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IND vs SA: संन्यास वापसी पर क्विंटन डी कॉक का बड़ा खुलासा—‘पूरा सोच-विचार करके लिया फैसला

मोहम्मद सलीम क्रिकेट रिपोर्टर  

मुल्लांपुर में भारत के खिलाफ खेले गए दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज ओपनर क्विंटन डी कॉक ने जिस सहजता और आत्मविश्वास के साथ 46 गेंदों पर शानदार 90 रन बनाए, उसने साफ कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से कुछ समय की दूरी ने उनके खेल और मानसिकता—दोनों को नई धार दी है। यह पारी केवल रनों का आंकड़ा नहीं थी, बल्कि यह उनके बदले हुए उद्देश्य, नई ऊर्जा और वापसी के फैसले की गवाही थी।


🔹 ‘मैच जीतने की भूख लौट आई है’

डी कॉक ने स्वीकार किया कि 2023 वनडे वर्ल्ड कप के बाद उन्होंने जब वनडे क्रिकेट से संन्यास लिया और फिर 2024 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल के बाद सबसे छोटे प्रारूप से भी दूरी बना ली, तब वह मानसिक रूप से थक चुके थे। लगातार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, बार-बार वही विरोधी और वही परिस्थितियाँ—इन सबने उनके भीतर की प्रतिस्पर्धी आग को कुछ हद तक ठंडा कर दिया था।

डी कॉक के शब्दों में,

“संन्यास से पहले मैं इस टीम के लिए मैच जीतने की भूख खोता जा रहा था। लेकिन जब मैंने ब्रेक लिया, तब मुझे एहसास हुआ कि मैं क्या खो रहा था। अब ऐसा लग रहा है जैसे मेरी भूख पहले से कहीं ज़्यादा लौट आई है।”

🔹 ‘अब सिर्फ खेलने नहीं, जीतने के लिए खेल रहा हूँ’

32 वर्षीय बाएं हाथ के बल्लेबाज़ ने कहा कि युवा दिनों में उनका ध्यान रन बनाने और खुद को साबित करने पर रहता था, लेकिन अब उनकी सोच पूरी तरह बदल चुकी है।

“अब मैं सिर्फ खेलने के लिए नहीं, बल्कि हर मैच जीतने के लिए मैदान में उतरता हूँ। यह ऊर्जा नई है, ताज़ा है।”

आज के पावर-हिटिंग के दौर में भी डी कॉक का भरोसा पारंपरिक स्ट्रोकप्ले पर है। उनकी बल्लेबाज़ी में वही पुरानी खूबसूरती और सहजता दिखती है, जिसने उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ओपनरों में शामिल किया।

🔹 ब्रेक क्यों था ज़रूरी?

डी कॉक ने साफ किया कि संन्यास से वापसी कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था।

“यह ऐसा नहीं था कि मैं एक दिन उठा और फैसला कर लिया। जितना ज़्यादा समय मैंने ब्रेक में बिताया, उतना ही महसूस किया कि मैं वापसी के लिए तैयार हूँ। मैं एक दशक से ज़्यादा समय तक लगातार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुका था और पूरी तरह थक चुका था।”

उनका मानना है कि अगर वह उस समय ब्रेक नहीं लेते, तो शायद उनका करियर और जल्दी खत्म हो जाता।

“अब मुझे लगता है कि मैं अपने करियर को और लंबा खींच सकता हूँ। मैं शारीरिक रूप से भी फिट हूँ और मानसिक रूप से बिल्कुल भी थका हुआ नहीं।”

🔹 क्या टेस्ट क्रिकेट में होगी वापसी?

डी कॉक ने टेस्ट क्रिकेट से पहले ही संन्यास ले लिया था और 54 टेस्ट में लगभग 5000 रन बनाकर उन्होंने अपनी तकनीक और धैर्य का लोहा मनवाया। हालांकि, जब उनसे टेस्ट क्रिकेट में वापसी को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज़ में साफ जवाब दिया—

“अभी के लिए इसका जवाब सीधा ‘नहीं’ है।”

🔹 तीनों फॉर्मेट खेलने की अहमियत

डी कॉक का मानना है कि लंबे और टिकाऊ करियर के लिए किसी न किसी स्तर पर तीनों फॉर्मेट खेलना बेहद ज़रूरी है।

“जो खिलाड़ी लंबे समय तक टिकते हैं, वे वही होते हैं जिन्होंने तीनों फॉर्मेट खेले होते हैं। इससे आप खुद को और अपनी तकनीक को बेहतर समझते हैं।”

उनके अनुसार, भले ही आजकल एक-फॉर्मेट विशेषज्ञों की संख्या बढ़ रही हो, लेकिन एक संपूर्ण क्रिकेटर बनने के लिए सभी प्रारूपों का अनुभव अनमोल है।


🔹 निष्कर्ष

क्विंटन डी कॉक की वापसी केवल एक खिलाड़ी की वापसी नहीं है, बल्कि यह उस मानसिक ताज़गी और आत्मबोध की कहानी है, जो कभी-कभी खेल से दूरी बनाकर ही हासिल होती है। भारत के खिलाफ उनकी विस्फोटक लेकिन शालीन पारी ने यह साबित कर दिया कि सही समय पर लिया गया ब्रेक किसी भी महान खिलाड़ी को और भी बेहतर बना सकता है।

दक्षिण अफ्रीका के लिए यह संकेत साफ है—डी कॉक अब सिर्फ लौटे नहीं हैं, बल्कि पहले से कहीं ज़्यादा खतरनाक इरादों के साथ मैदान में उतरे हैं।




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