29 अप्रैल 2026 | विस्तृत विश्लेषण |✍🏻 Z S Razzaqi | अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार
अमेरिका जहां दशकों से आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए ईरान को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं ईरान अब क्रिप्टोकरेंसी को एक ऐसे हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है जो पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम की पकड़ से बाहर है।
यह पूरी कहानी किसी हॉलीवुड थ्रिलर जैसी लग सकती है, लेकिन हकीकत यह है कि आज क्रिप्टोकरेंसी ईरान की अर्थव्यवस्था, उसके युद्ध तंत्र और आम नागरिकों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है। दूसरी ओर अमेरिका इस डिजिटल रास्ते को बंद करने के लिए लगातार नए प्रतिबंध और निगरानी तंत्र विकसित कर रहा है।
दुनिया के दो बड़े भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के बीच यह “क्रिप्टो कैट-एंड-माउस गेम” अब वैश्विक वित्तीय व्यवस्था के भविष्य को भी प्रभावित कर सकता है।
युद्ध शुरू होने से पहले ही लोगों ने बचाना शुरू कर दिया था पैसा
तेहरान के एक क्रिप्टो यूजर फिरोज़ ने बताया कि फरवरी के आखिर में अमेरिका और इज़राइल के हमलों से कुछ घंटे पहले ही उन्हें अंदेशा हो गया था कि हालात बिगड़ने वाले हैं।
उन्होंने तुरंत अपना पूरा क्रिप्टो निवेश ईरान के सबसे बड़े डिजिटल एक्सचेंज “नोबिटेक्स” से निकालकर निजी डिजिटल वॉलेट में ट्रांसफर कर दिया।
उनका डर सिर्फ युद्ध नहीं था। उन्हें आशंका थी कि अगर संघर्ष बढ़ा तो सरकार, साइबर हमले या अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई के कारण एक्सचेंज पर रखी रकम फंस सकती है।
यह डर केवल एक व्यक्ति का नहीं था। ईरान में लाखों लोग अब बैंक खातों से ज्यादा भरोसा क्रिप्टो वॉलेट पर करने लगे हैं।
क्यों क्रिप्टो ईरान के लिए जीवनरेखा बन गया?
ईरान की अर्थव्यवस्था वर्षों से अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में है।
अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम से लगभग कट चुके ईरान के लिए डॉलर तक पहुंच बेहद मुश्किल हो चुकी है।
2018 के बाद से ईरानी मुद्रा “रियाल” अपनी लगभग 90 प्रतिशत कीमत खो चुकी है।
महंगाई लगातार बढ़ रही है। आम लोगों की बचत तेजी से खत्म होती जा रही है।
ऐसे में बिटकॉइन, टेथर (USDT) और अन्य डिजिटल मुद्राएं लोगों के लिए एक वैकल्पिक आर्थिक सुरक्षा कवच बन गई हैं।
क्रिप्टो के जरिए लोग:
अपनी बचत को महंगाई से बचा रहे हैं
अंतरराष्ट्रीय भुगतान कर पा रहे हैं
विदेशी वस्तुएं खरीद रहे हैं
देश से बाहर पैसा भेज रहे हैं
बैंकिंग प्रतिबंधों को बायपास कर रहे हैं
यही कारण है कि ईरान का क्रिप्टो इकोसिस्टम पिछले वर्ष लगभग 7.78 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
सिर्फ आम लोग नहीं, ईरानी सत्ता तंत्र भी कर रहा है इस्तेमाल
विशेषज्ञों के अनुसार ईरान की क्रिप्टो गतिविधियों का बड़ा हिस्सा सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ा हुआ है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 की अंतिम तिमाही में ऑन-चेन गतिविधियों का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा IRGC से जुड़ा पाया गया।
विश्लेषकों का मानना है कि वास्तविक हिस्सा इससे कहीं अधिक हो सकता है क्योंकि कई सरकारी वॉलेट अब तक पहचाने ही नहीं गए हैं।
तेल, हथियार और क्रिप्टो: प्रतिबंधों से बचने का नया तरीका
क्रिप्टोकरेंसी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम की तरह आसानी से ट्रैक नहीं किया जा सकता।
यही वजह है कि ईरान कथित रूप से:
तेल बेचने
हथियार खरीदने
विदेशी भुगतान करने
समुद्री व्यापार संचालन
आयात-निर्यात भुगतान
