्ताव पर 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं

कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं, बल्कि संसद की गरिमा और संविधान की रक्षा के लिए लाया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि फरवरी में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी को 20 से अधिक बार रोका गया, जिससे विपक्ष को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला।

गोगोई ने कहा:
“लोकसभा में ऐसा माहौल बन गया है कि विपक्ष के नेता को भी बिना व्यवधान के बोलने नहीं दिया जाता। यह स्थिति लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।”


संसद में माइक्रोफोन बंद करने का आरोप

बहस के दौरान कांग्रेस ने एक और गंभीर आरोप लगाया।

गौरव गोगोई ने दावा किया कि वरिष्ठ कांग्रेस सांसद शशि थरूर जब सदन में बोल रहे थे, उस दौरान उनका माइक्रोफोन बंद कर दिया गया

हालांकि सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष मुद्दे से भटककर राजनीतिक नाटक कर रहा है।


किरेन रिजिजू का पलटवार: “स्पीकर की अनुमति के बिना कोई नहीं बोल सकता”

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों पर कड़ा जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही स्पष्ट नियमों के तहत चलती है और स्पीकर की अनुमति के बिना कोई भी सदस्य बोल नहीं सकता, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, विपक्ष का नेता हो या कोई अन्य सांसद।

रिजिजू ने कहा:
“संसद में बोलने के लिए हर सदस्य को स्पीकर की अनुमति चाहिए। यह नियम सभी पर समान रूप से लागू होता है।”


अमित शाह का विपक्ष पर तीखा हमला

इस बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह भी सीधे मैदान में उतर आए।

उन्होंने विपक्ष को “गैर-जिम्मेदार” बताते हुए कहा कि संसद के इतिहास में ऐसा विपक्ष पहले कभी नहीं देखा गया।

अमित शाह ने कहा:
“यह सही है कि संसदीय कार्य मंत्री ने कई बार हस्तक्षेप किया है, लेकिन हमने इतना गैर-जिम्मेदार विपक्ष पहले कभी नहीं देखा।”

उनका यह बयान सदन में और ज्यादा राजनीतिक तनाव का कारण बन गया।


अमेरिका के बयान पर भी घमासान

संसद में बहस के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा भी उठाया।

उन्होंने अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के उस बयान पर सरकार को घेरा जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की “अनुमति” दी है

गोगोई ने सवाल उठाया कि क्या भारत जैसे बड़े देश को अपनी ऊर्जा नीति तय करने के लिए किसी दूसरे देश की अनुमति की जरूरत है।


संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन

संसद के अंदर ही नहीं, बाहर भी राजनीतिक हलचल तेज़ रही।

समाजवादी पार्टी का “आलू प्रदर्शन”

समाजवादी पार्टी के सांसदों ने डिंपल यादव के नेतृत्व में संसद परिसर में “आलू प्रदर्शन” किया।

वे आलू लेकर संसद पहुंचे और नारे लगाए:
“आलू का उचित मूल्य दिलाओ, किसानों को यूँ न सताओ।”

इस प्रदर्शन के जरिए किसानों को फसल का उचित दाम दिलाने की मांग उठाई गई।


शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष को घेरा

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जब किसानों से जुड़े सवालों का जवाब दिया जा रहा था, तब विपक्ष लगातार नारेबाजी कर रहा था।

उन्होंने कहा:
“देश और किसान दोनों महत्वपूर्ण मुद्दों को सुनना चाहते हैं, लेकिन विपक्ष ऐसा होने नहीं देना चाहता।”


संवैधानिक बहस: स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल

इस पूरे विवाद के बीच विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले नाबम रेबिया बनाम डिप्टी स्पीकर का हवाला दिया।

इस फैसले में कहा गया था कि स्पीकर को अपने पद पर रहते हुए पूर्ण निष्पक्षता, उच्च स्तर की स्वतंत्रता और न्यायपूर्ण व्यवहार बनाए रखना चाहिए।

विपक्ष का तर्क है कि लोकसभा स्पीकर से भी इसी संवैधानिक मानक की अपेक्षा की जाती है।


आगे क्या होगा?

अब संसद में अगले कई घंटों तक इस प्रस्ताव पर चर्चा जारी रहेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बहस केवल एक संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक खाई का प्रतीक बन गई है।

भले ही संख्याबल के लिहाज से सरकार मजबूत स्थिति में दिखाई देती हो, लेकिन इस प्रस्ताव ने संसद के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, विपक्ष की भूमिका और स्पीकर की निष्पक्षता जैसे अहम सवालों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।


निष्कर्ष:-

लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव का स्वीकार होना भारतीय संसदीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना है। इससे यह स्पष्ट होता है कि देश की राजनीति अब केवल नीतिगत बहस तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका और पारदर्शिता भी बड़े राजनीतिक मुद्दे बन चुके हैं।

आने वाले घंटों में यह बहस न केवल संसद की दिशा तय करेगी, बल्कि देश की राजनीति में भी दूरगामी प्रभाव छोड़ सकती है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

ADS3

ADS4