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UGC Notifies New 2026 Regulations: उच्च शिक्षा परिसरों में जातिगत भेदभाव पर सख्ती: UGC के नए नियम 2026 लागू

 नई दिल्ली |13 जनवरी 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi |वरिष्ठ पत्रकार    

OBC को भी मिला संरक्षण, फर्जी शिकायतों वाला प्रावधान हटाया गया

देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त जातिगत भेदभाव पर लगाम लगाने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक अहम और दूरगामी कदम उठाया है। आयोग ने “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता के संवर्धन” से जुड़े नए नियम—UGC Regulations 2026—अधिसूचित कर दिए हैं, जिनका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सामाजिक न्याय, समान अवसर और मानवीय गरिमा की रक्षा सुनिश्चित करना है।

ये नए नियम वर्ष 2012 से लागू पुराने एंटी-डिस्क्रिमिनेशन रेगुलेशंस का अपडेटेड और संशोधित संस्करण हैं, जिन्हें मंगलवार, 14 जनवरी 2026 को आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया गया।


ड्राफ्ट से फाइनल तक: आलोचनाओं के बाद बदला गया रुख

UGC ने इन नियमों का एक ड्राफ्ट संस्करण फरवरी 2025 में सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया था, लेकिन उस मसौदे को लेकर शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और छात्र समूहों की ओर से तीखी आलोचना हुई थी।

मुख्य आपत्तियाँ थीं—

  • OBC समुदाय को जातिगत भेदभाव की परिभाषा से बाहर रखा जाना

  • भेदभाव की परिभाषा का अस्पष्ट और सीमित होना

  • “फर्जी शिकायतों को हतोत्साहित करने” के नाम पर जुर्माने का प्रस्ताव

इन आलोचनाओं के बाद UGC ने अंतिम अधिसूचित नियमों में कई अहम बदलाव किए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आयोग ने सामाजिक सरोकारों को गंभीरता से लिया।


OBC को मिला स्पष्ट संरक्षण, फर्जी शिकायत वाला प्रावधान हटाया गया

नए नियमों में अब अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को भी स्पष्ट रूप से “जाति-आधारित भेदभाव” के दायरे में शामिल कर लिया गया है

UGC के अनुसार,

“जातिगत भेदभाव का अर्थ केवल जाति या जनजाति के आधार पर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के सदस्यों के साथ किया गया भेदभाव होगा।”

इसके साथ ही, ड्राफ्ट में शामिल वह विवादास्पद प्रावधान भी पूरी तरह हटा दिया गया है, जिसमें कथित “झूठी शिकायतों” पर जुर्माने की बात कही गई थी।


भेदभाव की परिभाषा का विस्तार, 2012 के नियमों से आंशिक प्रेरणा

UGC ने भेदभाव की परिभाषा को पहले की तुलना में अधिक व्यापक और समावेशी बनाने की कोशिश की है।

नए नियमों के अनुसार,

“भेदभाव का अर्थ किसी भी हितधारक के साथ धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म-स्थान, दिव्यांगता या इनमें से किसी भी आधार पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किया गया अनुचित, पक्षपातपूर्ण या असमान व्यवहार होगा।”

इसके अलावा, 2012 के नियमों से प्रेरित भाषा जोड़ते हुए कहा गया है कि—

  • कोई भी ऐसा भेदभाव

  • जो शिक्षा में समानता को निष्प्रभावी करता हो

  • या मानवीय गरिमा के प्रतिकूल शर्तें थोपता हो

वह भी भेदभाव की श्रेणी में आएगा।

हालाँकि, 2012 के नियमों में मौजूद कुछ विशिष्ट उदाहरण और स्पष्ट निषेध—जैसे अलग-अलग जातियों के लिए अलग शैक्षणिक व्यवस्था—नए नियमों में सीधे तौर पर शामिल नहीं किए गए हैं।


हर संस्थान में अनिवार्य होंगे Equal Opportunity Centres (EOC)

नए नियमों का एक अहम स्तंभ है—हर उच्च शिक्षा संस्थान में “इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर (EOC)” की स्थापना

इन केंद्रों का उद्देश्य होगा—

  • शिक्षा परिसरों में समान अवसर को बढ़ावा देना

  • सामाजिक समावेशन को मजबूत करना

  • भेदभाव से जुड़ी शिकायतों और नीतिगत पहलुओं पर काम करना

Equity Committee का गठन अनिवार्य

EOC के अंतर्गत एक इक्विटी कमेटी बनाई जाएगी—

  • जिसकी अध्यक्षता संस्थान के प्रमुख (VC/प्राचार्य) करेंगे

  • जिसमें SC, ST, OBC, दिव्यांगजन और महिलाओं का प्रतिनिधित्व अनिवार्य होगा

इक्विटी कमेटी को—

  • साल में कम से कम दो बैठकें करनी होंगी

  • और संस्थान में समानता से जुड़े मामलों की नियमित समीक्षा करनी होगी


रिपोर्टिंग और निगरानी व्यवस्था होगी सख्त

  • EOC को हर छह महीने में अपनी कार्य-प्रगति रिपोर्ट तैयार करनी होगी

  • हर संस्थान को वार्षिक रिपोर्ट UGC को सौंपनी होगी, जिसका आयोग स्तर पर मूल्यांकन किया जाएगा

इसके अलावा, UGC एक राष्ट्रीय स्तर की निगरानी समिति भी गठित करेगा—

  • जिसमें वैधानिक परिषदों

  • आयोगों

  • और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधि शामिल होंगे

यह समिति—

  • साल में कम से कम दो बार बैठक करेगी

  • नियमों के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगी

  • और भेदभाव की घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव देगी


संस्थान प्रमुख की जिम्मेदारी तय, सख्त दंड का प्रावधान

नए नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि—

  • भेदभाव का उन्मूलन

  • समानता का संवर्धन

  • और नियमों का अनुपालन

ये सभी जिम्मेदारियाँ सीधे तौर पर संस्थान प्रमुख की होंगी।

नियमों की अनदेखी पर कड़ी कार्रवाई

यदि कोई उच्च शिक्षा संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता, तो उस पर—

  • UGC की योजनाओं से वंचित किया जा सकता है

  • डिग्री, डिस्टेंस या ऑनलाइन प्रोग्राम चलाने से रोका जा सकता है

  • और यहाँ तक कि UGC की मान्यता सूची से हटाया भी जा सकता है


निष्कर्ष:-

 सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

UGC के नए नियम 2026 यह संकेत देते हैं कि उच्च शिक्षा केवल अकादमिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का क्षेत्र भी है
OBC को शामिल करना, फर्जी शिकायतों वाला प्रावधान हटाना और निगरानी तंत्र को मजबूत करना—ये सभी बदलाव नियमों को अधिक न्यायसंगत और व्यावहारिक बनाते हैं

हालाँकि, यह देखना अभी बाकी है कि इन नियमों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी क्रियान्वयन हो पाता है, लेकिन नीति स्तर पर यह कदम निश्चित रूप से समानता और गरिमा आधारित शिक्षा व्यवस्था की ओर एक मजबूत प्रयास माना जा सकता है।

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