नई दिल्ली | 5 मई 2026 |✍🏻 Z S Razzaqi | वरिष्ठ पत्रकार
यह लेख गहन शोध, चुनाव आयोग के आंकड़ों, अदालती दस्तावेजों, मीडिया रिपोर्टों और वास्तविक घटनाओं पर आधारित है। हम किसी पक्ष को दोषी ठहराने के बजाय तथ्यों का विश्लेषण करेंगे, समस्याओं की गहराई समझेंगे और ठोस समाधान सुझाएंगे।
इतिहास: 2021 चुनाव — हिंसा और दांधली की मिसाल
2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में राज्य की छवि बुरी तरह प्रभावित हुई। चुनाव आयोग और स्वतंत्र रिपोर्टों के अनुसार, पूरे चुनाव अभियान के दौरान सैकड़ों हिंसा की घटनाएं हुईं, बूथ कैप्चरिंग, वोटरों को धमकाना और मतदान केंद्रों पर हावी होने की शिकायतें आईं। TMC पर “चुनावी हिंसा” का आरोप लगा, जबकि TMC ने BJP पर केंद्रीय बलों के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
- परिणाम: TMC ने 213 सीटें जीतीं, BJP को 77 मिलीं।
- आरोप: विपक्ष ने दावा किया कि कई बूथों पर मतदान से पहले या बाद में अनियमितताएं हुईं। कुछ क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत असामान्य रूप से ऊंचा या कम दर्ज किया गया।
2024 लोकसभा चुनावों में TMC ने 29 सीटें जीतीं (वोट शेयर ~46%), BJP को 12 मिलीं। फिर भी दोनों पक्षों ने परस्पर धांधली के आरोप लगाए।
2026 विधानसभा चुनाव: नया मोड़ और नई विवाद
2026 के चुनावों में BJP ने भारी बहुमत (200+ सीटें) हासिल कर TMC के 15 वर्षे पुराने शासन का अंत किया। मतदान प्रतिशत 92% से अधिक रहा, जो उच्च है लेकिन संदेह भी पैदा करता है। TMC ने परिणामों पर सवाल उठाए, कुछ सीटों में ट्रेंड गायब होने, स्ट्रॉन्ग रूम के पास बिजली गुल होने और गिनती में हेराफेरी के आरोप लगाए। वहीं BJP ने TMC पर पुरानी बूथ जामिंग और हिंसा की पुनरावृत्ति का आरोप लगाया।
चुनाव आयोग की कार्रवाई:
- फल्ता विधानसभा में पूरे 285 बूथों पर रिपोलिंग का आदेश (EVM बटनों पर ब्लैक टेप, परफ्यूम लगाने, वोटर धमकी और साथियों द्वारा वोट डालने जैसे आरोप)।
- दक्षिण 24 परगना में 15 बूथों पर रिपोलिंग।
- कई अन्य बूथों पर जांच।
वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं: सबसे बड़ी समस्या
पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट सबसे विवादास्पद मुद्दा रही है:
- लाखों संदिग्ध एंट्री: ECI की Special Intensive Revision (SIR) में 50-60 लाख नाम डिलीट किए गए। 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ मतदाता रह गए।
- डुप्लिकेट EPIC नंबर: अलग-अलग राज्यों में एक ही वोटर आईडी नंबर वाले मामले सामने आए। TMC ने इसे BJP के फायदे का षड्यंत्र बताया, जबकि ECI ने स्पष्ट किया कि डुप्लिकेट नंबर जरूरी नहीं कि फर्जी मतदाता हों।
- लॉजिकल एनोमली: एक व्यक्ति के 200+ बच्चे, असंभव उम्र अंतर (माता-पिता मात्र 15 वर्ष बड़े), 1.25 करोड़+ रिकॉर्ड्स में त्रुटियां। 12.5 मिलियन+ संदिग्ध मतदाता फ्लैग किए गए।
- फर्जी फॉर्म 6: कुछ ERO द्वारा फर्जी आवेदन स्वीकार करने के मामले, जांच शुरू।
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि वोटर लिस्ट की सफाई जरूरी है, लेकिन प्रक्रिया पारदर्शी न हो तो यह खुद “वोट चोरी” का माध्यम बन सकती है।
दांधली के अन्य रूप
- बूथ लेवल मैनिपुलेशन: बूथ जामिंग, फर्जी वोटिंग, इंडेलिबल इंक न लगाना।
