Type Here to Get Search Results !

ADS5

ADS2

मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे पर विवाद: USCIRF ने ट्रंप प्रशासन से RSS प्रमुख का वीजा रद्द करने की मांग की

न्यूयॉर्क/नई दिल्ली 28 अगस्त 2026:✍🏻 Z S Razzaqi | वरिष्ठ पत्रकार 

न्यूयॉर्क में 29 अगस्त को होने वाले अंतरधार्मिक कार्यक्रम से पहले अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की अपील; USCIRF ने RSS से जुड़े संगठनों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के आरोपों का हवाला दिया

 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे को लेकर एक नया राजनीतिक और कूटनीतिक विवाद सामने आया है। अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता पर नजर रखने वाली अमेरिकी सरकार की सलाहकार संस्था United States Commission on International Religious Freedom (USCIRF) ने ट्रंप प्रशासन से मोहन भागवत को जारी किए गए अमेरिकी वीजा को रद्द करने की मांग की है।

भागवत इस समय तीन देशों की यात्रा के तहत अमेरिका में हैं। उनके न्यूयॉर्क प्रवास के दौरान 29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित Infosys Theatre में ‘Universal Oneness Celebrations’ कार्यक्रम को संबोधित करने का कार्यक्रम है। आयोजकों के अनुसार यह एक अंतरधार्मिक आयोजन है, जिसमें विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोगों के साथ संवाद की योजना है।

USCIRF ने क्या कहा?

USCIRF ने मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा पर चिंता व्यक्त करते हुए ट्रंप प्रशासन से उनके वीजा को रद्द करने पर विचार करने का आग्रह किया है। आयोग का आरोप है कि RSS से जुड़े कुछ संगठनों के सदस्यों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसक हमलों में शामिल होने के आरोप रहे हैं।

USCIRF के चेयरमैन आसिफ महमूद के हवाले से कहा गया है कि आयोग ने धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघनों में शामिल लोगों के खिलाफ लक्षित प्रतिबंधों पर विचार करने की सिफारिश की है। इसी क्रम में मोहन भागवत का वीजा रद्द करने की मांग भी सामने रखी गई है।

हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि उपलब्ध रिपोर्ट में USCIRF की ओर से लगाए गए आरोपों को आरोप और चिंता के रूप में प्रस्तुत किया गया है। रिपोर्ट में इन आरोपों के आधार पर किसी अमेरिकी न्यायिक संस्था द्वारा मोहन भागवत के खिलाफ कोई आपराधिक दोषसिद्धि बताए जाने की जानकारी नहीं है।

न्यूयॉर्क में क्या है मोहन भागवत का कार्यक्रम?

मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे का महत्वपूर्ण पड़ाव न्यूयॉर्क है। यहां 29 अगस्त को Universal Oneness Celebrations नामक कार्यक्रम आयोजित किया जाना है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस आयोजन को एक inter-faith gathering के तौर पर पेश किया गया है। इसका उद्देश्य अलग-अलग धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों को एक मंच पर लाना बताया गया है।

ऐसे में USCIRF की मांग ने भागवत के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर अमेरिकी सार्वजनिक और राजनीतिक विमर्श में धार्मिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक व्यक्तित्वों के अमेरिकी दौरे जैसे मुद्दों को भी चर्चा में ला दिया है।

USCIRF आखिर है क्या?

United States Commission on International Religious Freedom (USCIRF) अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर नजर रखने वाली एक अमेरिकी सरकारी सलाहकार संस्था है। यह विभिन्न देशों में धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक अल्पसंख्यकों से जुड़े मामलों पर अमेरिकी सरकार को अपनी राय और सिफारिशें देती है।

मोहन भागवत के मामले में आयोग की मांग सीधे तौर पर अमेरिकी प्रशासन से संबंधित है। इसलिए USCIRF की अपील और अमेरिकी सरकार का अंतिम निर्णय—दोनों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

उपलब्ध रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन ने USCIRF की मांग स्वीकार कर ली है या मोहन भागवत का वीजा वास्तव में रद्द कर दिया गया है। खबर का मौजूदा तथ्य यही है कि आयोग ने वीजा रद्द करने की मांग की है

भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम

मोहन भागवत का अमेरिका दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत और अमेरिका के बीच राजनीतिक, आर्थिक, रणनीतिक और सामरिक संबंध लगातार वैश्विक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं।

