नई दिल्ली | 20 जनवरी 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi |वरिष्ठ पत्रकार
एक ओर बोर्ड परीक्षा के लंबे सिलेबस और तीन घंटे की लिखित परीक्षा, दूसरी ओर सीयूईटी का एक घंटे का हाई-प्रेशर, मल्टी-सब्जेक्ट एंट्रेंस टेस्ट। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि छात्र क्या पढ़ें, कैसे पढ़ें और किस परीक्षा को प्राथमिकता दें।
सीयूईटी: अब कॉलेज एडमिशन का केंद्रीय रास्ता
सीयूईटी आज सिर्फ़ एक एंट्रेंस टेस्ट नहीं रहा, बल्कि देश के उच्च शिक्षा ढांचे का एक अहम स्तंभ बन चुका है। इसके ज़रिए देश की 48 केंद्रीय यूनिवर्सिटी, 36 राज्य विश्वविद्यालय, 26 डीम्ड यूनिवर्सिटी और 113 निजी विश्वविद्यालयों में अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम्स में दाख़िला होता है।
इसके अलावा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (IARI), नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज़ यूनिवर्सिटी और राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी जैसे प्रतिष्ठित सरकारी संस्थान भी सीयूईटी स्कोर को आधार बनाते हैं।
यानी एक परीक्षा, और देशभर के 200 से ज़्यादा संस्थानों के दरवाज़े।
कब शुरू हुआ सीयूईटी और क्यों बढ़ा इसका महत्व?
साल 2022 में केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए एक समान एडमिशन प्रक्रिया लागू करने के उद्देश्य से सीयूईटी की शुरुआत की गई थी। मक़सद था—अलग-अलग बोर्ड और राज्यों के छात्रों को एक समान मंच देना।
समय के साथ-साथ इस परीक्षा का दायरा और प्रतिस्पर्धा, दोनों तेज़ी से बढ़े हैं।
उम्र की कोई सीमा नहीं, लेकिन तैयारी का सही समय ज़रूरी
एनटीए के अनुसार, सीयूईटी के लिए कोई आयु सीमा तय नहीं है। 12वीं पास कोई भी छात्र यह परीक्षा दे सकता है, चाहे उसने एक या दो साल का गैप क्यों न लिया हो।
हालांकि, संबंधित यूनिवर्सिटी या कोर्स की अपनी उम्र संबंधी शर्तें लागू हो सकती हैं।
सीयूईटी, जेईई और कैट जैसी परीक्षाओं की तैयारी करवाने वाले शिक्षक अखिलेश सिंह का मानना है कि 12वीं के साथ सीयूईटी की तैयारी करना सबसे समझदारी भरा फ़ैसला है।
उनके मुताबिक, “हर साल प्रतियोगिता बढ़ रही है। जो छात्र स्कूल के दौरान ही तैयारी शुरू कर देता है, उसे बढ़त मिलती है।”
रजिस्ट्रेशन फ़ीस और परीक्षा की संभावित तारीख़ें
सीयूईटी के लिए तीन विषयों तक रजिस्ट्रेशन फ़ीस ₹1000 रखी गई है।
इसके बाद हर अतिरिक्त विषय के लिए ₹400 का शुल्क देना होगा।
आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए फ़ीस में छूट दी गई है।
एनटीए ने संकेत दिए हैं कि परीक्षा 11 से 31 मई के बीच आयोजित हो सकती है।
आवेदन की अंतिम तिथि 30 जनवरी है, जबकि रिज़ल्ट की तारीख़ अभी घोषित नहीं की गई है।
आंकड़े बताते हैं बढ़ती प्रतिस्पर्धा
सीयूईटी 2025 में देशभर से 13 लाख 54 हज़ार से अधिक छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 10 लाख 71 हज़ार से ज़्यादा छात्र परीक्षा में शामिल हुए।
यह परीक्षा 13 भारतीय भाषाओं में आयोजित की गई थी, जिससे इसकी पहुंच और समावेशिता और मजबूत हुई।
