2 मार्च 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार
1. पृष्ठभूमि: युद्ध का संक्षिप्त इतिहास
- 2025 का 12-दिन का युद्ध (जून 2025): इजराइल ने ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमले किए, अमेरिका ने तीन मुख्य साइट्स को बमबारी की। ईरान ने जवाब में 500+ मिसाइल्स दागीं। युद्ध सीजफायर से खत्म हुआ, लेकिन कोई स्थाई समाधान नहीं निकला।
- 2026 का हमला (ऑपरेशन एपिक फ्यूरी): 1 मार्च 2026 से शुरू, अमेरिका-इजराइल ने ईरान के सैन्य, न्यूक्लियर और गवर्नमेंट टारगेट्स पर बड़े हमले किए। खामेनेई की मौत स्कूल पर हमले में हुई। ईरान ने जवाब में इजराइल, अमेरिकी बेस और खाड़ी देशों पर मिसाइल्स दागीं। अभी युद्ध जारी है, लेकिन 2 दिनों में भारी नुकसान हो चुका है।
यह युद्ध मुख्य रूप से ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम, क्षेत्रीय प्रभाव और संसाधनों (तेल) पर केंद्रित है। ईरान का दावा है कि उसके प्रोग्राम शांतिपूर्ण हैं, लेकिन अमेरिका-इजराइल इसे खतरा मानते हैं।
2. मानवीय नुकसान: मौतें और घायल
युद्ध में सिविलियन सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। अब तक के अनुमानित आंकड़े:
- ईरान का नुकसान:
- 2025 युद्ध: 610+ सिविलियन मारे गए, 4,700+ घायल। 30+ सीनियर कमांडर्स और दर्जनों साइंटिस्ट्स मारे गए। IRGC (रिवोल्यूशनरी गार्ड्स) को भारी झटका।
- 2026 हमले: 201 मारे गए (अधिकांश सिविलियन), 747 घायल (अल जजीरा और ईरानी रेड क्रिसेंट)। एक स्कूल पर हमले में 150 मौतें (HRANA)। कुल 133+ सिविलियन मारे गए, 200+ घायल (CNN)। ईरान की स्वास्थ्य मंत्रालय ने 200+ मौतें और 700+ घायल रिपोर्ट कीं।
- कुल प्रभाव: ईरान को सबसे ज्यादा मानवीय नुकसान। सिविलियन टारगेट्स (स्कूल, शहर) पर हमलों से आम लोग प्रभावित। 48+ ईरानी लीडर्स मारे गए (ट्रंप का दावा)।
- इजराइल का नुकसान:
- 2025 युद्ध: 29 मारे गए, 3,238 घायल (28 गंभीर), 9,000+ विस्थापित। ईरान की मिसाइल्स से 40+ बिल्डिंग्स क्षतिग्रस्त।
- 2026 हमले: 9 मारे गए, 121 घायल (अल जजीरा)। तेल अवीव में रेजिडेंशियल ब्लॉक पर हमले से 1 महिला मारी गई, दर्जनों घायल। बीत शेमेश में सिनागॉग पर हमले से 9 मौतें (टाइम्स ऑफ इजराइल)।
- कुल प्रभाव: इजराइल की उन्नत डिफेंस (आयरन डोम) ने ज्यादा मौतें रोकीं, लेकिन सिविलियन डैमेज बढ़ा।
- अमेरिका का नुकसान:
- 3 सैनिक मारे गए, 5 गंभीर रूप से घायल (CENTCOM)। कई अन्य मामूली चोटें। यह पहली अमेरिकी मौतें ऑपरेशन में।
- अन्य देश:
- UAE: 3 मारे गए, 58 घायल (गार्जियन)।