ऐसे माहौल में किसी प्रमुख भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन के शीर्ष नेता के अमेरिकी दौरे पर अमेरिकी सरकारी सलाहकार संस्था की आपत्ति स्वाभाविक रूप से व्यापक राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा को जन्म दे सकती है।

हालांकि, उपलब्ध समाचार सामग्री इस घटना को मुख्यतः USCIRF की अपील और भागवत के निर्धारित कार्यक्रम के संदर्भ में प्रस्तुत करती है। इसलिए इसके आधार पर अमेरिकी सरकार के अंतिम रुख या भारत-अमेरिका संबंधों पर तत्काल प्रभाव का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

विवाद का केंद्र धार्मिक स्वतंत्रता बनाम राजनीतिक-सामाजिक अभिव्यक्ति

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर उठे सवाल हैं।

USCIRF ने जहां RSS से जुड़े संगठनों के कुछ सदस्यों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के आरोपों का हवाला दिया है, वहीं भागवत की न्यूयॉर्क यात्रा का घोषित कार्यक्रम एक अंतरधार्मिक आयोजन है।

यही विरोधाभास इस मामले को और महत्वपूर्ण बनाता है—एक ओर धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर अमेरिकी संस्था की चिंता है, तो दूसरी ओर भागवत का प्रस्तावित कार्यक्रम विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक समुदायों के बीच संवाद पर आधारित बताया गया है।

इसलिए इस विवाद को केवल वीजा संबंधी प्रशासनिक मामला मानने के बजाय इसके व्यापक राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ को समझना भी जरूरी है।

क्या मोहन भागवत का कार्यक्रम प्रभावित होगा?

उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर फिलहाल इतना ही कहा जा सकता है कि 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में उनका कार्यक्रम निर्धारित है और USCIRF ने उनके वीजा को रद्द करने की मांग की है।

रिपोर्ट में यह जानकारी नहीं दी गई है कि अमेरिकी प्रशासन ने इस मांग पर अंतिम निर्णय लिया है या कार्यक्रम को रद्द अथवा स्थगित करने का कोई आदेश जारी किया है।

इसलिए ‘मोहन भागवत का अमेरिकी वीजा रद्द हो गया’ कहना उपलब्ध तथ्यों से आगे बढ़ना होगा। सही तथ्य यह है कि USCIRF ने अमेरिकी प्रशासन से उनका वीजा रद्द करने का आग्रह किया है।

आगे क्या होगा?

अब निगाहें अमेरिकी प्रशासन के रुख पर होंगी। यदि अमेरिकी सरकार USCIRF की सिफारिश पर कोई निर्णय लेती है, तो यह मामला और अधिक राजनीतिक महत्व हासिल कर सकता है। दूसरी ओर, यदि प्रशासन इस मांग को स्वीकार नहीं करता है, तो भी धार्मिक स्वतंत्रता और भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर अमेरिकी संस्थाओं की चिंताएं बहस का विषय बनी रह सकती हैं।

फिलहाल इस घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि USCIRF की मांग को अमेरिकी सरकार के अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

मोहन भागवत की यात्रा और न्यूयॉर्क में प्रस्तावित अंतरधार्मिक कार्यक्रम के बीच उठे इस विवाद ने एक बार फिर भारत की धार्मिक स्वतंत्रता, RSS की वैश्विक छवि और अमेरिका में भारतीय राजनीतिक-सामाजिक नेतृत्व की गतिविधियों से जुड़े सवालों को अंतरराष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है।

निष्कर्ष:-

मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे को लेकर पैदा हुआ विवाद अभी अपने शुरुआती चरण में है। USCIRF ने ट्रंप प्रशासन से उनका वीजा रद्द करने की मांग की है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार अमेरिकी प्रशासन की ओर से वीजा रद्द किए जाने का कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

ऐसे में इस मामले को तथ्यात्मक रूप से ‘USCIRF की वीजा रद्द करने की मांग’ के रूप में देखना अधिक सटीक होगा, न कि इसे पहले से लिया गया अमेरिकी प्रशासन का निर्णय मानना।

आने वाले दिनों में अमेरिकी सरकार की प्रतिक्रिया और 29 अगस्त के न्यूयॉर्क कार्यक्रम को लेकर होने वाली गतिविधियां इस विवाद की दिशा तय कर सकती हैं।


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

ADS3

ADS4