- मनी-मसल पावर: पैसे बांटना, धमकी, महिलाओं पर अत्याचार (संदेशखाली जैसे मामले)।
- EVM विवाद: टेपिंग, परफ्यूम जैसे आरोप, हालांकि ECI और कई अध्ययन EVM को कागजी मतपत्रों से ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। VVPAT ऑडिट में अब तक बड़े मिसमैच नहीं मिले।
- पोस्टल बैलट और गिनती: स्ट्रॉन्ग रूम सिक्योरिटी पर सवाल।
मात्रा का अनुमान: सटीक “कितनी वोट चोरी” बताना असंभव है क्योंकि कोई स्वतंत्र ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं। लेकिन रिपोलिंग, लाखों डिलीशन और हिंसा के आंकड़े संकेत देते हैं कि अनियमितताएं “व्यापक” स्तर पर रही हैं — खासकर ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों में।
कारण विश्लेषण
- राजनीतिक संस्कृति: सत्ता का दुरुपयोग, स्थानीय गुंडागर्दी, प्रशासन का पक्षपात।
- वोटर लिस्ट प्रबंधन: आंतरिक माइग्रेशन, मृत/स्थानांतरित मतदाताओं की डिलीशन में देरी।
- कमजोर निगरानी: कुछ क्षेत्रों में केंद्रीय बलों की कमी या देरी।
- ध्रुवीकरण: हिंदू-मुस्लिम, जाति और क्षेत्रीय विभाजन का फायदा उठाना।
समाधान: ठोस और व्यावहारिक सुझाव
- वोटर लिस्ट सुधार:
- Aadhaar-EPIC लिंकिंग (गोपनीयता सुनिश्चित करते हुए)।
- ब्लॉक स्तर पर वार्षिक फिजिकल वेरिफिकेशन + डिजिटल ऑडिट।
- AI और बायोमेट्रिक्स का उपयोग फर्जी एंट्री रोकने के लिए।
- EVM-VVPAT मजबूती:
- हर बूथ पर VVPAT स्लिप का 100% ऑडिट (चरणबद्ध तरीके से)।
- EVM सॉफ्टवेयर ओपन सोर्स या स्वतंत्र टेक्निकल ऑडिट।
- EVM निर्माण और स्टोरेज में पारदर्शिता।
- चुनाव प्रक्रिया सुधार:
- एक चरण में चुनाव (जहां संभव)।
- वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य, लाइव स्ट्रीमिंग।
- राजनीतिक दलों के लिए कैश ट्रांसफर पर सख्त निगरानी और डिजिटल फंडिंग।
- Model Code of Conduct का सख्ती से पालन, तत्काल कार्रवाई।
- संस्थागत बदलाव:
- ECI की स्वायत्तता बढ़ाना, लेकिन जवाबदेही भी।
- स्थानीय पुलिस के बजाय अधिक केंद्रीय/निष्पक्ष फोर्स।
- चुनावी अपराधों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट।
- नागरिक शिक्षा: मतदाता जागरूकता अभियान।
- लंबी अवधि का समाधान: राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र, अपराधीकरण रोकना और विकास-आधारित राजनीति को बढ़ावा।
निष्कर्ष:-
लोकतंत्र को बचाने का समय
पश्चिम बंगाल के चुनावों में वोट चोरी और दांधली की घटनाएं लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। चाहे 2021 में TMC की जीत हो या 2026 में BJP की, जब भी अनियमितताएं होती हैं तो जनता का विश्वास डगमगाता है। लाखों फर्जी/संदिग्ध वोटर, हिंसा और बूथ स्तर की हेराफेरी साबित करती है कि समस्या गहरी है।
सकारात्मक पक्ष: चुनाव आयोग ने रिपोलिंग, लिस्ट सफाई और सख्ती दिखाई है। EVM ने कागजी मतपत्रों की तुलना में बड़े पैमाने पर rigging कम किया है। लेकिन विश्वास बहाली के लिए और अधिक पारदर्शिता जरूरी है।
अंत में, चुनाव जनता का त्योहार है। इसे शुद्ध रखने की जिम्मेदारी ECI, राजनीतिक दल, मीडिया और हम सबकी है। अगर हम आज समाधान नहीं अपनाएंगे तो कल लोकतंत्र की नींव हिल जाएगी। पश्चिम बंगाल समेत पूरे भारत को “एक व्यक्ति, एक वोट, एक सच्चा वोट” का मंत्र अपनाना होगा।
जय हिंद। सशक्त लोकतंत्र की कामना के साथ।
