9 मार्च 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार
मध्य पूर्व में चल रहा युद्ध अब वैश्विक संकट का रूप लेता जा रहा है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर लगातार किए जा रहे हमलों के बीच तेहरान ने गंभीर आरोप लगाया है कि इस युद्ध का असली उद्देश्य ईरान को कमजोर करना, उसे विभाजित करना और उसके विशाल तेल भंडार पर कब्ज़ा करना है।इसी बीच ईरान की राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा ख़ामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता घोषित किया गया है। ईरान की सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने उन्हें निष्ठा की शपथ भी दिलाई है।
मिसाइल हमलों, ड्रोन अटैक और तेल ठिकानों पर बमबारी के बीच पूरे मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित कर रहा है।
तेहरान और क़ुम में धमाके, तेल ठिकानों पर हमले
इज़राइल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के तहत ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
तेहरान और पवित्र शहर क़ुम में कई विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं।
इज़राइली हमलों के बाद ईरान के तेल प्रतिष्ठानों में लगी आग से राजधानी तेहरान के ऊपर जहरीला धुआं फैल गया, जिससे पर्यावरण और नागरिक सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
तेल उद्योग ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, इसलिए इन ठिकानों को निशाना बनाना रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बहरीन पर ईरानी ड्रोन हमला, 32 लोग घायल
अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार बहरीन में हुए विस्फोट किसी मिसफायर पैट्रियट मिसाइल की वजह से नहीं बल्कि ईरान द्वारा भेजे गए आत्मघाती ड्रोन के कारण हुए।
इस हमले में कम से कम 32 लोग घायल हुए हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं।
अमेरिका ने रूसी और ईरानी मीडिया में चल रही उन रिपोर्टों को झूठा बताया है जिनमें कहा गया था कि अमेरिकी रक्षा प्रणाली की गलती से यह हादसा हुआ।
क़तर ने 17 बैलिस्टिक मिसाइलें मार गिराईं
क़तर के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि ईरान की ओर से दागी गई 17 बैलिस्टिक मिसाइलों और 6 ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया गया।
इन मिसाइलों को राजधानी दोहा की ओर आते हुए रोका गया।
हालांकि इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
इस घटना के बाद खाड़ी क्षेत्र के लगभग सभी देशों ने अपनी वायु रक्षा प्रणालियों को उच्चतम सतर्कता पर रखा है।
नाटो ने तुर्किये की ओर जा रही मिसाइल रोकी
नाटो ने पुष्टि की है कि तुर्किये की ओर बढ़ रही एक मिसाइल को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया गया।
नाटो के प्रवक्ता ने कहा कि संगठन अपने सभी सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी खतरे का सामना करने के लिए तत्पर रहेगा।
यह घटना बताती है कि युद्ध का प्रभाव अब पूरे क्षेत्र में फैल चुका है।
वैश्विक तेल बाजार में भूचाल, कीमत 119 डॉलर पार
ईरान युद्ध का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है।
तेल की कीमतें अचानक बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं।
G7 देशों की आपात बैठक में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने सुझाव दिया है कि सदस्य देश अपने आपातकालीन तेल भंडार को जारी करें ताकि बाजार को स्थिर किया जा सके।
अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
रूस और चीन की भूमिका पर बढ़ी निगाहें
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और चीन सीधे युद्ध में शामिल नहीं होना चाहते, लेकिन वे पर्दे के पीछे ईरान को समर्थन दे सकते हैं।
मॉस्को और बीजिंग दोनों ही इस संघर्ष को बढ़ने से रोकना चाहते हैं, लेकिन अगर ईरान लंबे समय तक युद्ध में टिकता है तो उसे कूटनीतिक और तकनीकी मदद मिल सकती है।
यह स्थिति वैश्विक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है।
यूरोप और ब्रिटेन में आर्थिक संकट की आशंका
युद्ध का असर यूरोप की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है।
ब्रिटेन के शेयर बाजार FTSE-100 में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि जर्मनी का DAX इंडेक्स भी 2.3 प्रतिशत तक गिर गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर युद्ध लंबा चला तो दुनिया में महंगाई की नई लहर आ सकती है।
हालांकि नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री फिलिप अगियोन का मानना है कि यह संकट 2008 जैसी वैश्विक आर्थिक तबाही नहीं लाएगा, लेकिन वैश्विक विकास दर जरूर धीमी हो सकती है।
लेबनान ने युद्धविराम की अपील की
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इज़राइल के साथ पूर्ण युद्धविराम की अपील की है।
उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि लेबनान की सेना देश के संवेदनशील इलाकों का नियंत्रण संभालेगी और सभी गैर-राज्य हथियारों को जब्त किया जाएगा।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस योजना को लागू करने में मदद की भी मांग की है।
क्या यह “करो या मरो” की लड़ाई बन चुकी है?
किंग्स कॉलेज लंदन के अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ रॉब गीस्ट पिनफोल्ड के अनुसार यह संघर्ष ईरान के लिए अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है।
उनका कहना है कि ईरान अब पारंपरिक युद्ध रणनीति छोड़कर पूरे क्षेत्र में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा है ताकि अमेरिका और उसके सहयोगी युद्धविराम के लिए मजबूर हो जाएं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह रणनीति बेहद जोखिम भरी है लेकिन ईरान इसे अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी मान रहा है।
निष्कर्ष:-
दुनिया एक नए भू-राजनीतिक युग के मुहाने पर
ईरान-अमेरिका-इज़राइल संघर्ष केवल एक क्षेत्रीय युद्ध नहीं रह गया है।
इसने ऊर्जा बाजार, वैश्विक अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सैन्य गठबंधनों को गहराई से प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका प्रभाव दुनिया के हर देश पर पड़ सकता है — तेल की कीमतों से लेकर महंगाई और वैश्विक सुरक्षा तक।
फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें तेहरान, वॉशिंगटन और तेल अवीव पर टिकी हुई हैं, जहां लिए जा रहे फैसले आने वाले समय की विश्व व्यवस्था तय कर सकते हैं।
