25 दिसम्बर 2025| इंदौर | भोपाल | ✍🏻 Z S Razzaqi |वरिष्ठ पत्रकार
उन्नाव बलात्कार मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा दी गई राहत के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने जा रही है। CBI ने स्पष्ट किया है कि वह हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने के लिए विशेष अनुमति याचिका (SLP) जल्द से जल्द दाख़िल करेगी, जिसमें सेंगर की आजीवन कारावास की सज़ा निलंबित करते हुए उन्हें ज़मानत दी गई है।
CBI प्रवक्ता के अनुसार, हाई कोर्ट के फैसले का गहन अध्ययन करने के बाद यह निर्णय लिया गया है कि पीड़िता के हित, उसकी सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देना आवश्यक है।
ज़मानत के बावजूद जेल में रहेंगे सेंगर
हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी कुलदीप सेंगर की तत्काल रिहाई नहीं होगी। वे फिलहाल पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में 10 वर्ष की सज़ा काट रहे हैं, जिसके कारण वे जेल में ही बने रहेंगे।
हाई कोर्ट का तर्क और विवाद
दिल्ली हाई कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ — न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर — ने यह कहते हुए सेंगर की सज़ा निलंबित की कि वे पहले ही सात साल पाँच महीने से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं और उनकी अपील अभी लंबित है।
अदालत ने ज़मानत देते समय कई शर्तें भी लगाईं, जिनमें शामिल हैं:
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₹15 लाख का निजी मुचलका और समान राशि की तीन ज़मानतें
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पीड़िता के दिल्ली स्थित निवास से 5 किलोमीटर के दायरे में प्रवेश पर रोक
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पीड़िता या उसकी मां को किसी भी तरह से धमकाने या संपर्क करने पर प्रतिबंध
इसके बावजूद, यह फैसला सामाजिक और राजनीतिक हलकों में तेज़ विवाद और नाराज़गी का कारण बन गया।
पीड़िता और परिवार का विरोध
CBI ने अदालत में यह स्पष्ट किया कि उसने समय पर जवाब और लिखित दलीलें दाख़िल की थीं। साथ ही पीड़िता और उसके परिवार ने भी ज़मानत का विरोध करते हुए सुरक्षा खतरे और लगातार मिल रही धमकियों का हवाला दिया था।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद पीड़िता और उनकी मां ने विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें जबरन हटाए जाने की घटना ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और राहुल गांधी का हस्तक्षेप
इस घटनाक्रम के बाद मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पीड़िता और उसकी मां के साथ हुई पुलिस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
राहुल गांधी ने कहा कि
“एक बलात्कार पीड़िता के साथ ऐसा व्यवहार शर्मनाक है। दोषी को ज़मानत मिलना और पीड़िता को अपराधी की तरह ट्रीट करना — यह किस तरह का न्याय है?”
उन्होंने यह भी कहा कि
“हम सिर्फ़ एक मृत अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं के साथ एक मृत समाज की ओर बढ़ रहे हैं।”
राहुल गांधी ने ज़ोर देकर कहा कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना अधिकार है और उसे दबाना अपराध।
सोनिया गांधी से मुलाकात, सुप्रीम कोर्ट की तैयारी
इस बीच, पीड़िता अपनी मां के साथ 10 जनपथ स्थित सोनिया गांधी के आवास पहुँची, जहाँ उसने राहुल गांधी और सोनिया गांधी से मुलाकात की। पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट में मज़बूती से मुक़दमा लड़ने के लिए शीर्ष वकील उपलब्ध कराने की अपील की, जिस पर राहुल गांधी ने हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।
मामला क्या है?
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वर्ष 2017 में कुलदीप सिंह सेंगर को एक नाबालिग लड़की के अपहरण और बलात्कार का दोषी ठहराया गया था
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दिसंबर 2019 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह मामला उत्तर प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित किया गया
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पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत, सड़क हादसा और अन्य मामलों ने इस केस को देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में बदल दिया
आगे क्या?
अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जहाँ CBI हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देगी। यह मामला न सिर्फ़ एक व्यक्ति की सज़ा का सवाल है, बल्कि यह तय करेगा कि भारत की न्याय प्रणाली पीड़ितों के साथ खड़ी दिखाई देती है या सत्ता और प्रभाव के आगे झुकती है।