- खाड़ी देश (बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, कतर): हमलों में क्षति, लेकिन स्पेसिफिक मौतें रिपोर्ट नहीं।
- कुल: ईरान को सबसे ज्यादा मानवीय नुकसान (800+ मौतें दोनों फेज में), इजराइल को कम लेकिन स्ट्रक्चरल डैमेज।
3. आर्थिक नुकसान: बिलियन्स में डैमेज
युद्ध आर्थिक रूप से विनाशकारी रहा:
- ईरान का नुकसान:
- इकोनॉमी पहले से सैंक्शंस से कमजोर। 2026 हमलों से इंटरनेट ब्लैकआउट ने GDP को 5-10% घटाया (मेड रिपोर्ट)। रियाल 1.5 मिलियन/USD पर, -45% YoY गिरावट। इन्फ्लेशन 52%, GDP $357 बिलियन (2025 से 10-15% कम)। 51% ऑयल रेवेन्यू सिक्योरिटी पर खर्च। अगर हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होता तो वैश्विक तेल 115$/बैरल पर पहुंच जाता (ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स)।
- 2025 युद्ध से न्यूक्लियर साइट्स डैमेज, लेकिन स्टॉकपाइल बचा। कुल नुकसान: $100 बिलियन+ (अनुमानित, इकोनॉमिक रिकवरी रुक गई)।
- इजराइल का नुकसान:
- 2025 युद्ध: $1.47 बिलियन प्रॉपर्टी डैमेज, कुल $6 बिलियन। GDP 3.6% से 2% पर गिरा (J.P. Morgan)। 35% बिजनेस को 50% रेवेन्यू लॉस। 2026 में रिबिल्डिंग के लिए NIS 17.5 बिलियन ($5.25 बिलियन) बजट। 45,000+ क्लेम्स से NIS 5 बिलियन ($1.47 बिलियन) डैमेज।
- कुल: $56 बिलियन+ (अल जजीरा 2024 गाजा युद्ध से, लेकिन ईरान युद्ध ने बढ़ाया)। इकोनॉमी रिकवर कर रही, लेकिन पब्लिक एक्जॉस्टेड।
- अमेरिका का नुकसान:
- सैन्य खर्च $10 बिलियन+ (अनुमानित)। लेकिन इकोनॉमिक इम्पैक्ट कम, क्योंकि मुख्य रूप से सपोर्टिंग रोल। अगर युद्ध लंबा तो ऑयल प्राइस बढ़ने से इन्फ्लेशन।
- वैश्विक प्रभाव: तेल प्राइस बढ़ने से भारत जैसे देशों को झटका। ईरान की 3.3 मिलियन बैरल/दिन प्रोडक्शन रुक सकती है।
4. सैन्य और रणनीतिक नुकसान
- ईरान: न्यूक्लियर प्रोग्राम डैमेज (3 साइट्स बमबारी), IRGC को झटका (600+ मौतें)। लेकिन मिसाइल क्षमता बची – 500+ मिसाइल्स दागीं। रेजिम सर्वाइवल खतरे में।
- इजराइल: डिफेंस सिस्टम ने 90% मिसाइल्स रोकीं, लेकिन 40+ हिट्स से डैमेज। सैन्य सुपीरियरिटी बनी रही।
- अमेरिका: 3 मौतें, लेकिन क्षेत्रीय बेस सुरक्षित। ईरान के काउंटरअटैक से प्रेशर बढ़ा।
5. निष्कर्ष:-
ईरान को सबसे ज्यादा नुकसान, लेकिन युद्ध जारी
ईरान को मानवीय (800+ मौतें), आर्थिक ($100B+) और रणनीतिक (न्यूक्लियर डैमेज) सबसे ज्यादा नुकसान। इजराइल को डैमेज ($60B+), लेकिन अमेरिकी सपोर्ट से मजबूत। युद्ध अगर लंबा चला तो वैश्विक इकोनॉमी को झटका, तेल संकट। इंसानियत की जंग में कोई जीतता नहीं – सिर्फ हार होती है। आगे क्या? अगर ईरान स्ट्रेट बंद करता तो वैश्विक संकट।
