21 दिसम्बर 2025 |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार
शुक्रवार को जारी की गई फाइलें उस पूर्ण और बिना शर्त खुलासे से काफी कम हैं, जिसकी उम्मीद अमेरिकी कांग्रेस, पीड़ितों और आम जनता को थी। हाल ही में पारित Epstein Files Transparency Act के तहत न्याय विभाग को 30 दिनों के भीतर सभी गैर-गोपनीय दस्तावेज़ सार्वजनिक करने थे, लेकिन अब साफ़ हो चुका है कि यह समयसीमा केवल काग़ज़ों तक ही सीमित रह गई।
क्या जारी हुआ और क्या अब भी छुपा है?
न्याय विभाग द्वारा जारी सामग्री में हजारों पन्ने शामिल बताए गए हैं, लेकिन इनमें से बड़ी संख्या में दस्तावेज़ या तो पहले से ज्ञात जानकारी का पुनरावर्तन हैं या फिर भारी मात्रा में रेडैक्ट (काले किए गए) हिस्सों से भरे हुए हैं।
डिप्टी अटॉर्नी जनरल Todd Blanche ने पहले ही संकेत दे दिया था कि सभी फाइलें एक साथ जारी नहीं की जाएंगी। उन्होंने कहा कि यौन तस्करी के पीड़ितों की गोपनीयता और सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए कुछ दस्तावेज़ों को चरणबद्ध तरीके से सार्वजनिक किया जाएगा।
उनके मुताबिक:
पहले चरण में कई लाख दस्तावेज़
आने वाले हफ्तों में कई लाख और फाइलें
लेकिन यही बयान कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा असंतोष बन गया।
कांग्रेस का आरोप: कानून का पालन नहीं, सिर्फ औपचारिकता
डेमोक्रेटिक सांसद Ro Khanna ने न्याय विभाग पर सीधा आरोप लगाया कि उसने कानून की भावना का नहीं, सिर्फ औपचारिकता का पालन किया है।
उनका कहना है कि:
कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि सभी गैर-गोपनीय रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं
हर रेडैक्शन का लिखित कारण बताया जाए
जनता को स्पष्ट टाइमलाइन दी जाए
लेकिन शुक्रवार को जारी फाइलों में न तो पर्याप्त नई जानकारी थी और न ही रेडैक्शन का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण।
FBI, ग्रैंड जूरी और अधूरी तस्वीर
इस कानून के तहत Federal Bureau of Investigation (FBI) के पास मौजूद रिकॉर्ड, इंटरव्यू समरी (FD-302 फॉर्म), चार्ज तय करने से जुड़े आंतरिक संवाद और ग्रैंड जूरी सामग्री भी सार्वजनिक होनी थी।
रिपब्लिकन सांसद Thomas Massie ने चेतावनी दी कि यदि जारी दस्तावेज़ों में उन पुरुषों के नाम नहीं हैं जिन पर यौन अपराधों के आरोप लगे हैं, तो यह साफ़ संकेत होगा कि सभी फाइलें अब भी छुपाई जा रही हैं।
तकनीकी विफलता: ‘फुल लाइब्रेरी’ का दावा और खाली सर्च बॉक्स
न्याय विभाग की वेबसाइट पर “Full Epstein Library” नाम से एक सर्च टूल उपलब्ध कराया गया, लेकिन यह भी आलोचनाओं से नहीं बच सका।
वेबसाइट पर लॉगिन के लिए लंबी कतार
बुनियादी शब्दों पर भी कोई रिज़ल्ट नहीं
कई PDF फाइलें लगभग पूरी तरह काली
इस तकनीकी अव्यवस्था ने सरकार की पारदर्शिता की मंशा पर और सवाल खड़े कर दिए।
द्विदलीय नाराज़गी: ‘यह कानून है, कोई विकल्प नहीं’
यह मामला सिर्फ डेमोक्रेट्स बनाम रिपब्लिकन्स तक सीमित नहीं रहा।
डेमोक्रेटिक पार्टी के आधिकारिक अकाउंट ने लिखा कि न्याय विभाग कानून का पालन करने में असफल रहा
रिपब्लिकन सांसद Marjorie Taylor Greene ने भी खुलकर कहा—“सभी फाइलें जारी कीजिए, यह कोई मांग नहीं, कानून है”
खन्ना और मैसी दोनों ने संकेत दिया है कि यदि सरकार ने जल्द ही पूरा खुलासा नहीं किया, तो अवमानना, अभियोजन, महाभियोग और निजी मुकदमों जैसे विकल्प खुले हैं।
एपस्टीन नेटवर्क: सत्ता, पैसा और प्रभावशाली नाम
एपस्टीन का मामला केवल यौन अपराधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिका के सत्ता-तंत्र, धनबल और प्रभावशाली नेटवर्क की गहरी परतों को भी उजागर करता है।
उसके संबंधों को लेकर वर्षों से सवाल उठते रहे हैं, जिनमें Bill Gates, Noam Chomsky, Bill Clinton और Donald Trump जैसे नाम चर्चा में रहे हैं।
हालांकि सभी ने किसी भी तरह की आपराधिक संलिप्तता से इनकार किया है, फिर भी फाइलों का अधूरा खुलासा संदेह और अटकलों को और मज़बूत करता है।
‘क्लाइंट लिस्ट’ विवाद और ट्रंप प्रशासन की मुश्किल
ट्रंप समर्थक आधार लंबे समय से यह मानता रहा है कि एपस्टीन के पास एक गुप्त “क्लाइंट लिस्ट” थी, जिसके ज़रिये अमीर और ताक़तवर लोगों को ब्लैकमेल किया जाता था।
हालांकि, अटॉर्नी जनरल Pam Bondi और FBI निदेशक Kash Patel ने जुलाई में जारी ज्ञापन में कहा कि ऐसी कोई सूची मौजूद नहीं है।
यही बयान ट्रंप प्रशासन के लिए राजनीतिक सिरदर्द बन गया, क्योंकि इससे पारदर्शिता के दावों पर सीधा सवाल खड़ा हुआ।
पीड़ितों की मांग: आधा सच नहीं, पूरी सच्चाई
एपस्टीन की सैकड़ों पीड़ित महिलाएं—जिनमें कई नाबालिग थीं—सालों से यह मांग कर रही हैं कि सरकार पूरा सच सामने लाए।
2008 में हुए विवादित प्ली डील से लेकर 2019 में न्यूयॉर्क जेल में एपस्टीन की मौत तक, यह मामला बार-बार यह सवाल उठाता रहा है कि क्या अमेरिकी न्याय व्यवस्था अमीर और ताक़तवर लोगों के लिए अलग मानदंड अपनाती है?
निष्कर्ष:-
पारदर्शिता की कसौटी पर अमेरिका
पूरी फाइलें जारी करता है या नहीं
क्योंकि एपस्टीन का मामला अब सिर्फ एक अपराधी की कहानी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना बन चुका है, जो सच को उजागर करने से बार-बार हिचकती रही है।
