नई दिल्ली | 4 मार्च 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार
ईरान की राजनीति में एक ऐतिहासिक और बेहद संवेदनशील मोड़ आ गया है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, Mojtaba Hosseini Khamenei को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया है। यह फैसला उस समय आया है जब उनके पिता और लंबे समय तक ईरान का नेतृत्व करने वाले Ayatollah Ali Khamenei की संयुक्त अमेरिकी-इज़राइली हमलों में मृत्यु हो गई।
यह घटनाक्रम न केवल ईरान की आंतरिक राजनीति को झकझोरता है, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व में शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।
36 वर्षों का शासन और अचानक अंत
अयातुल्ला अली खामेनेई ने 36 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में शासन किया। 28 फरवरी को कथित रूप से ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए संयुक्त सैन्य हमलों में उनकी मौत हो गई। रिपोर्टों के अनुसार, हमले के समय वे अपने सुरक्षित परिसर (कंपाउंड) में मौजूद थे।
इन हमलों में उनके परिवार के कई सदस्य—उनकी बेटी, दामाद और पोती—भी मारे गए। उनकी पत्नी मंसूरेह खोजस्तेह बाघेरज़ादेह ने गंभीर चोटों के कारण बाद में दम तोड़ दिया।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने घोषणा की है कि खामेनेई को पवित्र शहर Mashhad में दफनाया जाएगा, जबकि तेहरान में एक विशाल विदाई समारोह आयोजित किया जाएगा। दफन की तिथि अभी घोषित नहीं की गई है।
कैसे हुआ उत्तराधिकारी का चयन?
ईरान में सुप्रीम लीडर का चयन सीधे जनता द्वारा नहीं किया जाता, बल्कि यह प्रक्रिया Assembly of Experts के माध्यम से होती है—जो वरिष्ठ इस्लामी विद्वानों की एक शक्तिशाली संस्था है।
रिपोर्टों के अनुसार, इसी संस्था ने मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना। हालांकि अली खामेनेई ने सार्वजनिक रूप से किसी उत्तराधिकारी की घोषणा नहीं की थी, लेकिन राजनीतिक गलियारों में मोजतबा का नाम लंबे समय से संभावित उत्तराधिकारी के रूप में चर्चा में था।
खामेनेई की मृत्यु के बाद अंतरिम रूप से तीन सदस्यीय नेतृत्व परिषद ने जिम्मेदारी संभाली थी, जिसमें शामिल थे:
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अयातुल्ला अलीरेज़ा अराफी
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राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian
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मुख्य न्यायाधीश Gholamhossein Mohseni Ejei
अब स्थायी सुप्रीम लीडर के रूप में मोजतबा की नियुक्ति के साथ यह अंतरिम व्यवस्था समाप्त हो गई है।
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और बढ़ता युद्ध
संयुक्त अमेरिकी-इज़राइली हमलों को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया गया। यह कार्रवाई कथित रूप से रुकी हुई परमाणु वार्ताओं और तेहरान द्वारा परमाणु गतिविधियाँ दोबारा शुरू करने के दावों के बाद की गई।
हमलों में राजधानी Tehran सहित कई बड़े शहरों को निशाना बनाया गया। रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों में 700 से अधिक लोगों की मौत हुई।
इसके कुछ ही घंटों बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए मिसाइलें दागीं, जिनमें से कई खाड़ी क्षेत्र—दुबई, अबू धाबी, कतर और बहरीन—में गिरीं। इससे मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर पहुँच गया।
अमेरिका की चेतावनी और क्षेत्रीय विस्तार
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि अब बातचीत के जरिए “युद्ध से बचने” में बहुत देर हो चुकी है। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने दुबई स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर ड्रोन हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं।
ड्रोन और मिसाइल हमलों ने खाड़ी देशों में तेल प्रतिष्ठानों और अमेरिकी दूतावासों को भी निशाना बनाया। इसी बीच इज़राइल ने लेबनान में अपने सैन्य अभियान को और गहरा किया, जहाँ तेहरान समर्थित संगठन Hezbollah सक्रिय हो गया।
क्या मोजतबा खामेनेई का नेतृत्व स्थिरता ला पाएगा?
मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ हैं। आलोचकों का कहना है कि यह “वंशवादी सत्ता हस्तांतरण” जैसा प्रतीत होता है, जबकि समर्थकों का तर्क है कि मौजूदा संकट के समय निरंतरता और वैचारिक स्थिरता आवश्यक है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि उनके सामने तीन बड़ी चुनौतियाँ होंगी:
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आंतरिक राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना
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पश्चिमी देशों के साथ टकराव को नियंत्रित करना
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क्षेत्रीय सहयोगियों और विरोधियों के बीच शक्ति संतुलन साधना
निष्कर्ष:
मध्य-पूर्व का भविष्य किस दिशा में?
अली खामेनेई की मृत्यु और मोजतबा खामेनेई का उदय, दोनों मिलकर मध्य-पूर्व की राजनीति को एक नए दौर में ले जा सकते हैं। यह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि रणनीतिक, धार्मिक और भू-राजनीतिक समीकरणों का पुनर्गठन भी है।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या ईरान वार्ता की राह चुनता है या क्षेत्रीय संघर्ष और गहराता है।
