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अमेरिका–वेनेज़ुएला टकराव: ट्रंप का बड़ा ऐलान, 5 करोड़ बैरल तक तेल अमेरिका को सौंपेगा वेनेज़ुएला

 7 जनवरी 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार    

वैश्विक राजनीति में तेल की वापसी, कूटनीति नहीं बल्कि ताक़त की भाषा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला संकट को एक नया और बेहद विवादास्पद मोड़ देते हुए दावा किया है कि वेनेज़ुएला अब अमेरिका को 30 से 50 मिलियन बैरल कच्चा तेल सौंपेगा। यह ऐलान ऐसे समय पर आया है, जब कुछ ही दिन पहले अमेरिका ने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लेने की सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया।

ट्रंप का कहना है कि इस तेल को अमेरिका बेचेगा और उससे होने वाली आय “वेनेज़ुएला की जनता और अमेरिकी हितों” के लिए इस्तेमाल की जाएगी। हालांकि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इस दावे को मानवीय कम और रणनीतिक दबाव की राजनीति अधिक मान रहे हैं।


मादुरो की गिरफ्तारी और ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व’

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और सेना द्वारा की गई इस कार्रवाई को ट्रंप प्रशासन ने “रणनीतिक रूप से शानदार और निर्दोष” करार दिया है। अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने इसे राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश का “पूर्ण और सफल क्रियान्वयन” बताया।

मादुरो और उनकी पत्नी को फिलहाल न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है—एक ऐसी जेल, जिसकी बदहाली को लेकर खुद अमेरिकी न्यायाधीश भी सवाल उठा चुके हैं।


तेल की मात्रा छोटी, संदेश बहुत बड़ा

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, 50 मिलियन बैरल तेल अमेरिका की कुल खपत के सामने बेहद कम मात्रा है। अमेरिका रोज़ाना लगभग 20 मिलियन बैरल तेल की खपत करता है, यानी यह आपूर्ति केवल कुछ दिनों की जरूरत पूरी कर सकती है।

इसके बावजूद जानकारों का कहना है कि यह कदम आर्थिक से ज्यादा राजनीतिक और भू-रणनीतिक संकेत है। खासकर चीन के लिए।


चीन पर अप्रत्यक्ष प्रहार?

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम सीधे तौर पर चीन को संदेश देने के लिए है, क्योंकि वेनेज़ुएला के तेल का बड़ा खरीदार चीन रहा है। अगर यह तेल अमेरिका के नियंत्रण में जाता है, तो चीन को वैकल्पिक आपूर्ति ढूंढनी होगी।

ऊर्जा बाज़ार विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अमेरिकी रिफाइनरियों को भारी, खट्टे कच्चे तेल की आपूर्ति मिल सकती है, जो अमेरिका खुद पर्याप्त मात्रा में पैदा नहीं करता।


अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई, तेल टैंकर जब्त

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका ने अटलांटिक महासागर में एक वेनेज़ुएला से जुड़े तेल टैंकर M/V Bella 1 (Marinera) को जब्त कर लिया है। अमेरिकी सेना का दावा है कि यह जहाज अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था।

इस टैंकर को बचाने के लिए रूस द्वारा नौसैनिक जहाज़ और यहां तक कि एक पनडुब्बी भेजे जाने की खबरें भी सामने आईं, जिससे मामला और ज्यादा अंतरराष्ट्रीय हो गया।


लैटिन अमेरिका में गुस्सा, ब्राज़ील और स्पेन की प्रतिक्रिया

ब्राज़ील ने अमेरिका की इस कार्रवाई को “अस्वीकार्य” बताते हुए कहा कि किसी संप्रभु देश के राष्ट्रपति का अपहरण अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है।

स्पेन ने हालांकि संतुलित रुख अपनाते हुए कहा है कि वह वेनेज़ुएला की नई अंतरिम सरकार और विपक्ष—दोनों के संपर्क में है और वहां मौजूद स्पेनिश कंपनियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।


वेनेज़ुएला में शोक और आक्रोश

वेनेज़ुएला सरकार ने अमेरिकी हमलों में मारे गए सैनिकों की याद में सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। क्यूबा ने भी दावा किया है कि उसके 30 से अधिक सैनिक इस कार्रवाई में मारे गए।

देश के भीतर महिलाओं की रैलियाँ और मादुरो समर्थकों के प्रदर्शन इस बात का संकेत हैं कि संकट केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं रहेगा।


क्या यह अंतरराष्ट्रीय कानून का नया उल्लंघन है?

अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों का मानना है कि किसी देश के प्राकृतिक संसाधनों पर इस तरह दावा करना, वह भी सैन्य दबाव के साथ, खतरनाक वैश्विक मिसाल बन सकता है।

यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह कदम “मानवाधिकार” के नाम पर नव-औपनिवेशिक हस्तक्षेप की वापसी है।


निष्कर्ष:-

 तेल, सत्ता और नई विश्व व्यवस्था

वेनेज़ुएला संकट अब केवल एक देश की आंतरिक राजनीति नहीं रहा। यह मामला तेल, शक्ति संतुलन, चीन-अमेरिका प्रतिद्वंद्विता और अंतरराष्ट्रीय कानून—सबका संगम बन चुका है।

डोनाल्ड ट्रंप का यह फैसला आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति को किस दिशा में ले जाएगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि तेल की राजनीति एक बार फिर दुनिया के केंद्र में लौट आई है

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