जैसी गतिविधियों में क्रिप्टो का उपयोग कर रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अप्रैल में ईरानी अधिकारियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से क्रिप्टो में टोल लेने की योजना भी बनाई।
अगर यह मॉडल सफल होता है, तो यह वैश्विक समुद्री व्यापार और प्रतिबंध प्रणाली के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
अमेरिका की नई रणनीति: “पैसे का पीछा करो”
अमेरिका अब समझ चुका है कि सिर्फ पारंपरिक प्रतिबंध पर्याप्त नहीं हैं।
इसी कारण अमेरिकी ट्रेजरी विभाग और OFAC (Office of Foreign Assets Control) अब ब्लॉकचेन नेटवर्क्स और डिजिटल वॉलेट्स की निगरानी तेज कर चुके हैं।
हाल ही में अमेरिका ने ईरान से जुड़े कई क्रिप्टो वॉलेट्स पर कार्रवाई करते हुए लगभग 344 मिलियन डॉलर की डिजिटल संपत्तियां फ्रीज कर दीं।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने साफ कहा:
“हम तेहरान के हर उस वित्तीय रास्ते को निशाना बनाएंगे जिसके जरिए वह प्रतिबंधों से बचने की कोशिश कर रहा है।”
यह बयान इस बात का संकेत है कि भविष्य में क्रिप्टो पर भू-राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है।
ईरान में क्रिप्टो माइनिंग: सस्ती बिजली से ‘डिजिटल डॉलर’ बनाना
ईरान में ऊर्जा पर भारी सरकारी सब्सिडी मिलती है।
यही वजह है कि वहां बड़े पैमाने पर क्रिप्टो माइनिंग होती है।
विशेषज्ञों का दावा है कि IRGC सस्ती बिजली का इस्तेमाल कर बिटकॉइन माइनिंग के जरिए “गैर-प्रतिबंधित पैसा” तैयार कर रहा है।
सरल शब्दों में कहें तो:
ईरान अपनी ऊर्जा को डिजिटल मुद्रा में बदल रहा है।
यह मॉडल अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती है क्योंकि इसे रोकना पारंपरिक बैंक खातों को फ्रीज करने जितना आसान नहीं।
आम ईरानी नागरिकों पर पड़ रहा सबसे ज्यादा असर
हालांकि क्रिप्टो ने ईरानियों को कुछ राहत दी है, लेकिन इसके नुकसान भी गंभीर हैं।
अमेरिका ने पूरे ईरानी क्रिप्टो इकोसिस्टम को “हाई-रिस्क” घोषित कर दिया है।
इसके कारण:
अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज ईरानी खातों को ब्लॉक कर रहे हैं
विदेशी कंपनियां ईरानी यूजर्स से दूरी बना रही हैं
टेक विशेषज्ञ ज्ञान साझा करने से बच रहे हैं
डिजिटल लेन-देन लगातार कठिन हो रहे हैं
युद्ध और इंटरनेट बंदी ने स्थिति और खराब कर दी है।
साइबर युद्ध भी बन चुका है बड़ा खतरा
क्रिप्टो की दुनिया में सिर्फ आर्थिक लड़ाई नहीं, साइबर युद्ध भी जारी है।
2025 में इज़राइल से जुड़े माने जाने वाले हैकर समूह “Predatory Sparrow” ने ईरान के नोबिटेक्स प्लेटफॉर्म पर बड़ा साइबर हमला किया था।
करीब 90 मिलियन डॉलर के क्रिप्टो एसेट चोरी कर लिए गए।
बताया गया कि हैकर्स ने इन डिजिटल संपत्तियों को ऐसे वॉलेट में भेज दिया जिनकी निजी चाबी मौजूद नहीं थी, यानी वह पैसा हमेशा के लिए नष्ट हो गया।
यह हमला सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं था, बल्कि यह संदेश भी था कि डिजिटल युद्ध अब वास्तविक युद्ध का हिस्सा बन चुका है।
क्या क्रिप्टो भविष्य में प्रतिबंधों को बेअसर कर देगा?
यह सबसे बड़ा सवाल है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि रूस, ईरान, उत्तर कोरिया और अन्य प्रतिबंधित देश बड़े पैमाने पर क्रिप्टो नेटवर्क्स का इस्तेमाल करने लगते हैं, तो अमेरिकी प्रतिबंधों की प्रभावशीलता कमजोर पड़ सकती है।
हालांकि अमेरिका भी तेजी से नई तकनीक विकसित कर रहा है।
ब्लॉकचेन एनालिटिक्स कंपनियां अब ट्रांजैक्शन ट्रैकिंग, वॉलेट मैपिंग और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान में पहले से कहीं अधिक सक्षम हो चुकी हैं।
यानी यह लड़ाई लगातार विकसित हो रही है।

.jpg)