सीयूईटी का पैटर्न: तीन सेक्शन, सोच-समझकर चयन ज़रूरी
सीयूईटी का एग्ज़ाम पैटर्न तीन मुख्य हिस्सों में बंटा होता है:
लैंग्वेज सेक्शन
आईएमएस एजुकेशन के प्रोग्राम डायरेक्टर जतिंदर वोहरा बताते हैं कि ज़्यादातर केंद्रीय विश्वविद्यालयों, खासकर दिल्ली यूनिवर्सिटी, में लैंग्वेज पेपर अनिवार्य होता है। बीए इंग्लिश ऑनर्स जैसे कोर्स के लिए इंग्लिश भाषा लेना ज़रूरी है, जबकि अन्य कोर्स में छात्र 13 में से कोई भी भाषा चुन सकते हैं।
डोमेन सब्जेक्ट्स
ये वे विषय होते हैं, जो छात्र 12वीं में पढ़ते हैं—जैसे फ़िज़िक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स, अकाउंटेंसी, इकोनॉमिक्स, बायोलॉजी आदि।
एक्सपर्ट्स का साफ़ कहना है कि उन्हीं विषयों को चुनना चाहिए, जिन्हें छात्र ने 12वीं में पढ़ा हो।
जनरल एप्टीट्यूड टेस्ट (GAT)
यह सेक्शन जनरल नॉलेज, लॉजिकल रीजनिंग और बेसिक मैथ्स पर आधारित होता है। यह अनिवार्य नहीं है, लेकिन कई कोर्स और यूनिवर्सिटी में स्कोर को बेहतर बनाने में मदद करता है।
एनटीए के मुताबिक, कोई भी छात्र अधिकतम पांच पेपर दे सकता है।
हर पेपर में 50 प्रश्न, हर सही उत्तर पर 5 अंक और गलत पर 1 अंक की नेगेटिव मार्किंग होती है।
हर विषय के लिए 60 मिनट का समय मिलता है।
सिलेबस: एनसीईआरटी है सबसे बड़ी कुंजी
एनटीए पहले ही साफ़ कर चुका है कि सीयूईटी का सिलेबस पूरी तरह एनसीईआरटी आधारित है।
चाहे छात्र सीबीएसई से हो या किसी स्टेट बोर्ड से, एनसीईआरटी की गहरी समझ अनिवार्य है।
जतिंदर वोहरा के अनुसार, डोमेन पेपर का 90–95 प्रतिशत हिस्सा एनसीईआरटी से मेल खाता है।
पर्सेंटाइल का अर्थ: असली रैंकिंग कैसे तय होती है?
सीयूईटी का रिज़ल्ट पर्सेंटाइल के रूप में घोषित किया जाता है।
अखिलेश सिंह समझाते हैं कि अगर किसी छात्र को 90 पर्सेंटाइल मिलता है, तो इसका अर्थ है कि वह उस विषय में परीक्षा देने वाले 90 प्रतिशत छात्रों से बेहतर प्रदर्शन कर चुका है।
बोर्ड और सीयूईटी के बीच संतुलन ही सफलता की कुंजी
दिल्ली की छात्रा लीना, जो साइकोलॉजी ऑनर्स में दाख़िला लेना चाहती हैं, बताती हैं कि वह बोर्ड और सीयूईटी दोनों के लिए अलग-अलग टाइम स्लॉट तय करके पढ़ाई कर रही हैं।
वीकडे बोर्ड परीक्षा पर और वीकेंड सीयूईटी पर ध्यान देना उनकी रणनीति है।
बिना कोचिंग कैसे करें बेहतर तैयारी?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर छात्र:
एनसीईआरटी का बार-बार अध्ययन करें
नियमित मॉक टेस्ट दें
पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र हल करें
और सबसे अहम, समय प्रबंधन सीखें
तो वे बिना कोचिंग के भी सीयूईटी में शानदार स्कोर हासिल कर सकते हैं।
निष्कर्ष:-
सीयूईटी ने उच्च शिक्षा में दाख़िले की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समान बनाया है, लेकिन इसके साथ प्रतिस्पर्धा भी कई गुना बढ़ गई है। ऐसे में बोर्ड परीक्षा और सीयूईटी—दोनों को समान गंभीरता से लेते हुए, सही रणनीति और निरंतर अभ्यास ही सफलता का भरोसेमंद रास्ता है।
